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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने पड़ोसियों पर हमले को लेकर कही बड़ी बात. (Image Source- X)
पश्चिम एशिया की जंग अब उस मोड़ पर आ खड़ी हुई है जहां धमकियां और बारूद दोनों चरम पर हैं. शनिवार को जब इस भीषण संघर्ष का सातवां दिन था, तब ईरान की ओर से दो बड़े संदेश आए. पहला संदेश नरमी भरा था, जो उसके पड़ोसी खाड़ी देशों के लिए था. लेकिन दूसरा संदेश बेहद सख्त था, जो सीधे अमेरिका और इजराइल की दहलीज पर जाकर गिरा है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान (Iranian President Masoud Pezeshkian) ने साफ कर दिया है कि दुनिया चाहे कितनी भी ताकत लगा ले, ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण (Unconditional Surrender) कभी नहीं करेगा. उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग हमें झुकते हुए देखने की हसरत पाले बैठे हैं, वे अपना यह सपना अपनी कब्र में साथ लेकर जाएंगे.
टेलीविजन पर देश को संबोधित करते हुए पेजेशक्यान एक अलग अंदाज में नजर आए. उन्होंने खाड़ी के पड़ोसी देशों से अपनी पिछली कार्रवाइयों के लिए माफी मांगी. उन्होंने कहा कि ईरान की लीडरशिप काउंसिल ने यह बड़ा फैसला लिया है कि अब किसी भी पड़ोसी मुल्क पर हमला नहीं किया जाएगा.
ईरान का कहना है कि उनका मकसद किसी देश पर कब्जा करना नहीं है. उन्होंने भरोसा दिया कि जब तक किसी पड़ोसी देश की धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होगा, तब तक वहां एक भी मिसाइल नहीं दागी जाएगी. यह कदम इस क्षेत्र में ईरान को अलग-थलग होने से बचाने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है.
ईरान की यह तल्खी दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने 'MIGA' यानी "मेक ईरान ग्रेट अगेन" का नारा उछाला है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि ईरान के साथ तब तक कोई समझौता नहीं होगा, जब तक वह पूरी तरह सरेंडर न कर दे.
इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी इच्छा जताई कि वे खुद ईरान के अगले सुप्रीम लीडर का चुनाव करने में भूमिका निभाना चाहते हैं. उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि वे ईरान को आर्थिक रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाएंगे, लेकिन शर्त वही है- पूरी तरह समर्पण और नया नेतृत्व. ट्रंप के इसी बयान ने आग में घी डालने का काम किया है.
बयानों के बीच युद्ध के मैदान में भी सन्नाटा नहीं है. शुक्रवार की रात इजराइली वायुसेना ने तेहरान और मध्य ईरान में जबरदस्त हवाई हमले किए. आईडीएफ (IDF) के मुताबिक, करीब 80 फाइटर जेट्स ने ईरान पर 230 बम बरसाए.
इन हमलों का मुख्य निशाना ईरान की जमीन के नीचे बनी बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्री और एक मिलिट्री एकेडमी थी. इजराइल का दावा है कि उन्होंने उन ठिकानों को तबाह कर दिया है जहां से ईरान की आतंकी सरकार की मिसाइलें तैयार होती थीं.
दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) भी पीछे नहीं हटी. उन्होंने शुक्रवार रात 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 23वीं लहर शुरू करने का एलान किया. ईरान का दावा है कि उन्होंने नए जमाने के मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करके इजराइल के कब्जे वाले इलाकों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है.
मौजूदा हालात को देखकर लगता है कि कूटनीति का रास्ता फिलहाल बंद हो चुका है. एक तरफ ट्रंप बिना शर्त हार की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान अपनी आखिरी सांस तक लड़ने की बात कह रहा है.
पिछले हफ्ते अमेरिकी-इजराइली हमले में आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद से ईरान का नेतृत्व काफी दबाव में है, लेकिन वे इसे अपनी कमजोरी के बजाय अपनी ताकत की तरह पेश करने की कोशिश कर रहे हैं.