मिडिल ईस्ट में जंग के बीच रूस ने पेट्रोल पर लिया बड़ा फैसला, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर?

रूस का यह कदम और दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ता तनाव, ग्लोबल एनर्जी मार्केट को एक नई अनिश्चितता की ओर धकेल रहा है.
मिडिल ईस्ट में जंग के बीच रूस ने पेट्रोल पर लिया बड़ा फैसला, जानें भारत पर क्या पड़ेगा असर?

1 अप्रैल से रूस किसी भी देश को नहीं बेचेगा पेट्रोल.  (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच रूस ने बड़ा कदम उठाया है. रूस ने 1 अप्रैल से गैसोलीन (Petrol) के एक्सपोर्ट पर बैन लगाने का ऐलान किया है. यह प्रतिबंध 31 जुलाई तक लागू रहेगा. इसका मकसद घरेलू फ्यूल कीमतों को स्थिर रखना बताया गया है.

रूस का यह कदम और दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव, ग्लोबल एनर्जी मार्केट को एक नई अनिश्चितता की ओर धकेल रहा है.

रूस ने यह फैसला क्यों लिया?

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  • रूसी सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के कारण रूसी तेल की मांग बढ़ी है.
  • ऐसे में घरेलू बाजार में कमी न हो और कीमतें न बढ़ें, इसलिए एक्सपोर्ट रोकना जरूरी है.
  • ऊर्जा मंत्री ने पुष्टि की है कि रूस का ऑयल रिफाइनिंग वॉल्यूम मार्च 2025 के स्तर पर स्थिर है.
  • कंपनियों के पास पर्याप्त गैसोलीन और डीजल रिजर्व मौजूद है.
  • इसे अब केवल घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाएगा.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार रूस के डिप्टी पीएम नोवाक ने यह फैसला समीक्षा बैठक के बाद लिया गया, जिसमें ऊर्जा मंत्री और इंडस्ट्री के प्रतिनिधि शामिल थे. रूस पहले अपने देश की जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है.

ग्लोबल मार्केट में पहले से दबाव क्यों है?

  • होर्मुज स्ट्रेट से आम तौर पर 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है.
  • हालांकि, ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के संघर्ष की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग में काफी परेशानी आ रही है.
  • हालात को देखते हुए होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग कॉस्ट भी बढ़ा दी गई है.
  • इसका असर वैश्विक स्तर पर दिख रहा है.
  • ग्लोबल ऑयल की कीमतें बढ़ गई हैं.

ऐसे में रूस का एक्सपोर्ट बैन आग में घी डालने जैसा हो सकता है.

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अब क्या बदलेगा?

  • ग्लोबल सप्लाई घटेगी
  • पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं

खासकर उन देशों पर असर ज्यादा होगा जो इंपोर्ट पर निर्भर हैं.

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

  • भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता है.
  • हालांकि भारत मुख्य रूप से कच्चा तेल खरीदता है.
  • लेकिन वैश्विक स्तर पर रिफाइंड प्रोडक्टकी कमी अप्रत्यक्ष रूप से कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

भारत सरकार का बड़ा फैसला

सरकार ने घरेलू ग्राहकों को राहत देने और कंपनियों के मुनाफे को संतुलित करने के लिए ये कदम उठाए हैं-

  • सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम कर दी है.
  • अब पेट्रोल पर यह मात्र ₹3 प्रति लीटर और डीजल पर शून्य कर दी गई है.

कंक्लूजन

रूस का पेट्रोल एक्सपोर्ट बैन ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पहले ही तनाव में है. अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर सीधे ग्लोबल तेल कीमतों और आम लोगों की जेब पर दिख सकता है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. रूस ने क्या फैसला लिया है?
रूस ने 1 अप्रैल से पेट्रोल एक्सपोर्ट पर बैन लगाया है.

Q2. बैन कब तक रहेगा?
31 जुलाई 2026 तक.

Q3. यह कदम क्यों उठाया गया?
घरेलू फ्यूल कीमतों को स्थिर रखने के लिए.

Q4. भारत पर क्या असर होगा?
सीधा असर कम, लेकिन ग्लोबल कीमतें बढ़ने से अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा.

Q5. ग्लोबल मार्केट क्यों प्रभावित है?
Strait of Hormuz में तनाव और सप्लाई बाधित होने से.

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