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ईरान के ब्रिगेडियर जनरल अबुलफजल शेकरची. (Image Source- Facebook)
मिडल ईस्ट के रेगिस्तान से उठने वाली बारूद की गंध अब पूरी दुनिया को डरा रही है. ईरान के सशस्त्र बलों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के तमाम मुस्लिम हुक्मरानों को एक मंच पर आने का न्योता दिया है. ईरान का कहना है कि अब वक्त आ गया है जब पूरे इस्लामिक जगत को अमेरिका और ज़ायोनी ताकतों के खिलाफ एक दीवार बनकर खड़ा हो जाना चाहिए.
खास बात ये है कि ईरान, जहां एक तरफ सभी मुस्लिम देशों से एक होने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने पड़ोसी मुस्लिम देशों पर लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा. हालांकि, ईरान का कहना है कि ये हमले अमेरिका के बेस को टारगेट कर के किए जा रहे हैं.
ईरान के ब्रिगेडियर जनरल अबुलफजल शेकरची ने सीधे शब्दों में मुस्लिम देशों के नेताओं से कहा है कि वे ईरान के इस्लामी गणराज्य पर भरोसा करें. उनका कहना है कि अमेरिका और इजरायल जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं, उससे मुकाबला करने का एक ही तरीका है और वह है एकजुटता. ईरान इस वक्त खुद को उस ताकत के रूप में देख रहा है जो पश्चिमी देशों के वर्चस्व को चुनौती दे सकता है.
ब्रिगेडियर जनरल अबुलफजल शेकरची का यह संबोधन काफी भावुक और कड़ा रहा. उन्होंने मुस्लिम नेताओं से कहा कि उन्हें अपने लोगों और ईरान की नियत पर शक नहीं करना चाहिए. जनरल के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की जोड़ी दुनिया में कुफ्र और पाखंड को बढ़ावा दे रही है. उन्होंने कहा कि इस्लामिक दुनिया को अपनी एकजुटता के जरिए इन ताकतों को करारा जवाब देना होगा. ईरान का मानना है कि अगर सभी मुस्लिम देश एक साथ आ जाएं, तो अमेरिका के लिए इस इलाके में टिकना नामुमकिन हो जाएगा.
यह अपील ऐसे समय में आई है जब ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने एक टीवी एड्रेस में बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका और इजरायल को बेगुनाहों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब देना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि जो भी नुकसान उन्होंने अब तक पहुंचाया है, उसकी भरपाई उन्हें भारी कीमत चुकाकर करनी पड़ेगी. ईरान अब केवल बातों तक सीमित नहीं है, वह मैदान में अपनी ताकत दिखाने का दावा भी कर रहा है.
ईरान ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका के खतरनाक MQ-9 ड्रोन्स को आसमान में ही ढेर कर दिया है. बताया जा रहा है कि फिरोजाबाद और बंदर अब्बास के पास दो ड्रोन मार गिराए गए, जबकि एक अन्य विमान को तबरेज के आसमान में नष्ट कर दिया गया. जोलफघारी के मुताबिक, अब तक नष्ट किए गए अमेरिकी और इजरायली ड्रोन्स की कुल संख्या 112 तक पहुंच गई है. इनमें केवल जासूसी करने वाले नहीं, बल्कि हमलावर और सुसाइड ड्रोन्स भी शामिल हैं.
ईरान की इस कार्रवाई में केवल उसकी अपनी सेना ही नहीं, बल्कि हिजबुल्लाह और सिपह की एयरोस्पेस व नौसेना इकाइयां भी शामिल बताई जा रही हैं. यह पूरा ऑपरेशन 'या साहेब अल-जमान' के पवित्र कोड के साथ चलाया जा रहा है. कुद्स दिवस की मार्च के बाद जिस तरह से ईरान ने अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं, उससे साफ लग रहा है कि उसने लंबी लड़ाई की तैयारी कर ली है. ईरान ने अपने भूमिगत अड्डों से ड्रोन्स और मिसाइलों के जखीरे की झलक दिखाकर यह भी साफ कर दिया है कि उसकी ताकत जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि गहराई में भी छिपी है.
ईरान का दावा है कि उसने इस बार 'खेबर-शेखन' नाम की उन मिसाइलों का इस्तेमाल किया है जो सॉलिड फ्यूल से चलती हैं और सटीक निशाना लगाने के लिए जानी जाती हैं. दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में ये मिसाइलें और हमलावर ड्रोन्स दुश्मन के ठिकानों की तरफ भेजे गए हैं. ईरान का कहना है कि उनके मुख्य निशाने पर इजरायल के उत्तरी कमांड का इंफ्रास्ट्रक्चर और अमेरिकी सैनिकों के जमावड़े वाली जगहें थीं.
जिन शहरों और इलाकों को निशाना बनाने का दावा किया गया है, उनमें हाइफा और कैसरिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इसके अलावा जरीत और श्लोमी जैसी बस्तियों और 'होलोन' मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स को भी तबाह करने की बात कही गई है. केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि ईरान ने अरब के इलाकों में मौजूद अमेरिकी अड्डों को भी नहीं बख्शा. अल धफरा और इरबिल जैसे बेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों को पहले चेतावनी दी गई कि वे इलाका छोड़ दें और फिर वहां सटीक हमले किए गए.
ईरान की इस कार्रवाई का एक और बड़ा मकसद अमेरिकी और इजरायली कमांडरों को खत्म करना है. प्रवक्ता के मुताबिक, उन्होंने इजरायल के 10 और अमेरिका के 3 अहम कमांडरों के ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया है. तेल अवीव में सात अलग-अलग जगहों पर, रिशोन लेजियोन में दो और शोहम में एक जगह हमला किया गया है. साथ ही किंग सुल्तान और विक्टोरिया बेस पर भी अमेरिकी कमांडरों के होने की सूचना पर हमले किए गए.
जोलफघारी ने बहुत ही कड़े शब्दों में कहा कि 'जहन्नुम के दरवाजे' तब तक बंद नहीं होंगे जब तक आखिरी अपराधी का खात्मा नहीं हो जाता. उनका कहना है कि वे अपने लोगों के खून की कीमत वसूल कर ही दम लेंगे. ईरान ने जिस तरह से अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और मुस्लिम देशों को साथ आने को कहा है, उसने अमेरिका के लिए मिडल ईस्ट में बड़ी चुनौती पेश कर दी है. आने वाले समय में यह तनाव क्या मोड़ लेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मुस्लिम देश ईरान के इस संदेश पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 सवाल- ईरान ने मुस्लिम देशों के नेताओं से क्या अपील की है?
जवाब- ईरान ने मुस्लिम हुक्मरानों से अपील की है कि वे अमेरिका और जायोनी ताकतों के खिलाफ एकजुट हों और इस्लामिक जगत की मजबूती के लिए ईरान पर भरोसा करें.
Q2 सवाल- ईरान ने अब तक अमेरिका के कितने ड्रोन्स गिराने का दावा किया है?
जवाब- ईरान के सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, उन्होंने अब तक अमेरिका के कुल 112 ड्रोन्स को मार गिराया है, जिनमें जासूसी और हमलावर ड्रोन्स शामिल हैं.
Q3 सवाल- ईरान ने हमलों के लिए किन मिसाइलों का उपयोग किया है?
जवाब- ईरान ने 'खेबर-शेखन' नाम की सॉलिड-फ्यूल वाली सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने में सक्षम हैं.
Q4 सवाल- किन प्रमुख अमेरिकी बेस को निशाना बनाया गया है?
जवाब- ईरान ने अल धफरा, इरबिल, किंग सुल्तान और विक्टोरिया जैसे अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाने का दावा किया है.
Q5 सवाल- ईरान की इस सैन्य कार्रवाई का कोड वर्ड क्या है?
जवाब- ईरान और उसके सहयोगी इस पूरे ऑपरेशन को 'या साहेब अल-जमान' नाम के पवित्र कोड के तहत अंजाम दे रहे हैं.