हॉर्मुज संकट, अमेरिका की ढील, ईरान युद्ध ने बदली रूस की तकदीर, रोजाना क्रूड-LNG से $58.8 करोड़ की बंपर कमाई

मिडिल ईस्ट में चल रहे भयंकर युद्ध ने रूस को मुनाफा कमाने का नया मौका दे दिया. युद्ध के बाद प्रतिबंधों में मिली ढील से रूस को तेल से अब 10 अरब डॉलर का मुनाफा होगा.
हॉर्मुज संकट, अमेरिका की ढील, ईरान युद्ध ने बदली रूस की तकदीर, रोजाना क्रूड-LNG से $58.8 करोड़ की बंपर कमाई

Vladmir Putin

मिडिल ईस्ट में चल रहे भीषण युद्ध के बीच अमेरिका ने दुनिया के सभी देशों को समुद्र में फंसे रुसी तेल खरीदने की 1 महीने की अस्थाई मंजूरी दे दी है. इस वैश्विक संकट के बीच रूस की अप्रत्याक्षित तौर से लॉटरी लग गई है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल पर यूरोपियन यूनियन ने प्रतिबंध लगा दिया था. न्यूज एजेंसी APTN के मुताबिक भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने मास्को को अपने एनर्जी एक्सपोर्ट से मुनाफा कमाने का मौका दे दिया है. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिका द्वारा प्रतिबंध में ढील देने से रूस को 10 अरब डॉलर का मुनाफा होगा, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन युद्ध में हथियारों के भुगतान पर करेगा.

80 डॉलर प्रति बैरल पर आया रूसी तेल

यूक्रेन युद्ध के कारण दिसंबर में रूस का यूराल्ड क्रूड 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया था, जिससे उसकी कमाई सबसे निचले स्तर पर आ गई थी. ईरान युद्ध के कारण सप्लाई की कमी से रूसी तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बिक रहा है.

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14 फीसदी ज्यादा हुई कमाई

  • APTN से बातचीत में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताजा आंकड़ों ने दुनिया को चौंका दिया है.
  • युद्ध के कारण रूस की रोजाना तेल से होने वाली कमाई फरवरी के मुकाबले औसतन 14 फीसदी ज्यादा हो गई है.
  • CREA के आइजैक लेवी ने APTN को बताया कि रूस इस महीने तेल और LNG के निर्यात से हर दिन 51 करोड़ यूरो (58.8 करोड़ डॉलर) की कमाई कर रहा है.
  • रूस को मिल रही इस नकदी से सीधे तौर पर उसकी अर्थव्यवस्था को भारी मजबूत मिल रही है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस वक्त लगभग 12.5 करोड़ (125 मिलियन) बैरल रूसी तेल शिप किया जा रहा है.
  • यह मात्रा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाले पांच या छह दिन के नॉर्मल शिपमेंट के बराबर है. अगर पूरी दुनिया की तेल खपत (10.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन) के हिसाब से देखें, तो यह महज दुनिया की एक दिन की जरूरत से थोड़ा ही ज्यादा है.

20% तेल सप्लाई पड़ी ठप

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से दुनिया की 20 फीसदी तेल सप्लाई ठप पड़ गई है, इसके कारण इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ गया है.

103.24 प्रति बैरल तर पहुंचा ब्रेंट क्रूड

  • ब्रेंट क्रूड, जो युद्ध से पहले 72.87 डॉलर के स्तर पर था, अब 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर 103.24 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
  • ब्रेसल्स स्थित ब्रूगेल थिंक टैंक के एनर्जी एक्सपर्ट सिमोन टैग्लियापिएट्रा ने कहा, "कम वक्त के लिए ही सही, लेकिन अमेरिका के इस कदम से ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई थोड़ी बढ़ जाएगी."
  • एनर्जी एक्सपर्ट के मुताबिक "तेल की कीमतों में आई मौजूदा तेजी को रोकने में मदद मिलेगी. इसलिए, कीमतों पर इसका असर थोड़ा नरमी वाला या कम से कम उन्हें स्थिर रखने वाला होना चाहिए."
  • 2022 में रूस-यूक्रेन के बाद यूरोपियन यूनियन ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है. इसके बाद रूस का तेल चीन और भारत की तरफ जाने लगा, जहां इसे भारी डिस्काउंट पर बेचा गया.
  • रूस को यह छूट अमेरिका, यूरोपियन यूनियन और यूक्रेन के सहयोगियों द्वारा रूसी तेल पर लगाए गए प्राइस कैप के कारण देनी पड़ी थी. इस प्राइस कैप को शिपिंग और इंश्योरेंस कंपनियों के जरिए लागू किया गया था.

प्राइस कैप का रूस ने ऐसे निकाला तोड़

रूस ने वक्त के साथ प्राइस कैप से बचने का रास्ता निकलाने में कामयाब रहा है. रूस ने पुराने टैंकरों का एक ऐसा बेड़ा तैयार किया, जिनके मालिकों की पहचान छिपी हुई थी और इन जहाजों का बीमा उन देशों से कराया गया जो इस प्राइस कैप के नियम को नहीं मानते थे.

तेल से घटी कमाई

  • लुकोइल और रोसनेफ्ट जैसी तेल कंपनियों पर बैन लगानने के साथ-साथ, यूक्रेन के सहयोगियों ने रूस के इस शैडो फ्लीट पर कार्रवाई की थी. इसके बाद भारत-चीन ने ज्यादा डिस्काउंट की मांग की थी.
  • दिसंबर में रूस का यूराल्स क्रूड 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बिका, जो ब्रेंट क्रूड की तुलना में करीब 25 डॉलर सस्ता था. इससे क्रेमलिन की तेल से होने वाली कमाई यूक्रेन पर हमले के बाद से निचले स्तर पर आ गई थी.
  • रूस के फेडरल बजट का 20 से 30 फीसदी हिस्सा आमतौर पर तेल और गैस के निर्यात से ही आता है.

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