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अली लारिजानी (Source- X@alilarijani_ir)
पश्चिम एशिया से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है. इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने ईरान की राजधानी तेहरान में घुसकर एक ऐसा हमला किया है, जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि रातों-रात हुए एक हवाई हमले में ईरान के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक अली लारिजानी मारे गए हैं.
अली लारिजानी सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि वे ईरान की 'सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल' के सचिव थे और देश की राजनीति में बहुत गहरा रसूख रखते थे. उनके साथ ही ईरान की पैरामिलिट्री फोर्स 'बासिज' के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को भी इजरायल ने खत्म कर दिया है. इजरायल का कहना है कि यह हमला सीधे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर किया गया है.
इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इस कामयाबी पर बहुत ही सख्त बयान दिया है. उन्होंने कहा कि लारिजानी और बासिज कमांडर अब नरक की गहराइयों में जा चुके हैं. काट्ज ने ईरान को एक 'ऑक्टोपस' की तरह बताया और कहा कि वे इसके सिर को बार-बार काटते रहेंगे ताकि यह दोबारा न पनप सके.
इजरायल ने साफ कर दिया है कि उसके निशाने पर अब ईरान की वह लीडरशिप है जो आतंक और दमन का शासन चला रही है. काट्ज और नेतन्याहू ने अपनी सेना को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ईरान के भीतर छिपे इन 'आतंकी आकाओं' का शिकार जारी रखें. इजरायल का कहना है कि वे तब तक नहीं रुकेंगे जब तक वे इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म नहीं कर देते.
अली लारिजानी तेहरान के पावर कॉरिडोर में एक बहुत बड़े 'पावर ब्रोकर' माने जाते थे. उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई को अगला सुप्रीम लीडर घोषित किए जाने की प्रक्रिया को भी रोक दिया था. यानी ईरान के अगले सर्वोच्च नेता की कुर्सी किसके पास होगी, इसमें लारिजानी का बड़ा हाथ था.
हैरानी की बात यह है कि मारे जाने से ठीक एक दिन पहले सोमवार को ही लारिजानी ने अरब दुनिया के नाम एक मैसेज जारी किया था. उन्होंने कहा था कि ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ अपनी लड़ाई में मजबूती से खड़ा है. उन्होंने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील की थी और कहा था कि ईरान इस क्षेत्र में किसी पर अपना दबदबा नहीं बनाना चाहता, बल्कि वह प्रतिरोध की ताकतों के साथ मिलकर लड़ रहा है.
लारिजानी के साथ-साथ गुलामरेजा सुलेमानी की मौत भी ईरान के लिए एक बहुत बड़ा झटका है. सुलेमानी पिछले 6 साल से ईरान की बासिज यूनिट के कमांडर थे. इजरायल का दावा है कि सुलेमानी के नेतृत्व में ही बासिज यूनिट ने ईरान के आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों पर जमकर जुल्म ढाए थे.
हजारों गिरफ्तारियां, हिंसा और ताकत का बेजा इस्तेमाल करने के पीछे सुलेमानी का ही दिमाग बताया जाता है. IDF ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके बताया कि सुलेमानी को खत्म करना उनके लिए एक बड़ी प्राथमिकता थी क्योंकि वह दमनकारी नीतियों का मुख्य चेहरा थे.
सिर्फ ईरान ही नहीं, इजरायल ने लेबनान में भी तगड़ी चोट की है. दक्षिणी लेबनान के कफारा इलाके में IDF ने हिजबुल्लाह के एक बहुत बड़े अंडरग्राउंड हथियारों के ठिकाने को निशाना बनाया. बताया जा रहा है कि इस ठिकाने में क्रूज मिसाइलों और सैकड़ों रॉकेटों का जखीरा छिपाकर रखा गया था.
इजरायल की ये दोहरी कार्रवाई बताती है कि वह अब 'बैकफुट' पर रहने के मूड में बिल्कुल नहीं है. एक तरफ तेहरान में ईरान के बड़े नेताओं को खत्म करना और दूसरी तरफ लेबनान में हिजबुल्लाह के हथियारों को तबाह करना, इजरायल की आक्रामक रणनीति को साफ दर्शाता है.
लारिजानी की मौत के बाद तेहरान में गुस्से का माहौल है. लारिजानी ने अपने आखिरी संदेश में सवाल पूछा था कि "एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं और दूसरी तरफ ईरान और प्रतिरोध की ताकतें, आप किसकी तरफ हैं?" अब जबकि इजरायल ने सीधे तेहरान में स्ट्राइक की है, तो जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है.
ईरान ने हमेशा कहा है कि अगर उसके ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह चुप नहीं बैठेगा. लेकिन इजरायल ने जिस तरह से उनकी नाक के नीचे घुसकर हमला किया है, उससे ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं.