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पश्चिम एशिया के युद्ध ने केवल ईरान और इजरायल को ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक, इराक को भी आर्थिक रूप से घुटनों पर ला दिया है. इराक के तेल मंत्री हयान अब्देल-गनी ने गुरुवार को जो आंकड़े पेश किए हैं, वह डराने वाले हैं.
जिस देश की 90% से ज्यादा कमाई तेल पर टिकी हो, वहां उत्पादन का एक तिहाई रह जाना किसी बड़े आर्थिक भूकंप से कम नहीं है. आइए, इराक के इस तेल संकट और उसके 'सर्वाइवल प्लान' को विस्तार से समझते हैं.
युद्ध शुरू होने से पहले इराक जितना तेल निकालता था, अब उसका केवल एक छोटा हिस्सा ही बच पाया है.
मौजूदा हालात: इराक अब केवल 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) उत्पादन कर रहा है.
बड़ी गिरावट: इराक के मुख्य दक्षिणी तेल क्षेत्रों (Southern Oilfields) में उत्पादन 70% तक गिरकर महज 1.3 मिलियन bpd रह गया है.
वजह: खाड़ी (Gulf) के समुद्री रास्ते युद्ध के कारण पूरी तरह असुरक्षित हैं, जिससे इराक अपना तेल जहाजों के जरिए निर्यात नहीं कर पा रहा है.
समुद्री रास्ते बंद होने के बाद इराक ने तेल सप्लाई के लिए बहुत ही कठिन और महंगा रास्ता चुना है:
ट्रक ट्रांसपोर्ट: वर्तमान में लगभग 200,000 bpd तेल ट्रकों में भरकर तुर्की, सीरिया और जॉर्डन भेजा जा रहा है.
जोखिम: सड़क मार्ग से इतना बड़ा वॉल्यूम सप्लाई करना न केवल खर्चीला है, बल्कि युद्ध के माहौल में बेहद खतरनाक भी है.
प्लान: तेल मंत्री ने कहा है कि सरकार ने इन बाधाओं को मैनेज करने के लिए एक विशेष योजना तैयार की है.
इराक अब अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तुर्की के रास्ते वाली पाइपलाइन को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा है.
केआरजी (KRG) से मदद: इराक के तेल मंत्रालय ने कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार (KRG) से अनुरोध किया है कि वह किरकुक तेल क्षेत्रों से कम से कम 100,000 bpd तेल तुर्की के सेहान बंदरगाह तक पंप करे.
समझौता: मंत्री अब्देल-गनी ने संकेत दिया है कि इराक जल्द ही सेहान पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात करने के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर करेगा. हालांकि, इसकी बारीकियां अभी गुप्त रखी गई हैं.
यह संकट इराक के लिए 'अस्तित्व' का सवाल बन गया है:
आय का स्रोत: इराक अपनी सार्वजनिक आय का 90% से अधिक हिस्सा और सरकारी खर्च का लगभग पूरा हिस्सा कच्चे तेल की बिक्री से प्राप्त करता है.
बजट संकट: निर्यात रुकने का सीधा मतलब है कि देश के पास कर्मचारियों को सैलरी देने और बुनियादी सुविधाएं चलाने के लिए भी पैसे कम पड़ सकते हैं.
इराक की स्थिति यह बताती है कि युद्ध केवल बम और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहता, वह पूरे देश की रीढ़ (अर्थव्यवस्था) तोड़ देता है. इराक का ट्रकों के जरिए तेल भेजना एक 'इमरजेंसी' कदम है, जो लंबे समय तक कारगर नहीं हो सकता. अब दुनिया की नजरें सेहान पाइपलाइन समझौते पर टिकी हैं, क्योंकि अगर इराक का तेल बाजार में नहीं पहुँचा, तो वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें और अधिक आग उगल सकती हैं.
1- इराक का तेल उत्पादन इतना कम क्यों हो गया है?
युद्ध के कारण समुद्री रास्ते बंद हैं, जिससे इराक अपना तेल निर्यात नहीं कर पा रहा है और उसे उत्पादन कम करना पड़ा है.
2- इराक अब तेल कैसे निर्यात कर रहा है?
इराक वर्तमान में लगभग 200,000 बैरल तेल ट्रकों के माध्यम से तुर्की, सीरिया और जॉर्डन भेज रहा है.
3- सेहान पाइपलाइन इराक के लिए क्यों जरूरी है?
यह पाइपलाइन तुर्की के जरिए तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने का एकमात्र सुरक्षित जमीनी रास्ता है.
4- इराक की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?
इराक की 90% आय तेल से होती है, उत्पादन गिरने से देश में भारी आर्थिक संकट और बजट की कमी हो सकती है.
5- क्या किरकुक तेल क्षेत्र से निर्यात शुरू हो गया है?
मंत्रालय ने KRG से 100,000 bpd पंप करने को कहा है, लेकिन अभी तक KRG की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है.
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