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अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के लिए पाकिस्तान ने तैयार किया इस्लामाबाद अकॉर्ड.
दुनिया के नक्शे पर इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बारूदी जंग अब शांत होगी. पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह की तनातनी दिख रही थी, उसने तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे दी थी. लेकिन सोमवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया है.
खबर ये है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सुलह का एक बड़ा प्लान तैयार किया है. इसे 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' कहा जा रहा है. अगर ये प्लान कामयाब रहा, तो आज यानी सोमवार से ही दोनों तरफ से हमले रुक सकते हैं और समंदर का वो रास्ता खुल सकता है जहां से पूरी दुनिया का तेल गुजरता है.
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इस्लामाबाद अकॉर्ड पाकिस्तान द्वारा तैयार किया गया एक ठोस फ्रेमवर्क है. इसे दो हिस्सों में बांटा गया है ताकि दोनों देशों को अपनी शर्तें मानने का वक्त मिले. पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच इकलौता ऐसा जरिया बना हुआ है जिससे दोनों तरफ की बातें पहुंच रही हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जो खबर छापी है, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर रविवार की पूरी रात सोए नहीं हैं. वो लगातार वाशिंगटन और तेहरान के बीच हॉटलाइन पर बने रहे.
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शांति के इस रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा पुरानी शर्तें हैं. ईरान इस बार सिर्फ जुबानी वादों पर यकीन करने को तैयार नहीं है. वो चाहता है कि उसे लिखित में गारंटी मिले कि भविष्य में अमेरिका या इजरायल उस पर कभी हमला नहीं करेंगे. वहीं, अमेरिका की अपनी कुछ ऐसी शर्तें हैं जो ईरान के लिए गले की हड्डी बनी हुई हैं.
| समझौते के प्वॉइंट्स | ईरान को क्या मिलेगा | अमेरिका को क्या मिलेगा |
| मुख्य मांग | आर्थिक पाबंदियों (Sanctions) से आजादी | ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा के लिए बंद हो |
| आर्थिक लाभ | विदेश में फंसे अरबों डॉलर के फंड्स की वापसी | तेल की सप्लाई लाइन (होर्मुज) पर सुरक्षित कब्जा |
| सुरक्षा | भविष्य में हमले न होने की पक्की गारंटी | इजरायल और खाड़ी देशों में अपने बेस की सुरक्षा |
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में जिस तरह के तेवर दिखाए हैं, उसने ईरान को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर जल्द ही समझौता नहीं हुआ तो अंजाम बहुत बुरा होगा. ट्रंप की इस डेडलाइन के बीच पाकिस्तान ने ये प्रस्ताव रखा है. हालांकि, अभी भी एक पेंच फंसा हुआ है. पाकिस्तान के सूत्रों का कहना है कि ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस पर अपनी मुहर नहीं लगाई है.
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पूरी लड़ाई का केंद्र ये संकरा समुद्री रास्ता ही है. अगर इस्लामाबाद अकॉर्ड के तहत ये रास्ता आज खुल जाता है, तो ये ट्रंप प्रशासन और पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ी सफलता होगी. ईरान इस रास्ते को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है और इसे खोलना उसके लिए समझौते की पहली सीढ़ी होगी.
सवाल उठता है कि हिंसा और आतंकवाद को पनाह देने वाला पाकिस्तान क्या वाकई इस महायुद्ध को रुकवा पाएगा? 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' कागज पर भले ही मजबूत दिख रहा है, लेकिन हकीकत में ये तभी कामयाब होगा जब ईरान और अमेरिका अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ेंगे. फिलहाल सबकी नजरें तेहरान के अगले कदम पर हैं. अगर आज युद्धविराम होता है, तो ये साल 2026 की सबसे बड़ी वैश्विक खबर होगी.