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फोटो- एआई जनरेटेड
अमेरिका ने एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों के जरिए वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रणनीतिक धातुओं (Strategic Metals) के घरेलू उत्पादन को सुरक्षित करने के लिए टैरिफ को और अधिक प्रभावी बनाने की घोषणा की है. उन्होंने कुछ चीजों पर नए टैरिफ का ऐलान किया है.
इस नई घोषणा का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि टैरिफ का कैलकुलेशन धातुओं के 'पूर्ण मूल्य' (Full Value) पर किया जाए, न कि किसी कृत्रिम रूप से कम विदेशी कीमत पर. इससे विदेशी कंपनियों की तरफ से कीमतों को कम करके अमेरिकी बाजार पर कब्जा करने की कोशिशों पर लगाम लगेगी.
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राष्ट्रपति ट्रंप ने कई कैटेगरी के उत्पादों के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए हैं. नीचे दी गई टेबल से समझिए कि अब आयातित धातुओं पर कितना बोझ बढ़ेगा:
नई टैरिफ दरें (Section 232 Metals Tariffs)
| उत्पाद की श्रेणी (Category of Product) | टैरिफ दर (Tariff Rate) | उदाहरण |
| पूर्णतः धातु से बने उत्पाद | 50% | स्टील कॉइल्स, एल्युमीनियम शीट |
| धातु के डेरिवेटिव उत्पाद | 25% | स्टील या तांबे से बने महत्वपूर्ण पुर्जे |
| औद्योगिक और ग्रिड उपकरण | 15% | भारी मशीनरी (2027 तक प्रभावी) |
| अमेरिकी धातु से बने विदेशी उत्पाद | 10% | विदेशों में निर्मित लेकिन 100% अमेरिकी सामग्री |
| 15% से कम धातु वाले उत्पाद | 0% (छूट) | वह उत्पाद जिनमें धातु की मात्रा बहुत कम है |
साल 2025 में अमेरिका दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश बनकर उभरा है. राष्ट्रपति ट्रंप के सेक्शन 232 टैरिफ कार्यक्रम की बदौलत अमेरिका ने कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है. दशकों बाद अमेरिका में नए स्टील प्लांट लगाए जा रहे हैं, विशेष रूप से वेस्ट वर्जीनिया, अर्कांसस और दक्षिण कैरोलिना जैसे राज्यों में.
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स्टील क्षमता: अगले 2 सालों में 40 लाख टन से अधिक नई क्रूड स्टील निर्माण क्षमता चालू होने की उम्मीद है.
एल्युमीनियम: सेंचुरी एल्युमीनियम और एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमीनियम ने ओक्लाहोमा में दशकों बाद पहला नया एल्युमीनियम स्मेल्टर बनाने के लिए हाथ मिलाया है.
कॉपर (तांबा): रियो टिंटो, हाइलैंड कॉपर और इवानहो इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां अमेरिका में तांबे के खनन और स्मेल्टिंग सुविधाओं का विस्तार कर रही हैं.
यह घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप के उन पिछले कामों पर आधारित है जो अमेरिकी श्रमिकों और परिवारों की आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए किए गए थे.
फरवरी 2025: ट्रंप ने पिछले प्रशासन के दौरान दी गई हजारों उत्पाद-विशिष्ट छूटों को समाप्त कर दिया था.
जून 2025: स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ दरों को बढ़ाकर 50% कर दिया गया.
जुलाई 2025: तांबे (Copper) को भी पहली बार इस टैरिफ कार्यक्रम में शामिल किया गया.
इन रणनीतिक टैरिफ के माध्यम से, अमेरिकी सरकार ने न केवल अरबों डॉलर का राजस्व वापस लाया है, बल्कि विदेशी निवेश को अमेरिकी जमीन पर कारखाने लगाने के लिए मजबूर किया है.
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राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम वैश्विक व्यापारिक समीकरणों को बदल देगा. जहां एक ओर विदेशी आयात महंगा होगा, वहीं दूसरी ओर 'मेड इन अमेरिका' का सपना सच होता दिख रहा है. 2027 तक औद्योगिक आधार के निर्माण के लिए दी गई रियायतें यह सुनिश्चित करेंगी कि अमेरिका का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक और आत्मनिर्भर बने.
1. नए टैरिफ नियमों के तहत स्टील और एल्युमीनियम पर कितना टैक्स लगेगा?
पूरी तरह से इन धातुओं से बने उत्पादों पर 50% का फ्लैट टैरिफ लगाया गया है.
2. क्या सभी आयातित उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया गया है?
नहीं, जिन उत्पादों में स्टील, एल्युमीनियम या तांबे की मात्रा 15% से कम है, उन्हें इस टैरिफ से बाहर रखा गया है.
3. औद्योगिक उपकरणों पर टैरिफ कम क्यों रखा गया है?
औद्योगिक और इलेक्ट्रिकल ग्रिड उपकरणों पर 15% टैरिफ रखा गया है ताकि देश में चल रहे औद्योगिक निर्माण की गति धीमी न हो.
4. क्या तांबा (Copper) भी अब इन टैरिफ के दायरे में है?
हां, जुलाई 2025 से तांबे को भी सेक्शन 232 के तहत 50% टैरिफ की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है.
5. अमेरिकी सामग्री से विदेशों में बने उत्पादों पर क्या नियम है?
यदि उत्पाद विदेश में बना है लेकिन उसमें इस्तेमाल की गई धातु पूरी तरह अमेरिकी है, तो उस पर केवल 10% टैरिफ लगेगा.
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