डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने लिखा UN को लेटर, कहा-'टारगेट पर होगा हर अमेरिकी बेस, देंगे करारा जवाब'

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी दी थी. इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को लेटर भेजकर कहा कि अगर अमेरिका उस पर हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद उसे सभी सैन्य अड्डे और संपत्तियां टारगेट पर रहेंगे.
डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने लिखा UN को लेटर, कहा-'टारगेट पर होगा हर अमेरिकी बेस, देंगे करारा जवाब'

बाजार में गुरुवार को ईरान पर संभावित हमले के डर से कोहराम मचा. बिकवाली के बाद निफ्टी और बैंक निफ्टी लाल निशान पर बंद हुए हैं.वीकेंड तक ईरान पर हमले का डर बना हुआ है. अब ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को लेटर भेजकर कहा है कि यदि अमेरिका हमला करता है तो क्षेत्र में मौजूद उसके सभी सैन्य ठिकाने और संपत्तियां टारगेट पर होंगे. तेहरान ने सुरक्षा परिषद से अपील की है कि हालात बिगड़ने से पहले हस्तक्षेप करें.इसके अलावा चेतावनी भी दी कि किसी भी हमले के अप्रत्याशित और अनियंत्रित परिणाम की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका पर होगी.

ट्रंप की बयानबाजी का दिया जवाब

यूएन में ईरान की स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत अमीर सईद इरावनी ने पत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की हालिया बयानबाजी के जवाब में लिखा है.

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राष्ट्रपति ट्रंप ने दी थी ये धमकी

  • ईरान के स्थायी मिशन ने कहा है कि ट्रंप की बयानबाजी केवल कोरी धमकी नहीं होती है, बल्कि यह सैन्य आक्रमकता के लिए जोखिम के संकेत है. इसका नतीजा पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी हो सकता है.
  • ईरान ने अपनी चिट्ठी में 18 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ट्रंप की एक सार्वजनिक धमकी का खास तौर से जिक्र किया है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा था- " यदि ईरान समझौता न करने का फैसला करता है तो अमेरिका के लिए यह जरूरी हो सकता है कि वह संभावित हमलो को खत्म करने के लिए डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड स्थित एयरफील्ड का इस्तेमाल करें."

ईरान ने बताया यूएन चार्टर का उल्लंघन

ईरान ने अपने लेटर में ट्रंप के इस बयान को यूएन चार्टर और इंटरनेशनल कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है, जो क्षेत्र को संकट और अस्थिरत के एक नए चक्र में धकेलने का जोखिम पैदा करता है.

आर्टिकल 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार

  • ईरान ने अपने लेटर में सख्त लहजे में कहा है कि यदि उस पर सैन्य आक्रमकता थोपी जाती है तो वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा.
  • ईरान ने कहा कि वह अपनी रक्षा में उसी हिसाब से और निर्णायक जवाब देगा. ऐसी स्थिति में दुश्मन सेना के सभी बेस और संपत्तियां ईरान का वैध टारगेट बन जाएंगे.
  • ईरान ने साफ कहा है कि किसी भी अनियंत्रित परिणाम की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर अमेरिका की होगी.
  • ईरान ने सिक्युरिटी काउंसिल और यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मांग की है कि इससे पहले बहुत ज्यादा देर हो जाए, वे बिना किसी देरी के एक्शन लें.
  • ईरान ने साथ ही कहा कि सिक्युरिटी काउंसिल अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर अमेरिका को यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2 (4) का पालन करने और बल प्रयोग की अवैध धमकियों को रोकने के लिए बाध्य करें.

कूटनीतिक समाधानों के प्रति प्रतिबद्ध

ईरान ने धमकियों के बीच साफ किया है कि वह कूटनीतिक समाधानों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. लेटर में कहा है कि ईरान अपनी शांतिपूर्ण परमाणु प्रोग्राम की चिंताओं को दूर करने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है. ईरान ने आपसी आधार पर लगाए गए "अवैध और अमानवीय एकतरफा दंडात्मक उपायों (UCMs) को पूरी तरह से हटाने की मांग की है. मध्यपूर्व के देश ने कहा कि यदि अमेरिका बातचीत में गंभीरता दिखाएगा और यूएन चार्टर का सम्मान करेगा तो एक टिकाऊ और संतुलित समाधान संभव है.

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