‘महायुद्ध’ की आहट! 3 दिन बाद अमेरिका-साउथ कोरिया का युद्ध अभ्यास: किम जोंग उन ने उतारा 5000 टन का न्यूक्लियर डिस्ट्रॉयर

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच 9 मार्च से शुरू होने वाले 'फ्रीडम शील्ड' सैन्य अभ्यास से पहले उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है. किम ने 5,000 टन वजनी 'चो ह्यों' डिस्ट्रॉयर और रणनीतिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण कर अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है.
‘महायुद्ध’ की आहट! 3 दिन बाद अमेरिका-साउथ कोरिया का युद्ध अभ्यास: किम जोंग उन ने उतारा 5000 टन का न्यूक्लियर डिस्ट्रॉयर

किम जोंग उन ने 5,000 टन के डिस्ट्रॉयर ‘चो ह्यों’ का दो दिन निरीक्षण किया. (प्रतीकात्मक फोटो:AI)

मिडिल-ईस्ट में युद्ध की स्थिति के बाद अब कोरियाई प्रायद्वीप पर भी एक बार फिर तनाव का पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है. 9 मार्च का जहां, अमेरिका दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास करने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के नए विध्वंसक ने पूरे क्षेत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया है.

माना जा रहा है कि किम जोंग उन का यह कदम महज एक रुटीन ट्रायल नहीं, बल्कि ईरान पर हुए हालिया अमेरिकी हमलों का एक सीधा और आक्रामक जवाब माना जा रहा है. प्योंगयांग के सत्ता के गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि सुरक्षा का एकमात्र तरीका अपनी परमाणु मारक क्षमता को बढ़ाना है. किम ने साफ कर दिया है कि उनकी नौसेना पानी के नीचे से लेकर आसमान तक प्रहार करने के लिए तैयार हो रही है. जैसे-जैसे 9 मार्च की तारीख नजदीक आ रही है, दुनिया यह देखने के लिए बेताब है कि अमेरिका की इस एंट्री पर किम का अगला बड़ा कदम क्या होगा.

क्या 5,000 टन का डिस्ट्रॉयर उत्तर कोरिया की नई समुद्री ताकत है?

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  • किम जोंग उन ने 5,000 टन के डिस्ट्रॉयर ‘चो ह्यों’ का दो दिन निरीक्षण किया.
  • इसे समुद्री रक्षा क्षमता का नया प्रतीक बताया गया.
  • जहाज ने अपनी पहली समुद्री ट्रायल पूरी कर ली है.
  • अब इसे परमाणु हथियारों से लैस करने की तैयारी चल रही है.
  • किम का दावा, नौसेना पानी के ऊपर और नीचे से हमला करने की क्षमता बढ़ा रही है.

9 मार्च से शुरू होने वाले 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास की क्या है रणनीति?

  • अमेरिका-दक्षिण कोरिया 9 से 19 मार्च तक संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे.
  • इसे रक्षात्मक अभ्यास बताया गया है.
  • उत्तर कोरिया इसे हमले की रिहर्सल मानकर विरोध कर रहा है.
  • उद्देश्य युद्धकालीन ऑपरेशनल कंट्रोल ट्रांसफर की प्रक्रिया मजबूत करना है.
  • लक्ष्य 2030 तक सैन्य कमान दक्षिण कोरिया को सौंपना है.

क्या ईरान-अमेरिका संघर्ष से बदल गया है किम जोंग उन का रवैया?

  • एक्सपर्ट्स के अनुसार ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तेवर बदले हैं.
  • प्योंगयांग परमाणु नीति और सख्त कर रहा है.
  • किम ने चेतावनी दी, रक्षा शक्ति पर शक करने वाला दुश्मन होगा.
  • सेना को नौसैनिक परमाणु प्लेटफॉर्म से मजबूत किया जा रहा है.
  • प्योंगयांग के मुताबिक नौसेना का परमाणुकरण सुरक्षा की कुंजी है.

उत्तर कोरिया की आगामी योजनाएं और चुनौतियां क्या हैं?

  • प्योंगयांग में वर्कर्स पार्टी की नौवीं कांग्रेस चल रही है.
  • समापन पर बड़ी सैन्य परेड की संभावना.
  • दक्षिण कोरिया ने फील्ड ट्रेनिंग घटाने का प्रस्ताव दिया था.
  • अमेरिका ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया.
  • राष्ट्रपति ली की सुलह की कोशिशें भी असफल रहीं.

नौसैनिक और सैन्य अभ्यासों के आंकड़ों का गणित क्या है?

  • उत्तर कोरिया नौसैनिक परमाणु क्षमता पर लगातार निवेश कर रहा है.
  • 5,000 टन डिस्ट्रॉयर तकनीकी आत्मविश्वास दिखाता है.
  • संयुक्त अभ्यास में परमाणु डिटरेंस परिदृश्य शामिल हैं.

क्या पूरी दुनिया पर पड़ेगा असर?

कुल मिलाकर, कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर सैन्य तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है. एक तरफ अमेरिका और दक्षिण कोरिया का ‘फ्रीडम शील्ड’ संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू होने जा रहा है, तो दूसरी ओर उत्तर कोरिया अपनी नौसैनिक और परमाणु क्षमता को खुलकर प्रदर्शित कर रहा है.

5,000 टन के डिस्ट्रॉयर ‘चो ह्यों’ का परीक्षण यह साफ संकेत देता है कि प्योंगयांग अब समुद्र के रास्ते भी अपनी परमाणु ताकत को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है. ऐसे माहौल में आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीति दोनों पर इस टकराव का असर पड़ सकता है, और दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगे हालात किस दिशा में जाते हैं.

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