न जॉब ऑफर लेटर की चिंता, न भारी फीस का झंझट, अमेरिका के H-1B वीजा को टक्कर देने चीन ने उतारा K-1 वीजा

H-1B Visa Vs K-1 Visa: अमेरिकी सरकारी ने एच-1बी वीजा के नियमों को कड़ा दिया है. इसके बाद चीन का के-1 वीज चर्चा में है. जानिए क्या है के-1 वीजा. कैसे एच-1 बी को दे रहा है टक्कर.
न जॉब ऑफर लेटर की चिंता, न भारी फीस का झंझट, अमेरिका के H-1B वीजा को टक्कर देने चीन ने उतारा K-1 वीजा

H-1B Visa Vs K-1 Visa: अमेरिकी सरकार ने एच-1बी वीजा में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने का ऐलान किया. इसके बाद से चीन का 'के वीजा' काफी चर्चा में आया. अमेरिका की ओर से एच-1बी वीजा के नियमों में बदलाव के ऐलान के बाद से दुनिया के कई देशों ने युवा प्रतिभाओं के लिए अपना दरवाजा खोला है. इन देशों में चीन का नाम सबसे आगे है. चीन ने प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर देने के लिए 'के-वीजा' लॉन्च किया. एच-1बी वीजा की फीस बढ़ाने के बाद चीन का के-वीजा सुर्खियों में आ गया है.

K-1 वीजा पर मिलेंगी ये रियायतें

युवाओं को आकर्षित करने के लिए चीन 'के-वीजा' में और भी रियायत दे रहा है. ऐसे में सबसे पहले के वीजा के नियम और फायदों के बारे में जानना जरूरी है.

1 अक्टूबर को किया गया लॉन्च

  • चीन ने के-वीजा को लॉन्च करने का ऐलान 7 अगस्त को ही कर दिया था. 1 अक्टूबर को इसे लॉन्च किया गया, जिसके बाद से यह सुर्खियों में आने लगा.
  • हर देश में वीजा की अलग-अलग कैटेगरी होती है, जैसे कि एजुकेशन, ट्रैवल, नौकरी समेत अन्य. इनमें से ही एक है चीन का 'के-वीजा'.

STEM स्टूडेंट्स को मिलेगा फायदा

  • इस वीजा के तहत चीन एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) की पढ़ाई कर रहे हैं या फिर इस क्षेत्र से जुड़े हैं, तो चीन इस वीजा के जरिए नई प्रतिभाओं को अवसर दे रहा है.

H-1B वीजा होल्डर्स आधे से ज्यादा भारतीय

अमेरिका के एच-1बी वीजा का इस्तेमाल करने वाले आधे से ज्यादा लोग भारतीय हैं. इसलिए जब इस वीजा की फीस बढ़ाई गई, तो इसका सीधा असर उन भारतीयों पर होने वाला है.

अमेरिकी कंपनी का ऑफर लेटर जरूरी

  • आपको एच-1बी वीजा तभी मिल सकता है, जब आपके पास किसी अमेरिकी कंपनी का ऑफर लेटर हो. वहीं, के-वीजा के लिए आपके पास पहले से चीनी कंपनी का ऑफर लेटर होना जरूरी नहीं है.
  • 1 अक्टूबर को के-वीजा लॉन्च होने के बाद से सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। चीनी युवाओं में के वीजा को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है.
  • चीनी युवाओं का कहना है कि अपने देश में युवा मास्टर डिग्री लेकर बैठे हैं, लेकिन उन्हें जॉब नहीं मिल रहा है और आप दूसरे देशों से लोगों को बुलाकर रोजगार देंगे. बता दें, चीन में बेरोजगारी दर 19 फीसदी के करीब है.

भारत-चीन के तनाव में आई कमी

चीन और भारत के बीच काफी समय से तनाव चल रहा था, जो अब कम होता नजर आ रहा है. दोनों देशों के बीच सीधी फ्लाइट की भी शुरुआत हो रही है. हालांकि सवाल यह भी उठता है कि क्या भारत के लोगों के लिए चीन का के-वीजा अमेरिका के एच-1बी वीजा का विकल्प बन सकता है? भारत और चीन के बीच भाषा और संस्कृति का काफी अंतर है. यह भी देखना होगा कि दूसरे देश से आए लोगों को स्वीकार करना और उनके साथ सामंजस्य बैठाना चीनी नागरिकों के लिए कितना आसान होगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: चीन का 'के-वीजा' क्या है और यह क्यों चर्चा में है?

जवाब: यह चीन का एक नया वीजा है जो STEM क्षेत्र की प्रतिभाओं के लिए है. यह अमेरिका के H-1B वीजा नियमों में बदलाव के बाद चर्चा में आया है.

सवाल: के-वीजा किन लोगों को मिल सकता है?

जवाब: यह वीजा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों के छात्रों और पेशेवरों को मिल सकता है.

सवाल: यह अमेरिका के एच-1बी वीजा से कैसे अलग है?

जवाब: के-वीजा के लिए पहले से जॉब ऑफर होना जरूरी नहीं है, जबकि एच-1बी वीजा के लिए यह अनिवार्य है.

सवाल: चीन में के-वीजा को लेकर कैसी प्रतिक्रिया है?

चीन के युवा इससे नाराज हैं, क्योंकि उनके देश में पहले से ही बेरोजगारी दर काफी ज्यादा (लगभग 19%) है.

सवाल: क्या यह वीजा भारतीयों के लिए एच-1बी का विकल्प बन सकता है?

जवाब: यह एक विकल्प हो सकता है, लेकिन भाषा और संस्कृति का बड़ा अंतर एक बड़ी चुनौती है.

(IANS इनपुट के साथ)

Add Zee Business as a Preferred Source