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International Monetary Fund (IMF) ने Pakistan को लेकर एक कड़ी चेतावनी दी है. फंड की लेटेस्ट Governance and Corruption Diagnostic Report में कहा गया है कि देश में करप्शन से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं. और इसकी सबसे बड़ी वजह है कमजोर अकाउंटेबिलिटी, लंबे न्यायिक प्रोसेस और सबसे अहम, पॉलिटिकल इंटरफेरेंस. यह रिपोर्ट 19 नवंबर को Pakistan के Ministry of Finance द्वारा सार्वजनिक की गई.
IMF ने साफ कहा है कि Pakistan के कई सेक्टर्स में करप्शन और मनी लॉन्ड्रिंग का रिस्क काफी हाई है. इनमें banking, real estate, construction, public procurement और politically exposed persons (PEPs) से जुड़े काम सबसे ऊपर हैं. रिपोर्ट के अनुसार, करप्शन के पैसों को अक्सर shell companies, कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर के गलत इस्तेमाल और informal money transfer systems के जरिए छुपाया जाता है. IMF का कहना है कि ऐसे तरीकों ने मनी लॉन्ड्रिंग चेन को इतना मजबूत बना दिया है कि उसे पकड़ना या ट्रेस करना मुश्किल होता जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, Pakistan की judicial system में मौजूद कमजोरियां AML (Anti-Money Laundering) प्रोग्राम को कमजोर बना रही हैं. लंबी ट्रायल प्रोसेस, केसों का लंबा pending रहना और बहुत कम conviction rate की वजह से कई मामलों में कार्रवाई का असर ही दिखता नहीं है. IMF के मुताबिक, जब केसों का end result ही नहीं आता, तो सिस्टम का डर भी खत्म हो जाता है और करप्शन में शामिल लोग बेखौफ होकर काम करते रहते हैं.
IMF की रिपोर्ट का एक दिलचस्प पहलू यह है कि Pakistan की नई young population करप्शन को लेकर अब पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो चुकी है. 247 मिलियन की आबादी में 60% से ज्यादा लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. ये लोग urban areas में रहते हैं, सोशल मीडिया पर काफी active हैं और अब करप्शन के खिलाफ ज्यादा आवाज उठा रहे हैं.
यही वजह है कि politicians भी अब पब्लिक mood को समझते हुए करप्शन जैसे sensitive मुद्दों पर बात करना शुरू कर रहे हैं. Financial sector oversight में सुधार, लेकिन selective enforcement की समस्या बरकरार
Pakistan ने IMF को जानकारी दी कि उसने financial sector oversight को मजबूत करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं. इसमें banks की targeted inspections और PEPs की onboarding के दौरान AML नियमों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है. 2023–24 में 17 बैंकों पर कुल Rs 944 million के penalties भी लगाए गए.
लेकिन IMF का कहना है कि असली समस्या selective enforcement की है. यानी जहां political connection मजबूत होता है, वहां मामले आगे बढ़ ही नहीं पाते. और यही selective accountability पूरे AML सिस्टम की credibility पर सवाल उठाती है.
IMF ने National Accountability Bureau (NAB) के कामकाज पर भी गंभीर सवाल उठाए. रिपोर्ट के अनुसार, NAB को किसी भी corruption-linked money laundering complaint पर formal inquiry शुरू करने में ही करीब चार महीने लग जाते हैं. वो भी सिर्फ administrative vetting के कारण. कई शिकायतें तो ऐसी होती हैं जो कभी आगे बढ़ती ही नहीं.
Federal Board of Revenue (FBR) के पास Designated Non-Financial Businesses and Professions (DNFBPs) की निगरानी की जिम्मेदारी है. लेकिन entities की संख्या इतनी ज्यादा है और स्टाफ इतना कम कि inspections प्रभावी तरीके से हो ही नहीं पाते.
IMF ने कहा है कि Pakistan के key institutions detailed statistics पब्लिश नहीं करते, जैसे suspicious transactions, investigations, inspections या sanctions. इससे transparency पर सवाल उठते हैं और यह शक भी बढ़ता है कि कहीं मामलों को selective तरीके से तो नहीं देखा जा रहा.
खबर से जुड़े FAQs
1. IMF ने Pakistan को किस मुद्दे पर चेतावनी दी?
IMF ने Pakistan में बढ़ते करप्शन-linked money laundering risks पर चेतावनी दी है.
2. कौन से सेक्टर्स को IMF ने high-risk बताया?
Banking, real estate, construction, public procurement और PEPs से जुड़े सेक्टर्स.
3. Pakistan में AML enforcement कमजोर क्यों है?
Judicial delays, कम conviction rate और political interference की वजह से.
4. NAB की biggest समस्या क्या बताई गई?
Formal inquiry शुरू करने में चार महीने लग जाते हैं और कई complaints आगे नहीं बढ़तीं.
5. IMF ने financial oversight पर क्या कहा?
Pakistan ने penalties और inspections बढ़ाई हैं, लेकिन selective enforcement अभी भी बड़ी चिंता है.