ईरान की एक चेतावनी और ट्रंप को देना पड़ा 20 अरब डॉलर का सुरक्षा कवच! जानिए क्या है हॉर्मुज को लेकर US का नया प्लान?

ट्रंप प्रशासन ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही शुरू करने के लिए 20 अरब डॉलर के रीइंश्योरेंस प्लान का ऐलान किया है. जानें कैसे यह कदम ग्लोबल ऑयल सप्लाई और समुद्री व्यापार को पटरी पर लाएगा.
ईरान की एक चेतावनी और ट्रंप को देना पड़ा 20 अरब डॉलर का सुरक्षा कवच! जानिए क्या है हॉर्मुज को लेकर US का नया प्लान?

क्या है हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर US का नया प्लान? (Image Source- Zee Business, X)

मिडिल-ईस्ट में टेंशन के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सन्नाटा पसरा हुआ है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस रास्ते से जहाजों का निकलना लगभग बंद हो गया है. नतीजा? पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.

अब इस संकट से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अपना सबसे बड़ा पत्ता खेला है. अमेरिका ने 20 अरब डॉलर (करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) के एक भारी-भरकम रीइंश्योरेंस प्रोग्राम का ऐलान किया है. इसका सीधा मकसद उन जहाजों को फिर से समुद्र में उतारना है, जो हमले के डर से किनारों पर खड़े हैं.

अमेरिका ने क्या कहा?

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अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्प (DFC) ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि वे फारस की खाड़ी के इलाके में व्यापार को स्थिर करने के लिए समुद्री रीइंश्योरेंस तैनात कर रहे हैं. इसमें सबसे खास बात है 'वॉर रिस्क' कवर. यानी अगर युद्ध की स्थिति में किसी जहाज को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई यह फंड करेगा. ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि इस मोटी रकम के भरोसे शिपिंग कंपनियां फिर से हॉर्मुज के रास्ते व्यापार शुरू करने की हिम्मत जुटा पाएंगी.

क्या है 20 अरब डॉलर का यह रीइंश्योरेंस प्लान?

इस पूरी योजना को समझने के लिए आपको इसके पीछे की गणित देखनी होगी. DFC ने कहा है कि यह सुविधा 'रोलिंग बेसिस' पर लगभग 20 बिलियन डॉलर तक के नुकसान का बीमा करेगी. फिलहाल, यह सुरक्षा सिर्फ जहाजों (vessels) के लिए लागू होगी. यह फैसला तब आया है जब कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने DFC को आदेश दिया था कि वे बहुत ही 'उचित कीमत' पर बीमा उपलब्ध कराएं.

ट्रंप का मानना है कि खाड़ी में ऊर्जा और दूसरे कमर्शियल ट्रेड का फ्लो रुकना नहीं चाहिए. जब इंश्योरेंस कंपनियां पीछे हट जाती हैं या प्रीमियम इतना बढ़ा देती हैं कि व्यापार करना नामुमकिन हो जाए, तब सरकार को आगे आना पड़ता है. यही वजह है कि अब अमेरिकी खजाना इन जहाजों के पीछे एक गारंटी बनकर खड़ा हो गया है.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और मौजूदा संकट

हॉर्मुज जलडमरूमध्य कोई आम रास्ता नहीं है. दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है. सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि गैस, फर्टिलाइजर और कई जरूरी सामानों के लिए यह दुनिया की लाइफलाइन है. लेकिन ईरान की तरफ से जहाजों पर हमले की धमकियों ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया है.

ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है. इसी डर की वजह से शिपिंग कंपनियों ने अपने हाथ खींच लिए हैं. जब सप्लाई रुकती है, तो डिमांड बढ़ती है और यही कारण है कि आज ग्लोबल मार्केट में ईंधन की कीमतें बेकाबू हो रही हैं. ट्रंप सरकार का यह रीइंश्योरेंस प्लान इसी सप्लाई चेन को फिर से जोड़ने की एक कोशिश है.

सेना और बीमा कंपनियों के बीच तालमेल

यह सिर्फ कागजी योजना नहीं है. DFC और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इस प्लान को जमीन पर उतारने के लिए अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. यानी एक तरफ पैसे की सुरक्षा है, तो दूसरी तरफ सेना की रणनीति. DFC ने यह भी बताया कि उन्होंने इस काम के लिए बेहतरीन अमेरिकी इंश्योरेंस पार्टनर्स की पहचान कर ली है.

प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियां भी इस सरकारी पहल में दिलचस्पी दिखा रही हैं. लॉयड्स मार्केट एसोसिएशन और ब्रोकर आर्थर जे. गैलाघेर एंड कंपनी जैसे बड़े नामों का कहना है कि लंदन का इंश्योरेंस मार्केट हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को कवर देने के लिए तैयार है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोग्राम का ढांचा इंश्योरेंस कंपनियों के साथ लंबी बातचीत के बाद ही तैयार किया गया है.

क्या सिर्फ पैसा काफी होगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 20 अरब डॉलर का यह बीमा जहाजों को वापस समुद्र में ले आएगा? प्राइवेट कंपनियां पहले भी प्रीमियम ऑफर कर रही थीं, लेकिन शिपिंग मालिक तैयार नहीं हुए. उनका कहना है कि असल समस्या सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि चालक दल (crew) की सुरक्षा है. कोई भी मालिक अपने कर्मचारियों को जानबूझकर युद्ध क्षेत्र में नहीं भेजना चाहता.

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी इस पर अपनी राय दी है. उन्होंने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि खाड़ी में अमेरिकी नौसेना के सुरक्षा एस्कॉर्ट (Naval Escorts) की जरूरत पड़ेगी या नहीं. हालांकि ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिकी सेना जहाजों को सुरक्षा घेरे में लेकर चल सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसी किसी योजना का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.

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