ईरान ने दुनिया को चेताया! कहा- अमेरिका-इजरायल कर सकते हैं 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशन, जानिए क्या है ये?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल पर 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशंस के जरिए जंग फैलाने का आरोप लगाया है. जानिए क्या है पूरा मामला और मिडिल ईस्ट में बढ़ती टेंशन की वजह.
ईरान ने दुनिया को चेताया! कहा- अमेरिका-इजरायल कर सकते हैं 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशन, जानिए क्या है ये?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची. (Image Source-X)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक ऐसी चेतावनी दी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. अराघची का कहना है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर इस जारी संघर्ष को और बड़ा रूप देने की कोशिश कर रहे हैं.

ईरान की सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' के मुताबिक, अराघची ने डर जताया है कि ये देश 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशंस' का सहारा ले सकते हैं. 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशंस' का सीधा मतलब ये है कि कोई ऐसी घटना को अंजाम दिया जा सकता है जिसका आरोप किसी और पर मढ़कर जंग में दूसरे देशों को भी घसीटा जा सके.

तीसरे देश के खिलाफ चला सकते हैं 'झूठा ऑपरेशन'

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यूनान के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ फोन पर हुई बातचीत में अराघची ने साफ कहा कि वाशिंगटन और तेल अवीव बिना किसी उकसावे के ईरान के खिलाफ आक्रामकता दिखा रहे हैं. उन्होंने आगाह किया कि ये दोनों देश अन्य देशों को अपनी इस साजिश में शामिल होने के लिए मजबूर कर सकते हैं या फिर किसी तीसरे देश के खिलाफ 'झूठा ऑपरेशन' चलाकर माहौल बिगाड़ सकते हैं.

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अंतरराष्ट्रीय कानूनों की दुहाई और देशों की जिम्मेदारी

अराघची ने इस बातचीत के दौरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी जिक्र किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सभी देशों की यह कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपनी जमीन या संसाधनों का इस्तेमाल किसी भी तरह के हमले या साजिश के लिए न होने दें. उन्होंने साफ किया कि अगर कोई देश अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ होने देता है, तो वह भी इस आक्रामकता का हिस्सा माना जाएगा.

अब्बास अराघची ने पिछले एक महीने के दौरान अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों को 'अपराध' करार दिया. उनके अनुसार, ये हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 4 का खुला उल्लंघन हैं. ईरान का मानना है कि यह एक यूएन सदस्य देश के खिलाफ सीधा सैन्य हमला है, जिसे दुनिया को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

चुप्पी के नतीजे सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे

ईरान के विदेश मंत्री ने दुनिया भर के देशों से इन 'अवैध हमलों' और मानवाधिकारों के उल्लंघन की निंदा करने की अपील की है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका और इजरायल की इन आतंकी हरकतों पर दुनिया की खामोशी अंतरराष्ट्रीय नैतिक व्यवस्था को तबाह कर देगी.

अराघची ने साफ कर दिया कि इस चुप्पी के नतीजे सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि आने वाले समय में पूरी दुनिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान चुप नहीं बैठेगा. ईरान अपने रक्षा अभियान जारी रखेगा और हमलावरों के सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा. यानी आने वाले दिनों में जवाबी कार्रवाई और तेज हो सकती है.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा और समुद्री रास्ता

ईरान ने इस तनाव का संबंध हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा से भी जोड़ा है. अराघची ने बताया कि ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.

उन्होंने कहा कि ईरान यह सुनिश्चित कर रहा है कि इस रास्ते का इस्तेमाल हमलावर देश न कर पाएं, जबकि बाकी व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बना रहे. मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से इस जलमार्ग पर हमेशा खतरा बना रहता है, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है.

दूसरी तरफ, यूनान के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस ने भी बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र में जल्द ही शांति और स्थिरता वापस आएगी.

इराक में ड्रोन स्ट्राइक और आरोपों का नया दौर

इस पूरे विवाद के बीच एक नई घटना ने आग में घी डालने का काम किया है. शनिवार को इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी के आवास पर एक ड्रोन हमला हुआ. इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. अमेरिका ने दावा किया कि यह हमला ईरान समर्थित मिलिशिया ने किया है. वहीं, ईरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अमेरिका और इजरायल की एक सोची-समझी साजिश बताया है.

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे 'आतंकवाद का खुला उदाहरण' बताते हुए आरोप लगाया कि 'हमलावर दुश्मनों' (अमेरिका और इजरायल) ने ही इस ड्रोन हमले को अंजाम दिया है.

अमेरिका का पक्ष और मिलिशिया पर आरोप

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुख्य उप प्रवक्ता थॉमस 'टॉमी' पिगोट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पर अपनी स्थिति साफ की है. अमेरिका का कहना है कि इराकी कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति पर हमला इराक में सक्रिय 'ईरान के आतंकवादी मिलिशिया प्रॉक्सी' द्वारा किया गया था. इस आरोप-प्रत्यारोप ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है.

FAQs

Q: ईरान के विदेश मंत्री ने 'फॉल्स फ्लैग' ऑपरेशन को लेकर क्या चेतावनी दी है

A: विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आगाह किया है कि अमेरिका और इजरायल किसी झूठी घटना या ऑपरेशन को अंजाम देकर ईरान के खिलाफ दूसरे देशों को भड़का सकते हैं ताकि जंग का दायरा बढ़ाया जा सके.

Q: इराकी कुर्दिस्तान के राष्ट्रपति के घर पर हुए हमले के लिए कौन जिम्मेदार है?

A: इस पर विवाद है. अमेरिका का कहना है कि हमला ईरान समर्थित मिलिशिया ने किया है, जबकि ईरान और IRGC का आरोप है कि यह अमेरिका और इजरायल की आतंकी साजिश है.

Q: अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की है?

A: उन्होंने सभी देशों से आग्रह किया है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें और अमेरिका-इजरायल द्वारा किए जा रहे 'अवैध हमलों' की खुलकर निंदा करें.

Q: हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान का क्या रुख है?

A: ईरान का कहना है कि उसने इस रास्ते पर सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि हमलावर देश इसका फायदा न उठा सकें, हालांकि बाकी दुनिया के व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित रखा गया है.

Q: ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को यूएन चार्टर का उल्लंघन क्यों बताया?

A: ईरान के अनुसार, पिछले एक महीने में हुए हमले एक संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश की संप्रभुता पर हमला हैं और यह यूएन चार्टर के अनुच्छेद 4 का स्पष्ट उल्लंघन है.