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Iran-US तनाव के बीच पाकिस्तान में महंगाई 74 हफ्ते के हाई पर.
Middle East में बढ़ते तनाव, खासतौर पर Iran और US के बीच टकराव, का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. The Express Tribune की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेजी ने पाकिस्तान में महंगाई को फिर से बेकाबू कर दिया है. देश में कीमतों का दबाव इस हद तक बढ़ गया है कि महंगाई दो अंकों में पहुंच गई है और आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान का Sensitive Price Indicator (SPI) सालाना आधार पर 12.15% तक पहुंच गया है. यह पिछले 74 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है. यह आंकड़ा दिखाता है कि कीमतों में बढ़ोतरी कितनी तेज हो चुकी है. एनालिस्ट्स का मानना है कि यह उछाल अचानक नहीं आया, बल्कि Middle East में जारी तनाव के चलते ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता का सीधा नतीजा है.
दिलचस्प बात यह है कि 2025 के आखिर में पाकिस्तान को महंगाई से कुछ राहत मिली थी. जनवरी 2026 की शुरुआत में SPI महंगाई घटकर करीब 2.4% तक आ गई थी. यह गिरावट मुख्य रूप से अनुकूल बेस इफेक्ट के कारण थी. लेकिन यह राहत ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई और हालात तेजी से बदल गए.
रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2026 में महंगाई 4-5% के स्तर पर थी, लेकिन इसके बाद इसमें अचानक तेज उछाल देखने को मिला. Middle East में बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने इस स्थिति को और खराब कर दिया. कुछ ही समय में महंगाई दो अंकों में पहुंच गई.
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महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई तेजी है. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ीं, उसका असर पाकिस्तान के घरेलू बाजार पर भी पड़ा. रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में डीजल की कीमत 101.02% तक बढ़ गई है. वहीं पेट्रोल 48.70% और LPG 65.86% तक महंगा हो गया है. ईंधन की इन बढ़ती कीमतों ने पूरे सिस्टम पर असर डाला है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत सीधे इससे जुड़ी होती है.
जब ईंधन महंगा होता है, तो सामान ढोने की लागत भी बढ़ जाती है. यही पाकिस्तान में देखने को मिला. डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ा और इसका असर जरूरी सामान की कीमतों पर पड़ा. इससे रोजमर्रा की चीजें आम लोगों के लिए महंगी हो गई हैं.
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ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ा है. रिपोर्ट के मुताबिक प्याज की कीमत सालाना आधार पर 57.80% बढ़ गई है. गेहूं का आटा 30.10% महंगा हुआ है, जबकि टमाटर 23.07% तक महंगा हो गया है. यह बढ़ोतरी आम घरों के बजट पर सीधा असर डाल रही है और लोगों के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है.
सिर्फ सब्जियां ही नहीं, बल्कि प्रोटीन के स्रोत भी महंगे हो गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार मटन की कीमत करीब 15% तक बढ़ गई है. इससे खाने-पीने का खर्च और बढ़ गया है, जिससे लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है.
महंगाई का असर सिर्फ सालाना आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि हफ्ते-दर-हफ्ते भी कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक एक हफ्ते में ही डीजल की कीमत 54.71% बढ़ गई, जबकि पेट्रोल 17.86% महंगा हुआ है. इस तेजी ने तुरंत असर दिखाया और टमाटर, आलू और प्याज जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों के दाम भी तेजी से बढ़ गए.
पूरी स्थिति यह दिखाती है कि Middle East में जारी तनाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर सीधे तौर पर पड़ रहा है. ऊर्जा कीमतों में उछाल ने महंगाई को फिर से बेकाबू कर दिया है.
ईंधन से लेकर खाने-पीने तक हर चीज महंगी हो रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर सीधा असर पड़ रहा है. आने वाले समय में अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहते हैं, तो पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
1. पाकिस्तान में महंगाई कितनी पहुंच गई है?
SPI के अनुसार महंगाई 12.15% पर पहुंच गई है.
2. यह कितने समय का हाई है?
यह 74 हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है.
3. महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
ऊर्जा कीमतों में उछाल और Middle East तनाव मुख्य कारण हैं.
4. किन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े हैं?
डीजल, पेट्रोल, LPG, प्याज, आटा और टमाटर के दाम तेजी से बढ़े हैं.
5. क्या साप्ताहिक स्तर पर भी असर दिखा है?
हां, एक हफ्ते में डीजल 54.71% और पेट्रोल 17.86% तक महंगा हुआ है.