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किम जोंग उन ने दाग दी 10 बैलेस्टिक मिसाइलें! (Image Source- AI)
दुनिया इस वक्त पहले ही बड़े तनाव के दौर से गुजर रही है. एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनातनी की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करके सबको चौंका दिया है. शनिवार का दिन था, जब अचानक उत्तर कोरिया की तरफ से एक के बाद एक 10 से ज्यादा बैलेस्टिक मिसाइलें आसमान चीरते हुए समुद्र की ओर जा गिरीं. इस घटना ने पूरे एशियाई क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है और दक्षिण कोरिया की सेना तुरंत एक्शन मोड में आ गई है.
यह कोई छोटी-मोटी हलचल नहीं है. जब दुनिया की नजरें बड़े संघर्षों पर टिकी हैं, तब किम जोंग उन का इस तरह मिसाइलें दागना एक बड़े संकेत की तरह देखा जा रहा है. दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने इस पूरी घटना की पुष्टि की है और बताया है कि इन मिसाइलों को कहां से और किस मकसद से छोड़ा गया होगा. चलिए समझते हैं कि शनिवार दोपहर को आखिर हुआ क्या था और क्यों दक्षिण कोरिया की सांसें अटकी हुई हैं.
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने जो जानकारी साझा की है, उसके मुताबिक ये मिसाइलें उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के पास स्थित सुनन इलाके से छोड़ी गई थीं. आपको बता दें कि यह वही इलाका है जहां प्योंगयांग का अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट भी मौजूद है. दोपहर के करीब 1 बजकर 20 मिनट का समय था, जब रडार पर एक साथ कई संदिग्ध चीजें दिखाई देने लगीं.
ये मिसाइलें करीब 350 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद पूर्वी सागर में जा गिरीं. जानकारों का कहना है कि ये मिसाइलें करीब 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक गईं. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलें दागना यह बताता है कि उत्तर कोरिया अपनी हमला करने की क्षमता को परख रहा था. जैसे ही ये मिसाइलें दागी गईं, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति भवन यानी ब्लू हाउस ने तुरंत बयान जारी कर उत्तर कोरिया को ऐसी हरकतों से बाज आने की नसीहत दे डाली.
आखिर उत्तर कोरिया ने शनिवार का ही दिन क्यों चुना? इसकी एक बड़ी वजह है. दरअसल, इन दिनों दक्षिण कोरिया और अमेरिका की सेनाएं मिलकर एक बड़ा सैन्य अभ्यास कर रही हैं. शनिवार को ही सैकड़ों अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सैनिक टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ नदी पार करने का अभ्यास कर रहे थे. उत्तर कोरिया हमेशा से इन अभ्यासों को खुद पर हमले की तैयारी मानता रहा है.
किम जोंग उन की सरकार इन सैन्य अभ्यासों को 'ड्रेस रिहर्सल' कहती है. उनका मानना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर उन पर कब्जे की साजिश रच रहे हैं. हालांकि, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का साफ कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसका मकसद केवल किसी भी खतरे से निपटने की तैयारी को पुख्ता करना है. फिलहाल अमेरिका के करीब 28,500 सैनिक और फाइटर जेट्स दक्षिण कोरिया में तैनात हैं, जो किम जोंग उन की आंखों में खटकते रहते हैं.
उत्तर कोरिया की इस हरकत का असर सिर्फ दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा. जापान के कोस्ट गार्ड ने भी समुद्र में कुछ संदिग्ध चीजें गिरने की पुष्टि की है. जापान की सेना और वहां के सरकारी ब्रॉडकास्टर एनएचके के मुताबिक, ये मिसाइलें जापान के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन के बाहर गिरी हैं. फिर भी जापान ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया है और कड़ी निगरानी शुरू कर दी है.
जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया अब तीनों मिलकर इस स्थिति पर नजर रख रहे हैं. दक्षिण कोरियाई सेना ने कहा है कि उन्होंने अपनी निगरानी बढ़ा दी है और वे किसी भी अन्य लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार हैं. पिछले दो दशकों से उत्तर कोरिया लगातार अपनी परमाणु और मिसाइल शक्ति को बढ़ाने में लगा है, भले ही उस पर संयुक्त राष्ट्र के कई कड़े प्रतिबंध लगे हों.
साल 2006 से ही उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रतिबंध लगे हुए हैं. इन प्रतिबंधों का मकसद उसकी अर्थव्यवस्था और रक्षा व्यापार को रोकना था ताकि वह परमाणु हथियार न बना सके. लेकिन शनिवार की घटना ने साफ कर दिया है कि किम जोंग उन इन प्रतिबंधों की परवाह नहीं करते. वे लगातार अपनी बैलेस्टिक और क्रूज मिसाइलों का परीक्षण कर रहे हैं ताकि परमाणु हथियारों को ले जाने का जरिया तैयार कर सकें.
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्योंगयांग के साथ बातचीत की कोशिशें फिर से शुरू करने के संकेत दिए थे, लेकिन दूसरी तरफ उत्तर कोरिया ने मिसाइलों की बरसात कर दी. यह दिखाता है कि बातचीत की मेज पर आने से पहले किम जोंग उन अपनी ताकत का अहसास कराना चाहते हैं ताकि वे अपनी शर्तों पर सौदा कर सकें.
अब सवाल यह है कि दक्षिण कोरिया आगे क्या करेगा? फिलहाल दक्षिण कोरिया की सेना हाई अलर्ट पर है. उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अमेरिका के साथ मिलकर हर पल की खबर रख रहे हैं. सैन्य अभ्यास भी जारी रहेगा क्योंकि उनका मानना है कि उत्तर कोरिया को रोकने का यही एक तरीका है. किम जोंग उन की इस मिसाइल टेस्टिंग ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर झटका दिया है.
आने वाले कुछ दिन बहुत अहम होने वाले हैं. अगर उत्तर कोरिया की तरफ से और भी मिसाइलें दागी जाती हैं, तो स्थिति बिगड़ सकती है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह सिर्फ एक शक्ति प्रदर्शन था या फिर किसी बड़े संघर्ष की शुरुआत. दक्षिण कोरिया की सेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार बैठी है.