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पहलगाम हमले की बरसी से ठीक एक दिन पहले खुल गई पाकिस्तान की पोल!
पिछले साल 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ था, उसने पूरी इंसानियत को शर्मसार कर दिया था. इस दुखद मौके की बरसी पर जहां पूरा देश शहीदों और आम नागरिकों को याद कर रहा है, वहीं बलूचिस्तान के मशहूर पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता बिलाल बलोच ने पाकिस्तान की पूरी पोल खोल दी है. बिलाल ने सीधे तौर पर कहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को पालने-पोसने का काम कर रहा है और अब वक्त आ गया है कि दुनिया उससे कड़े सवाल पूछे.
पहलगाम हमले की बरसी पर बिलाल बलोच काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा, "मैं खुद एक बलोच हूं और मैंने देखा है कि पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना कैसे अपनों पर ही जुल्म करती है. इसलिए मैं पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले 26 निर्दोष लोगों के परिवारों का दुख अच्छी तरह समझ सकता हूं. वह हमला सिर्फ कश्मीर पर नहीं, बल्कि इंसानियत पर हमला था."
बिलाल ने अपनी बात बेबाकी से रखते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में पाकिस्तान का नाम डर और आतंकवाद से जुड़ गया है. उन्होंने कहा, पाकिस्तान केवल भारत ही नहीं, बल्कि अपने सभी पड़ोसियों के लिए मुसीबत बना हुआ है. दुनिया भर में जहां कहीं भी आतंकी तार जुड़ते हैं, उनका कोई न कोई कनेक्शन पाकिस्तान से निकल ही आता है. बलूचिस्तान में भी वहां की सरकार मासूम लोगों की आवाज दबा रही है और मानवाधिकारों का कत्ल कर रही है.
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि यह दुख की बात है कि बड़ी ताकतें और अंतरराष्ट्रीय संगठन अक्सर इन हरकतों पर चुप रह जाते हैं. लेकिन उन्हें यकीन है कि इतिहास गवाह है, जुल्म करने वालों का हिसाब एक न एक दिन जरूर होता है.
बिलाल बलोच ने भारत सरकार को सुझाव दिया कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती से लड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को उन परिवारों को दुनिया के सामने लाना चाहिए जिन्होंने इन हमलों में अपनों को खोया है.
बिलाल के मुताबिक, "जब एक मां या एक बच्चा अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़े होकर अपना दर्द सुनाएगा, तो दुनिया को समझ आएगा कि पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवाद ने कितनी जिंदगियां बर्बाद की हैं. कागजी सबूतों से ज्यादा इन परिवारों के आंसू दुनिया की आंखें खोलने का काम करेंगे."
आपको याद दिला दें कि एक साल पहले 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम के शांतिपूर्ण इलाके में अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे. इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और कश्मीर में पर्यटन को भी गहरी चोट पहुंचाई थी.
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आज इस बरसी के मौके पर बिलाल बलूच का यह बयान पाकिस्तान की घेराबंदी करने के लिए एक बड़ी आवाज बनकर उभरा है. अब देखना यह है कि बिलाल की इस अपील पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्या रुख अपनाता है और क्या पीड़ितों को कभी न्याय मिल पाएगा.