ईरान, इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही जंग के कारण दुनिया एक गंभीर एनर्जी संकट की दहलीज पर खड़ी है. इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने सोमवार को एक बड़ा बयान दिया है, जिससे संकेत मिला है कि यदि यूरोपीय देश चाहें, तो रूस उनके साथ ऊर्जा के क्षेत्र में लंबे वक्त के सहयोग फिर से शुरू करने के लिए तैयार है. रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी अधिकारियों और तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक टीवी बैठक में पुतिन ने चेतावनी दी है कि मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण ग्लोबल इकोनॉमी पर गंभीर असर पड़ सकती है. वहीं, अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रूसी तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंध को वह हटा सकता है.
युद्ध के कारण बंद हुआ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज
रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और LNG गुजरता है, युद्ध के कारण यह प्रभावी तौर पर बंद हो गया है.
Add Zee Business as a Preferred Source
तेल प्रोडक्शन रुकने का जोखिम
- राष्ट्रपति पुतिन के मुताबिक, "हॉर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर तेल प्रोडक्शन अगले एक महीने के अंदर पूरी तरह से रुकने का जोखिम है."
- पुतिन के मुताबिक प्रोडक्शन में गिरावट शुरू हो चुकी है और क्षेत्र के भंडारण केंद्र उस तेल से भर रहे ट्रांसपोर्ट करना बेहद कठिन और महंगा हो गया है.
- सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं हैं, जो 2022 के उच्चतम स्तर है.
- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पुतिन ने रूसी तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे मिडिल ईस्ट के इस संकट का फायदा उठाएं.
- रूसी के फेडरल बजट का 25 फीसदी यानी एक चौथाई हिस्सा तेल और गैस रेवेन्यू से आता है.
यूरोपीय कस्टमर्स के साथ काम करने को तैयार रूस
व्लादमीर पुतिन ने साफ किया है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक और सबसे बड़े नेचुरल गैस भंडार वाला देश, रूस, यूरोपीय कस्टमर्स के साथ फिर से काम करने को तैयार है.
रूस-यूक्रेन युद्ध से घटा आयात
- पुतिन के मुताबिक, "हम यूरोप के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. लेकिन हमें उनसे कुछ ऐसे संकेत चाहिए कि वह हमारे साथ काम करने के लिए तैयार और इच्छुक हैं, और वे इस स्थिरता को सुनिश्चित करेंगे."
- रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपियन यूनियन (EU) और G7 के बैन के कारण वेस्टर्न देशों ने पिछले चार साल में रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता काफी कम कर दी है.
- यूरोपियन मार्केट छिन जाने से रूस को अपना तेल और गैस भारी छूट पर एशियाई देशों को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
- यूक्रेन युद्ध से पहले, यूरोप अपनी जरूरत की 40 फीसदी से ज्यादा गैस रूस से खरीदता था. लेकिन 2025 में यूरोपियन यूनियल के कुल इंपोर्ट में रूसी पाइपलाइन गैस और LNG की संयुक्ति हिस्सेदारी महज 13 फीसदी रह गई है.
G7 देशों की हुई बैठक
ग्लोबल तेल की कीमतों में इस उछाल के जवाब में, G7 देशों ने सोमवार को कहा है कि वह "जरूरी उपाय" लागू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने अपनी इमरजेंसी रिजर्व को जारी करने की फिलहाल कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है. दूसरी तरफ, पिछले सप्ताह पुतिन ने रूसी सरकार को निर्देश दिया था कि यूरोपीय यूनियन द्वारा रूसी फॉसिल फ्यूल पर पूरी तरह से बैन लागू करने से पहले, बचे हुए रूसी तेल और गैस फ्लो को यूरोप से दूर मोड़ने पर विचार किया जाए.
Zee Business Live TV यहां पर देखें