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India America Tariff War: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला 1 अगस्त से लागू होगा. ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध के बीच भारत द्वारा रूस से हथियार और ऊर्जा खरीद जारी रखने की आलोचना की. ये पहली बार नहीं है जब अमेरिका की तरफ से भारत को आर्थिक झटका देने की कोशिश की गई है. साल 1998 में भारत द्वारा पोखरण में परमाणु बम की सफल परीक्षण के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भारत पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. हालांकि, तब भी भारत ने इस प्रतिबंधों का डटकर सामना किया था.
साल 1998 में तत्काली पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने सफल पमाणु परीक्षण किया किया था. इसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट की धारा 102 के तहत भारत को दी जाने वाली सभी तरह की आर्थिक और विकास सहायता बंद कर दी थी. इसमें लगभग 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक विकास सहायता और हाउसिंग गारंटी अथॉरिटी शामिल थी. इसके अलावा भारत के हथियारों की बिक्री और सैन्य सेवाओं की सप्लाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई. इसके अलावा पहले से स्वीकृत डिफेंस सौदों को भी निलंबित कर दिया था.
अमेरिका ने वर्ल्ड बैंक और IMF जैसे इंटरनेशनल वित्तीय संस्थानों के द्वारा भारत को दिए जाने वाले लोन का विरोध किया था. इससे भारत के लगभग 1.17 बिलियन डॉलर के लोन को स्थगित कर दिया था. इसके अलावा अमेरिकी बैंकों को भारत सरकार को किसी भी तरह से लोन या क्रेडिट देने से बैन कर दिया था. अमेरिका ने यूएस EXIM और ओवरसीज प्राइवेट इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (OPIC) जैसी अमेरिकी सरकारी संस्थाओं द्वारा नई क्रेडिट गारंटी पर रोक लगा दी गई. अनुमान के मुताबिक EXIM के लगभग 500 मिलियन डॉलर के सौदे प्रभावित हुए. इसके अलावा संवेदनशील अमेरिकी टेक्नोलॉजी और उपकरणों के एक्सपोर्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे.
अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय रुपए के मूल्य में गिरावट आई थी. इसके अलावा महंगाई में बढ़ोतरी हुई थी. इन सभी के बावजूद पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने साफ किया था कि परमाणु परीक्षण देश की सुरक्षा के लिए काफी जरूरी है. भारत किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा. वहीं, पर्दे के पीछे भारत ने अमेरिका के साथ गहन कूटनीति बातचीत की थी. तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह और अमेरिका के विदेश मंत्री स्ट्रोब टालबोट के साथ कई दौर की बातचीत हुई. इसने दोनों देश के बीच गलतफहमियों को दूर करने में मदद की.
भारत के तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा द्वारा प्रस्तावित बजट में बुनियादी ढांचे, खासतौर से प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया था. इसके अलावा सरकार ने NRI के लिए रिसर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स जैसी योजनाओं के जरिए से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाई थी, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ था. इसके अलावा भारत ने अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया और कई देश अमेरिका के कठोर प्रतिबंधों के पक्ष में नहीं थे.
प्रतिबंध लागू होने के कुछ महीने बाद ही नवंबर 1998 में क्लिंटन प्रशासन ने एग्रिकल्चर प्रोडक्ट से संबंधित कुछ प्रतिबंधों में ढील दे दी. वहीं, साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत का सपोर्ट किया था. सितंबर 2001 में राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने भारत पर लगे सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा दिया था.