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ट्रंप का USTR भारत के लिए क्यों बना टेंशन की वजह? प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारत और अमेरिका के बीच इस समय ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है. दोनों देशों के अधिकारी नई दिल्ली में बैठकर प्रस्तावित ट्रेड एग्रीमेंट के पहले चरण को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच अमेरिका की ट्रेड एजेंसी USTR (United States Trade Representative) की एक रिपोर्ट ने नया सवाल खड़ा कर दिया है.
रिपोर्ट में भारत का नाम उन देशों की लिस्ट में शामिल किया गया है, जिनके बारे में अमेरिका का कहना है कि वहां कथित तौर पर ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिन्हें जबरन मजदूरी यानी Forced Labour से तैयार किया गया माना जाता है.
इसी रिपोर्ट के आधार पर USTR ने कुछ देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है. इस खबर के सामने आने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या भारत से अमेरिका जाने वाला सामान महंगा हो सकता है और क्या इसका असर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पड़ सकता है. हालांकि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अभी यह कोई अंतिम फैसला नहीं है. फिलहाल USTR ने अपनी जांच के नतीजे जारी किए हैं और उसके आधार पर कुछ सुझाव दिए हैं.
अमेरिका की ट्रेड एजेंसी USTR ने Section 301 के तहत 60 जांच पूरी की हैं. एजेंसी का कहना है कि उसने कई देशों की नीतियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की. इस जांच के बाद USTR ने कहा कि 54 देशों में ऐसे सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिन्हें Forced Labour से बनाया गया माना जाता है. भारत का नाम भी इसी लिस्ट में शामिल है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ देशों ने ऐसे सामान पर रोक लगाने के लिए नियम बनाए हैं या ऐसे नियम लागू करने की प्रतिबद्धता दिखाई है. ऐसे देशों के लिए 10% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है.
वहीं जिन देशों को इन मानकों पर खरा नहीं माना गया है, उनके लिए 12.5% अतिरिक्त शुल्क का सुझाव दिया गया है. फिलहाल एजेंसी ने केवल अपनी सिफारिशें और निष्कर्ष सार्वजनिक किए हैं. इन प्रस्तावों को लागू करने को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है.
आसान भाषा में समझें तो टैरिफ एक तरह का आयात शुल्क या टैक्स होता है. मान लीजिए भारत की कोई कंपनी अपना सामान अमेरिका में बेचती है. अगर अमेरिका उस सामान पर अतिरिक्त टैरिफ लगा देता है तो उस उत्पाद की कीमत बढ़ सकती है.
यही वजह है कि दुनिया के देश टैरिफ को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं. टैरिफ बढ़ने या घटने का सीधा असर व्यापार की लागत और प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है. इसी कारण जब भी अमेरिका, चीन, भारत या यूरोपीय देशों के बीच टैरिफ को लेकर कोई खबर आती है तो उस पर पूरी दुनिया की नजर रहती है.
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा Section 301 की हो रही है. Section 301 अमेरिका के Trade Act 1974 का हिस्सा है. यह अमेरिकी सरकार को यह अधिकार देता है कि वह दूसरे देशों की व्यापार नीतियों और नियमों की जांच कर सके.
अगर अमेरिका को लगता है कि किसी देश की नीति उसके व्यापारिक हितों के खिलाफ है या अमेरिकी कारोबार को नुकसान पहुंचा सकती है, तो वह जांच शुरू कर सकता है. जांच पूरी होने के बाद अमेरिका कई तरह के कदम उठा सकता है.
इनमें शामिल हो सकते हैं-
यानी Section 301 अमेरिका के लिए एक ऐसा कानूनी रास्ता है, जिसके जरिए वह दूसरे देशों की व्यापार नीतियों पर प्रतिक्रिया दे सकता है.
USTR का कहना है कि भारत उन देशों में शामिल है जहां कथित तौर पर Forced Labour से बने सामान के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
यही वजह है कि भारत का नाम 54 अर्थव्यवस्थाओं की उस लिस्ट में शामिल किया गया है, जिनके खिलाफ यह निष्कर्ष निकाला गया. हालांकि रिपोर्ट में सिर्फ भारत का नाम नहीं है. कई बड़े और विकसित देश भी इस लिस्ट में शामिल हैं.
भारत के अलावा इस लिस्ट में दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं.
इनमें प्रमुख नाम हैं-
इससे साफ है कि यह मामला केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका ने कई देशों को लेकर समान चिंता जताई है.
फिलहाल ऐसा नहीं है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी USTR ने केवल जांच के नतीजे और अपने प्रस्ताव जारी किए हैं. रिपोर्ट में अतिरिक्त टैरिफ की सिफारिश की गई है, लेकिन इसे लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है. यानी अभी यह कहना गलत होगा कि भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर तुरंत 12.5% अतिरिक्त शुल्क लग जाएगा. अभी आगे की प्रक्रिया और अमेरिकी प्रशासन के फैसलों का इंतजार करना होगा.
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा था कि प्रस्तावित Bilateral Trade Agreement (BTA) का अधिकांश काम पूरा हो चुका है. उनके मुताबिक समझौते के ज्यादातर हिस्सों पर सहमति बन चुकी है और अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा चल रही है. भारत और अमेरिका पिछले करीब 15 महीनों से इस समझौते पर काम कर रहे हैं. दोनों देशों की कोशिश है कि व्यापार को आसान बनाया जाए और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाया जाए.
चिंता की वजह यह है कि अमेरिका भविष्य में Section 301 के तहत कदम उठा सकता है. रिपोर्ट में जिन देशों का नाम आया है, उनके लिए अतिरिक्त टैरिफ का सुझाव भी दिया गया है. ऐसे में भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके निर्यातकों को वैश्विक बाजार में नुकसान न हो. भारत की कोशिश है कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बनी रहे. इसी वजह से नई दिल्ली इन जांचों और रिपोर्टों पर करीब से नजर बनाए हुए है.
भारत ने Section 301 से जुड़ी जांचों को लेकर अपनी चिंताएं अमेरिका के सामने रखी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दो अलग-अलग जांचें चल रही हैं. एक जांच कुछ उद्योगों में कथित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से जुड़ी है. इसमें सोलर मॉड्यूल, प्रोसेस्ड फूड, स्टील और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर शामिल बताए गए हैं. दूसरी जांच Forced Labour से जुड़े आयात के मुद्दे पर केंद्रित है. भारत का मानना है कि इन मामलों में उसकी बात और हितों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.
USTR के मुताबिक अगर कुछ देश ऐसे सामान के आयात को रोकने में प्रभावी कदम नहीं उठाते, तो इससे अमेरिकी कंपनियों और कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित हो सकता है.
अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा इस मुद्दे पर पर्याप्त कदम नहीं उठाना स्वीकार्य नहीं है. अमेरिका का कहना है कि वह अपनी जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे आवश्यक व्यापारिक कदमों पर विचार करेगा.
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. एक तरफ USTR की रिपोर्ट और Section 301 की जांचें हैं, तो दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत भी जारी है.
दोनों देशों के बीच समझौते का बड़ा हिस्सा तय हो चुका बताया जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रेड डील किस दिशा में आगे बढ़ती है और USTR की सिफारिशों पर अमेरिकी प्रशासन क्या फैसला लेता है.
अभी के लिए इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह मामला भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में इससे जुड़ी हर नई जानकारी पर बाजार, कारोबार जगत और नीति निर्माताओं की नजर बनी रहेगी.