क्या सच में पाकिस्तान खत्म करा देगा अमेरिका-ईरान का युद्ध! जानिए क्या है इस्लामाबाद अकॉर्ड?

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' का प्रस्ताव दिया है. इस प्लान में सोमवार से ही युद्धविराम और होर्मुज का रास्ता खोलने की बात कही गई है. आर्मी चीफ असीम मुनीर रात भर अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व के संपर्क में रहे हैं, हालांकि ईरान की ओर से अंतिम मंजूरी का इंतजार है.
क्या सच में पाकिस्तान खत्म करा देगा अमेरिका-ईरान का युद्ध! जानिए क्या है इस्लामाबाद अकॉर्ड?

अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के लिए पाकिस्तान ने तैयार किया इस्लामाबाद अकॉर्ड.

दुनिया के नक्शे पर इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बारूदी जंग अब शांत होगी. पिछले कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह की तनातनी दिख रही थी, उसने तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे दी थी. लेकिन सोमवार की सुबह एक ऐसी खबर आई जिसने सबको चौंका दिया है.

खबर ये है कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच सुलह का एक बड़ा प्लान तैयार किया है. इसे 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' कहा जा रहा है. अगर ये प्लान कामयाब रहा, तो आज यानी सोमवार से ही दोनों तरफ से हमले रुक सकते हैं और समंदर का वो रास्ता खुल सकता है जहां से पूरी दुनिया का तेल गुजरता है.

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क्या है ये 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' और कैसे करेगा काम?

इस्लामाबाद अकॉर्ड पाकिस्तान द्वारा तैयार किया गया एक ठोस फ्रेमवर्क है. इसे दो हिस्सों में बांटा गया है ताकि दोनों देशों को अपनी शर्तें मानने का वक्त मिले. पाकिस्तान इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच इकलौता ऐसा जरिया बना हुआ है जिससे दोनों तरफ की बातें पहुंच रही हैं.

इस समझौते की बड़ी बातें-

  • फर्स्ट टियर (तत्काल प्रभाव): सोमवार से ही युद्धविराम लागू करना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलना.
  • सेकंड टियर (लॉन्ग टर्म): अगले 15 से 20 दिनों के भीतर एक व्यापक और स्थाई समझौता तैयार करना जिससे भविष्य में युद्ध की नौबत न आए.
  • डिजिटल सिग्नेचर: ये पूरी डील इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तौर पर फाइनल की जा रही है.

रात भर चली फोन पर 'जंग'

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से जो खबर छापी है, वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ, फील्ड मार्शल असीम मुनीर रविवार की पूरी रात सोए नहीं हैं. वो लगातार वाशिंगटन और तेहरान के बीच हॉटलाइन पर बने रहे.

पर्दे के पीछे की बड़ी बातें-

  • अमेरिका से संवाद: असीम मुनीर ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ लंबी चर्चा की.
  • ईरान से बात: दूसरी तरफ वो ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची के सीधे संपर्क में रहे ताकि तेहरान को भरोसे में लिया जा सके.
  • 45 दिन की मोहलत: खबरों की मानें तो अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ एक 45 दिनों के अस्थाई युद्धविराम पर चर्चा कर रहे हैं, जो बाद में स्थाई शांति में बदल सकता है.

ईरान की शर्तें और अमेरिका का परमाणु दांव

शांति के इस रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा पुरानी शर्तें हैं. ईरान इस बार सिर्फ जुबानी वादों पर यकीन करने को तैयार नहीं है. वो चाहता है कि उसे लिखित में गारंटी मिले कि भविष्य में अमेरिका या इजरायल उस पर कभी हमला नहीं करेंगे. वहीं, अमेरिका की अपनी कुछ ऐसी शर्तें हैं जो ईरान के लिए गले की हड्डी बनी हुई हैं.

समझौते के प्वॉइंट्सईरान को क्या मिलेगाअमेरिका को क्या मिलेगा
मुख्य मांगआर्थिक पाबंदियों (Sanctions) से आजादीईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा के लिए बंद हो
आर्थिक लाभविदेश में फंसे अरबों डॉलर के फंड्स की वापसीतेल की सप्लाई लाइन (होर्मुज) पर सुरक्षित कब्जा
सुरक्षाभविष्य में हमले न होने की पक्की गारंटीइजरायल और खाड़ी देशों में अपने बेस की सुरक्षा

कहां फंस रही है डील?

  • न्यूक्लियर कमिटमेंट: ईरान को वादा करना होगा कि वो परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं करेगा.
  • चीन का साथ: इस पूरे शांति प्रस्ताव को चीन और अमेरिका दोनों का बैकअप हासिल है, जो पाकिस्तान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है.

ट्रंप का प्रेशर और ईरान की रहस्यमयी खामोशी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में जिस तरह के तेवर दिखाए हैं, उसने ईरान को सोचने पर मजबूर कर दिया है. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर जल्द ही समझौता नहीं हुआ तो अंजाम बहुत बुरा होगा. ट्रंप की इस डेडलाइन के बीच पाकिस्तान ने ये प्रस्ताव रखा है. हालांकि, अभी भी एक पेंच फंसा हुआ है. पाकिस्तान के सूत्रों का कहना है कि ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इस पर अपनी मुहर नहीं लगाई है.

मौजूदा रुकावटें-

  • ईरान का रुख: तेहरान अभी भी सोच-विचार कर रहा है और उसने अब तक कोई कमिटमेंट नहीं दिया है.
  • पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय: पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने फिलहाल इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया है.
  • तेल बाजार का डर: जब तक होर्मुज का रास्ता खुल नहीं जाता, तब तक दुनिया भर के बाजारों में तेल की कीमतों को लेकर डर बना रहेगा.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी दुनिया भर की नजरें

पूरी लड़ाई का केंद्र ये संकरा समुद्री रास्ता ही है. अगर इस्लामाबाद अकॉर्ड के तहत ये रास्ता आज खुल जाता है, तो ये ट्रंप प्रशासन और पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ी सफलता होगी. ईरान इस रास्ते को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानता है और इसे खोलना उसके लिए समझौते की पहली सीढ़ी होगी.

प्वॉइंट्स में समझिए रास्ते की अहमियत

  • ग्लोबल इकोनॉमी: दुनिया का करीब 20-30% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है.
  • शांति का संकेत: इस रास्ते से जहाजों का गुजरना ही ये बताएगा कि युद्ध वाकई थम गया है.
  • अंतिम बैठक: अगर सब कुछ सही रहा, तो इस समझौते की आखिरी और इन-पर्सन मीटिंग इस्लामाबाद में ही आयोजित की जाएगी.

क्या सच में ऐसा हो पाएगा?

सवाल उठता है कि हिंसा और आतंकवाद को पनाह देने वाला पाकिस्तान क्या वाकई इस महायुद्ध को रुकवा पाएगा? 'इस्लामाबाद अकॉर्ड' कागज पर भले ही मजबूत दिख रहा है, लेकिन हकीकत में ये तभी कामयाब होगा जब ईरान और अमेरिका अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ेंगे. फिलहाल सबकी नजरें तेहरान के अगले कदम पर हैं. अगर आज युद्धविराम होता है, तो ये साल 2026 की सबसे बड़ी वैश्विक खबर होगी.