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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई.
दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी जगह है, जहां से गुजरने वाले जहाजों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है. इसे 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' कहते हैं. ताजा खबर यह है कि ईरान ने इस रास्ते को अमेरिका, इजरायल और उनके साथियों के लिए पूरी तरह बंद करने का एलान कर दिया है.
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने दो टूक कह दिया है कि जो देश ईरान पर हमला कर रहे हैं, उनके टैंकर अब यहां से नहीं निकल पाएंगे. यह फैसला तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खार्ग आइलैंड पर हमले की बात कबूल कर ली है. आखिर इस रास्ते के बंद होने से क्या होगा और क्यों ईरान इतना बड़ा कदम उठा रहा है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं.
शनिवार 14 मार्च को एक इंटरव्यू के दौरान अब्बास अरागची ने दुनिया को अपनी मंशा साफ कर दी. उन्होंने कहा कि होर्मुज की जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुली है, लेकिन सबके लिए नहीं. यह रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो हमारे दुश्मनों के हैं. अरागची ने सीधा नाम लेते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल के जहाज अब यहां से नहीं गुजर सकते. उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग ईरान पर हमला कर रहे हैं, उन्हें इस रास्ते का इस्तेमाल करने का कोई हक नहीं है. हालांकि, बाकी दुनिया के देशों के लिए यह रास्ता खुला रहेगा.
इस पूरे विवाद की जड़ में वो हमला है जो हाल ही में ईरान के खार्ग आइलैंड पर हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर खुद इस बात की पुष्टि की है. ट्रंप ने बताया कि उनके निर्देश पर सेंट्रल कमांड ने खार्ग आइलैंड पर हमला किया. हालांकि, ट्रंप का दावा है कि उन्होंने ईरान के तेल के ठिकानों को नुकसान नहीं पहुंचाया है. उनके मुताबिक, इस बमबारी में सिर्फ ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया गया. लेकिन ईरान इस दलील को मानने को तैयार नहीं है.
ईरान सिर्फ रास्ता बंद करके चुप बैठने वाला नहीं है. विदेश मंत्री अरागची ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनके एनर्जी ठिकानों पर कोई भी हमला होता है, तो इसका अंजाम बुरा होगा. उन्होंने कहा कि ईरानी सेना पूरे क्षेत्र में उन ठिकानों को निशाना बनाएगी जो अमेरिका से जुड़े हैं. इसमें ऐसी कंपनियां भी शामिल होंगी जिनमें अमेरिका की हिस्सेदारी है. हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि वह अपनी कार्रवाई में सावधानी बरतेगा ताकि आम लोगों वाले इलाकों को नुकसान न पहुंचे.
अब सवाल उठता है कि आखिर इस छोटे से समुद्री रास्ते के लिए इतनी जंग क्यों छिड़ी है? असल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट' है. यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.
तेल का सबसे बड़ा रूट: दुनिया भर में जितना भी कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एक जगह से दूसरी जगह जाती है, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा हर दिन इसी रास्ते से गुजरता है. यह ग्लोबल एनर्जी मार्केट की लाइफलाइन है.
खाड़ी देशों की मजबूरी: सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए पूरी तरह इसी रास्ते पर निर्भर हैं.
भौगोलिक बनावट: यह रास्ता ईरान और ओमान के बीच स्थित है. अपनी सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई सिर्फ 33 किलोमीटर है. जहाजों के निकलने के लिए जो लेन बनी हैं, वे तो इससे भी ज्यादा संकरी हैं.
अगर इस रास्ते में जरा भी हलचल होती है, तो उसका असर आपकी जेब पर पड़ता है. क्योंकि दुनिया का बहुत सारा तेल यहां से निकलता है, इसलिए अगर यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या रास्ता बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. एशिया और यूरोप के कई देश ऐसे हैं जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह इस कॉरिडोर के भरोसे हैं. अगर यह सप्लाई चेन टूटती है, तो पूरी दुनिया में आर्थिक संकट गहरा सकता है.