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पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है, लेकिन शांति की राह आसान नहीं दिख रही है. सोमवार को ईरानी राज्य समाचार एजेंसी (IRNA) ने जानकारी दी कि तेहरान ने अमेरिका के उस युद्धविराम प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया है, जिसे बिचौलियों के जरिए भेजा गया था. ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें 'अत्यधिक मांग वाली' (Excessively Demanding) हैं और वह ईरान की संप्रभुता के खिलाफ हैं. इसके बजाय, ईरान ने अपना खुद का 10-सूत्रीय फॉर्मूला दुनिया के सामने रखा है, जो उनके मुताबिक युद्ध को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है.
ईरान का मानना है कि केवल युद्धविराम से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि इससे दुश्मन को फिर से संगठित होने और हमला करने का मौका मिल सकता है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी बुनियादी चिंताओं को दूर नहीं किया जाता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी. इस कूटनीतिक खींचतान ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है, जहां पहले से ही सैन्य गतिविधियां अपने चरम पर हैं.
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ईरान ने जो 10-सूत्रीय योजना पेश की है, वह न केवल युद्ध को रोकने की बात करती है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय प्रभाव को सुरक्षित करने पर भी केंद्रित है. इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
प्रतिबंधों की समाप्ति: ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से हटाना.
क्षेत्रीय शांति: पूरे क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाना.
होर्मुज की सुरक्षा: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, जिसके लिए ईरान वर्तमान में ओमान के साथ बातचीत कर रहा है.
पुनर्निर्माण: युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बुनियादी ढांचे का विकास.
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव को 'अवास्तविक' मानता है और बातचीत केवल तभी संभव है जब ईरान की तरफ से औपचारिक रूप से तैयार की गई इन मांगों को स्वीकार किया जाए.
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इस कूटनीतिक विवाद में एक नया और गंभीर मोड़ 'इस्फहान' में हुए अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन से आया है. रविवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर घुसकर एक पायलट को बचाया है, जिसका F-15 विमान पिछले हफ्ते मार गिराया गया था. हालांकि, ईरान ने इस ऑपरेशन को लेकर एक सनसनीखेज आशंका जताई है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस 'पायलट रेस्क्यू' के नाम पर अमेरिका ने कोई गुप्त ऑपरेशन (Deceptive Operation) चलाया हो सकता है, जिसका असली मकसद ईरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को जब्त करना या परमाणु केंद्रों को नुकसान पहुंचाना था. ईरान का कहना है कि वह इस संभावना को नजरअंदाज नहीं कर सकता कि बचाव कार्य केवल एक दिखावा था.
ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावों की यह जंग यह दिखाती है कि दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं हैं. जहां अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने और युद्धविराम के लिए दबाव बना रहा है, वहीं ईरान इसे अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के अवसर के रूप में देख रहा है. इस्फहान ऑपरेशन और परमाणु संवर्धन से जुड़े संदेहों ने विश्वास की कमी को और बढ़ा दिया है. आने वाले दिनों में ओमान के साथ होने वाली वार्ता यह तय करेगी कि क्या समुद्री रास्तों पर तनाव कम होगा या यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो जाएगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 ईरान ने अमेरिका का प्रस्ताव क्यों ठुकराया?
ईरान का मानना है कि अमेरिका की 15 शर्तें 'अत्यधिक मांग वाली' और ईरान के हितों के खिलाफ हैं.
Q2 ईरान के 10-सूत्रीय प्लान में मुख्य मांग क्या है?
मुख्य मांगों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है.
Q3 इस्फहान रेस्क्यू ऑपरेशन पर ईरान को क्या शक है?
ईरान को संदेह है कि अमेरिका ने पायलट बचाने के बहाने उसके यूरेनियम भंडार को निशाना बनाने की कोशिश की है.
Q4 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए ईरान किससे बात कर रहा है?
जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ईरान वर्तमान में ओमान के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रहा है.
Q5 अमेरिका की 15-सूत्रीय योजना का क्या उद्देश्य था?
अमेरिका का उद्देश्य युद्धविराम करना और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खुलवाना था.