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रूस की संसद में एक ऐसा बिल पास किया है जिसके तहत देश के बैंक अब यूक्रेनी ड्रोन हमलों से बचाव में सीधे भूमिका निभाएंगे. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में अब एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है. रूस की संसद के निचले सदन ने ऐसा बिल पास किया है, जिसके तहत देश के बैंक और उनके कर्मचारी ड्रोन हमलों के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं. इस योजना में बैंक शाखाओं पर इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम लगाए जाएंगे और कुछ कर्मचारियों को ड्रोन रोकने या गिराने की जिम्मेदारी दी जाएगी.
यह कदम ऐसे समय आया है जब यूक्रेन लगातार लंबी दूरी वाले ड्रोन हमलों से रूस के अंदरूनी इलाकों को निशाना बना रहा है. रूस के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हाल के महीनों में ड्रोन हमले बढ़े हैं. ऐसे में सरकार अब केवल सेना या सुरक्षा एजेंसियों पर निर्भर रहने के बजाय नागरिक संस्थानों को भी सुरक्षा ढांचे में शामिल करना चाहती है.
बैंक शाखाओं का इस्तेमाल: बैंक लगभग हर शहर और कस्बे में मौजूद हैं, इसलिए रूस मानता है कि उन्हें एयर डिफेंस नेटवर्क का हिस्सा बनाकर सुरक्षा कवरेज बढ़ाया जा सकता है. योजना के तहत बैंक अपने परिसरों पर एंटी-ड्रोन उपकरण लगाएंगे. इससे ड्रोन के सिग्नल बाधित किए जा सकेंगे और हमले को रोकने में मदद मिलेगी.
कर्मचारियों को मिलेगी नई जिम्मेदारी: बिल के अनुसार कुछ चुने हुए बैंक कर्मचारियों को ड्रोन जैम करने, कंट्रोल सिग्नल रोकने और जरूरत पड़ने पर ड्रोन को नष्ट करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है. खास बात यह है कि ऐसे कदम उठाने के लिए उन्हें हर बार सुरक्षा एजेंसियों की मंजूरी का इंतजार नहीं करना होगा.
रूस के लिए मुश्किल बन रहे ड्रोन: पिछले कुछ समय में यूक्रेन ने ऐसे ड्रोन विकसित किए हैं जो लंबी दूरी तक जाकर हमले कर सकते हैं. पश्चिमी विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे ड्रोन भी रूस की सप्लाई लाइनों और सेना की गतिविधियों को काफी प्रभावित कर रहे हैं. इससे रूस की मौजूदा एयर डिफेंस व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है.
विशेषज्ञों ने क्या कहा: लंदन स्थित Royal United Services Institute के शोधकर्ता Thomas Withington के मुताबिक यह बिल इस बात का संकेत है कि रूस की पारंपरिक ड्रोन सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं रह गई है. उनका मानना है कि अगर सैन्य स्तर की सुरक्षा सफल होती तो नागरिक संस्थानों को इस तरह शामिल करने की जरूरत नहीं पड़ती.
इतनी बड़ी व्यवस्था कैसे चलेगी: हालांकि, बिल पास हो चुका है, लेकिन इसमें ज्यादा तकनीकी जानकारी नहीं दी गई है. पूरे देश में हजारों बैंक शाखाओं पर उपकरण लगाना और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना बहुत बड़ा प्रशासनिक काम होगा. इसे लागू करने में समय और भारी खर्च दोनों लग सकते हैं.
आम नागरिकों पर पड़ेगा असर: राष्ट्रपति Vladimir Putin लंबे समय से कोशिश करते रहे हैं कि आम रूसी नागरिकों को युद्ध का असर कम महसूस हो. लेकिन अब बैंकों और कर्मचारियों को सीधे सुरक्षा भूमिका में लाने से युद्ध की वास्तविकता आम लोगों के और करीब आ सकती है. इससे लोगों के बीच चिंता भी बढ़ सकती है.
Sberbank समेत कई संस्थाएं दायरे में: इस योजना में रूस का केंद्रीय बैंक और सरकारी हिस्सेदारी वाला बड़ा बैंक Sberbank भी शामिल हो सकता है. इससे साफ है कि सरकार इस योजना को केवल सीमित स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के रूप में देख रही है.
अंतिम मंजूरी अभी बाकी: वैसे तो निचले सदन से बिल पास हो चुका है, लेकिन इसे अभी Federation Council और राष्ट्रपति Vladimir Putin की मंजूरी मिलना बाकी है. मंजूरी के बाद ही यह कानून पूरी तरह लागू हो पाएगा.
रूस का यह कदम दिखाता है कि आधुनिक युद्ध अब केवल सेना तक सीमित नहीं रह गया है. ड्रोन तकनीक ने युद्ध की रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है और अब नागरिक संस्थानों को भी सुरक्षा ढांचे में शामिल किया जा रहा है. अगर यह योजना लागू होती है तो रूस में बैंक सिर्फ वित्तीय संस्थान नहीं बल्कि सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा भी बन जाएंगे.
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