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ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते पर हुए साइन (Photo: Reuters/X)
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले तीन महीने से चल रहा युद्ध आखिरकार खत्म हो गया है. दोनों देशों ने इस्लामाबाद MOU पर साइन किए हैं. इस समझौते के प्रभावी होते ही लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति की घोषणा की गई है. ड्राफ्ट ग्लोबल इकोनॉमी को प्रभावित करने वाले तीन सबसे बड़े मुद्दों- ईरान के परमाणु कार्यक्रम, कच्चे तेल के निर्यात पर लगी पाबंदियों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षित व्यापार का पूरा समाधान भी पेश करता है. समझौते के ड्राफ्ट के मुताबिक 60 दिन के अंदर फाइनल डील तैयार की जाएगी, जिससे यह शांति की प्रक्रिया स्थायी होगी.
MOU के मुताबिक ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी तौर पर खत्म कर रहे हैं. दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ बल प्रयोग और धमकी से बचेंगे और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे.
ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर छूट
अमेरिका यूएन सिक्योरिटी काउंसिल और अपनी तरफ से लगाए गए सभी प्राथमिक और अन्य प्रतिबंधों को खत्म करेगा. इसके अलावा, ईरान के फ्रीज किए गए सभी फंड्स और प्रॉपर्टीज को पूरी तरह से रिलीज कर इस्तेमाल के योग्य बनाया जाएगा.
IAEA की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम
समझौते के मुताबिक दोनों देशों ने अधिकतम 60 दिनों के अंदर फाइनल डील हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है. अमेरिका अपने क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 बिलियन डॉलर का एक प्लान तैयार करेगा. फाइनल डील के एक महीने के अंदर अमेरिका ईरान के आसपास से अपने सुरक्षाबलों को हटा लेगा. इस समझौते के सफल कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक एग्जीक्यूटिव मैकेनिज्म स्थापित किया जाएगा. इस MoU के बाद बचे पैराग्राफ पर आखिरी डील के लिए बातचीत शुरू होगी और फाइनल डील को UNSC के बाइंडिंग रेजोल्यूशन द्वारा समर्थन दिया जाएगा.