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भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजर. (Image Source- ANI)
मिडिल ईस्ट में जब भी तनाव बढ़ता है, तो उसका सीधा असर भारत के उन घरों में महसूस होता है जिनके अपने लोग खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में गए हुए हैं. इस वक्त इजरायल और ईरान के बीच जो खींचतान चल रही है, उसे लेकर इजरायल ने भारत के सामने एक बहुत बड़ी और डराने वाली तस्वीर रखी है.
भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजर ने साफ़ कहा है कि अगर ईरान के खतरे को अभी नहीं रोका गया, तो खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ भारतीयों की जिंदगी और उनकी रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगेंगे. इजरायली राजदूत ने एक खास बातचीत में खुलासा किया कि इजरायल और भारत के बीच इस वक्त टॉप लेवल पर बातचीत चल रही है. प्रधानमंत्री से लेकर विदेश मंत्री तक, एक-एक पल की जानकारी भारत सरकार के साथ साझा की जा रही है.
इजरायली राजदूत रूवेन अजर ने बहुत ही कड़े शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने ईरान को एक 'कट्टरपंथी' देश बताया जो परमाणु हथियार बनाने की जिद पर अड़ा है. इतना ही नहीं, उनके मुताबिक ईरान ने हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लाखों ड्रोन का जखीरा खड़ा कर लिया है.
अजर का कहना है कि ईरान का यह प्लान सिर्फ इजरायल के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता को तहस-नहस करने वाला है. अगर वहाँ अशांति फैलती है, तो खाड़ी की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. चूंकि वहां 1 करोड़ भारतीय रहते हैं और काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और भविष्य सीधे तौर पर दांव पर लग जाता है. यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि किसी भी तरह की अस्थिरता भारत के लिए एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा कर सकती है.
भारत ने दुनिया के साथ मिलकर एक बहुत बड़ा सपना देखा है- IMEC यानी इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर. यह एक ऐसा रास्ता है जो भारत को सीधे यूरोप से जोड़ देगा और पूरे इलाके को निवेश का हब बना देगा. लेकिन रूवेन अजर ने यहाँ एक कड़वी सच्चाई पेश की है.
उनका कहना है कि कोई भी बड़ा आर्थिक प्रोजेक्ट तभी कामयाब होता है जब उसकी सुरक्षा की नींव मजबूत हो. अगर ईरान जैसे देश दूसरे अरब देशों में दखल देंगे या इजरायल को तबाह करने की कोशिश करेंगे, तो कोई भी निवेशक अपना पैसा यहां लगाने का जोखिम नहीं उठाएगा. जब तक माहौल बिगाड़ने वाली ताकतें सक्रिय हैं, तब तक कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट सिर्फ एक कल्पना बनकर रह जाएंगे.
राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल और भारत के बीच संवाद की गहराई बहुत ज्यादा है. दोनों देशों के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं. इजरायल भारत को यह बता रहा है कि उसके सैन्य ऑपरेशन्स का असली मकसद क्या है और वह कैसे इस इलाके से भयानक खतरों को हटाना चाहता है.
अजर को पूरा भरोसा है कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखकर जरूरी कदम उठा रहा है. इजरायल का तर्क है कि एक बार जब इस कट्टरपंथी शासन के व्यवहार में बदलाव आएगा या इसके खतरों को खत्म कर दिया जाएगा, तो राजनीतिक समझौते और आर्थिक तरक्की की रफ्तार बहुत तेज हो जाएगी. निवेशकों का भरोसा तभी लौटेगा जब उन्हें यकीन होगा कि उनके निवेश पर कोई मिसाइल या ड्रोन हमला नहीं होगा.
इजरायली राजदूत की बातों से एक बात तो साफ है कि पश्चिम एशिया इस वक्त एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. एक तरफ विकास की योजनाएं हैं और दूसरी तरफ युद्ध की आहट. अजर के मुताबिक, निवेशक डरे हुए हैं. कोई भी ऐसी जगह नहीं जाना चाहता जहाँ रोज ड्रोन और मिसाइलों का साया हो.
भारत के लिए यह स्थिति बहुत ही नाजुक है. हमें अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल चाहिए, अपने 1 करोड़ लोगों की सुरक्षा चाहिए और व्यापार के लिए शांति चाहिए. इजरायल का कहना है कि वे जो लड़ाई लड़ रहे हैं, वह दरअसल उस शांति की नींव रखने के लिए है जिसकी जरूरत भारत और पूरी दुनिया को है. बिना एक मजबूत सुरक्षा ढांचे के, विकास की बातें बेमानी हैं.