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वैश्विक राजनीति की दुनिया में आज एक बड़ा धमाका हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक ऐसा पोस्ट लिखा है, जिसने यूरोप से लेकर वाशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है. उन्होंने नाटो को आड़े हाथों लिया है.
ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों की क्लास लगाते हुए उन्हें न केवल 'कागजी शेर' कहा, बल्कि उन्हें 'डरपोक' (Cowards) तक कह डाला. ट्रंप का मानना है कि अमेरिका इन देशों की सुरक्षा का ठेका लेकर बैठा है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत पड़ी, तो इन सबने अपनी आंखें फेर लीं. आइए, ट्रंप के इस गुस्से की असल वजह और इसके पीछे की पूरी कहानी को आसान शब्दों में समझते हैं.
ट्रंप ने अपने पोस्ट की शुरुआत ही बहुत भारी शब्दों से की. उन्होंने लिखा कि "अमेरिका के बिना नाटो एक कागजी शेर है!"
मतलब क्या है: ट्रंप का कहना है कि नाटो की सारी ताकत अमेरिका के पैसों और सेना से आती है. अगर अमेरिका अपना हाथ खींच ले, तो नाटो के पास किसी भी बड़ी ताकत के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है.

ट्रंप का सबसे बड़ा दुख यह है कि जब अमेरिका ने परमाणु शक्ति से लैस ईरान को रोकने के लिए सैन्य अभियान शुरू किया, तो नाटो देशों ने इसमें शामिल होने से साफ मना कर दिया.
सैन्य जीत का दावा: ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने यह लड़ाई सैन्य रूप से 'जीत' ली है, और वह भी बहुत कम जोखिम के साथ.
दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और ट्रंप के मुताबिक इसकी एकमात्र वजह 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का बंद होना या वहां तनाव होना है.
शिकायत: ट्रंप ने लिखा, "अब जब उन्हें महंगे तेल की कीमतें चुकानी पड़ रही हैं, तो वह शिकायत कर रहे हैं. लेकिन वह होर्मुज को खोलने में मदद नहीं करना चाहते."
आसान काम: ट्रंप के अनुसार, इस रास्ते को खोलना एक 'मामूली सैन्य पैंतरा' (Simple Military Maneuver) है, जिसमें जोखिम बहुत कम है, लेकिन नाटो देश इतने डरपोक हैं कि वे यह छोटा सा कदम भी नहीं उठा रहे.
ट्रंप ने अपने पोस्ट के अंत में बड़े अक्षरों में लिखा- "COWARDS, and we will REMEMBER!" (डरपोक, और हम इसे याद रखेंगे!)
चेतावनी: यह केवल एक गुस्सा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी है. इसका मतलब यह है कि अगर भविष्य में इन देशों को अमेरिका की जरूरत पड़ी, तो ट्रंप प्रशासन उनकी मदद करने से पहले इस 'धोखे' को जरूर याद करेगा.
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नया मोड़ ले आया है. नाटो को 'कागजी शेर' कहना और उसे 'डरपोक' बताना यह साबित करता है कि ट्रंप प्रशासन अब कूटनीति की मीठी भाषा छोड़कर सीधे 'धमकी और दबाव' की भाषा पर उतर आया है. पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि नाटो देश इस बेइज्जती का क्या जवाब देते हैं.
1- 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है. दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल यहीं से गुजरता है. इसे बंद करने का मतलब है- पूरी दुनिया में तेल का संकट.
2- ट्रंप नाटो से इतने नाराज क्यों हैं?
क्योंकि ट्रंप को लगता है कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत होती है, तो ये देश अपनी सेना नहीं भेजते.
3- क्या ईरान के खिलाफ लड़ाई सच में खत्म हो गई है?
ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान की सैन्य शक्ति को 'मिटा' दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी भी छिटपुट संघर्ष और तनाव जारी है.
4- 'कागजी शेर' (Paper Tiger) का क्या अर्थ है?
इसका मतलब है- कोई ऐसी चीज जो दिखने में बहुत खतरनाक और ताकतवर लगे, लेकिन हकीकत में बहुत कमजोर और शक्तिहीन हो.
5- क्या ट्रंप नाटो से बाहर निकल सकते हैं?
ट्रंप अतीत में कई बार नाटो छोड़ने की धमकी दे चुके हैं. उनके इस तरह के बयानों से 'यूएस-एग्जिट' (US-Exit) की चर्चा फिर से तेज हो गई है.
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