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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है, जहां दुनिया की नजरें मंगलवार की रात पर टिकी हैं. ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान किसी भी आक्रामकता या आसन्न खतरे का ऐसा जवाब देगा जो न केवल निर्णायक होगा, बल्कि दुश्मन को पछतावा करने पर मजबूर कर देगा. यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट और पुलों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों को तबाह करने की सीधी धमकी दी है.
न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार ईरान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाते हुए ट्रंप के बयानों को 'युद्ध अपराध' की श्रेणी में रखा है. ईरानी कूटनीतिज्ञों का तर्क है कि नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और 'रोम संविधि' (Rome Statute) का खुला उल्लंघन है. ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी सेना और कूटनीतिक तंत्र एक साथ काम कर रहे हैं. जहां एक तरफ सैनिक सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीति के जरिए दुनिया को अमेरिका के 'अपराधों' से अवगत कराया जा रहा है.
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए ईरान को मंगलवार रात 8:00 बजे (पूर्वी समय) तक की समयसीमा दी है. ट्रंप का कहना है कि ईरान या तो समझौता करे या सामरिक रूप से अहम 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को खोल दे. अगर ऐसा नहीं होता है, तो वॉशिंगटन ईरान के ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे को 'समेट' (Wrap up) देगा. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा:
नागरिक ठिकानों पर हमला: पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाना रोम संविधि के अनुच्छेद 8(2)(b) के तहत युद्ध अपराध है.
सहयोगियों को चेतावनी: बघाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका की मदद करेगा, उसे भी इन युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा.
इजरायल का एंगल: ईरान का आरोप है कि अमेरिका एक तरफ इजरायल को नागरिक ठिकानों पर हमले के लिए 'हरी झंडी' दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ खुद ईरान के औद्योगिक ढांचे को खत्म करने की बात कर रहा है.
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इस पूरे विवाद के केंद्र में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' है, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान की तरफ से इस रास्ते को बंद करने या बाधित करने की कोशिशों के बाद से ही अमेरिका और इजरायल के साथ उसका संघर्ष दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है.
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस जलडमरूमध्य को बंद रखना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा है, जबकि ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जोड़कर देख रहा है. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच सैन्य और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को लेकर शत्रुता अपने चरम पर है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है.
ईरान और अमेरिका के बीच का यह वाकयुद्ध अब जमीन पर भारी सैन्य हलचल में बदलता दिख रहा है. ट्रंप की 'मंगलवार रात 8 बजे' वाली डेडलाइन ने कूटनीतिक समाधान के दरवाजों को लगभग बंद सा कर दिया है. यदि अगले कुछ घंटों में कोई बड़ा समझौता नहीं होता है, तो ऊर्जा संकट और युद्ध की विभीषिका पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले सकती है. ईरान की 'निर्णायक जवाब' की मंशा और अमेरिका की 'वॉर क्राइम' वाली धमकियां एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आहट दे रही हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 ईरान ने ट्रंप की धमकी को युद्ध अपराध क्यों कहा?
ईरान के अनुसार, नागरिक बुनियादी ढांचों (पावर प्लांट, पुल) को निशाना बनाना रोम संविधि के अनुच्छेद 8(2)(b) के तहत अपराध है.
Q2 डोनाल्ड ट्रंप की मंगलवार की डेडलाइन क्या है?
ट्रंप ने मंगलवार रात 8 बजे तक ईरान को 'डील' करने या 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' खोलने की चेतावनी दी है.
Q3 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग है, जिसके जरिए वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है.
Q4 ईरान के उप विदेश मंत्री ने क्या चेतावनी दी है?
काज़ेम गरीबाबादी ने कहा है कि किसी भी हमले का जवाब तत्काल, निर्णायक और पछतावा पैदा करने वाला होगा.
Q5 क्या इस संघर्ष में अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं?
ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की मदद करने वाले किसी भी देश को युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार माना जाएगा.