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डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु बम नहीं होना चाहिए.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट डाली है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है. ट्रंप ने साफ कर दिया कि किसी ने उन्हें ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए उकसाया नहीं है, बल्कि 7 अक्टूबर (इजराइल पर हमास का हमला) के परिणामों ने उनके उस विचार को और पुख्ता कर दिया है कि "ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए."
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की मीडिया और सर्वे एजेंसियां अमेरिका के राजनीतिक भविष्य और विदेशी नीतियों पर अलग-अलग राय दे रही हैं. ट्रंप ने इन सभी को 'फेक न्यूज' बताते हुए कहा कि वे मीडिया के पंडितों और उनके द्वारा दिखाए जाने वाले पोल पर जरा भी यकीन नहीं करते. उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों को 'धांधली' (Rigged) बताया और ईरान में सत्ता परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया.
7 अक्टूबर 2023 को हमास (Hamas) नाम के संगठन ने इजराइल पर एक बहुत बड़ा हमला किया था. हमास को ईरान का समर्थन हासिल है. इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसकी तारीफ की थी और इसे फिलिस्तीन के संघर्ष के लिए एक 'बड़ा मोड़' बताया था. हालांकि, ईरान ने इस बात से साफ इनकार किया कि इस हमले की प्लानिंग में उसका सीधा हाथ था. इस हमले के बाद इन संगठनों ने इजराइल पर और भी कई हमले किए, जिससे पूरे इलाके में युद्ध और तनाव काफी बढ़ गया है.
ट्रंप की यह पोस्ट केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी पूरी राजनीतिक विचारधारा और मीडिया के प्रति उनके गुस्से को दिखाती है.
1. परमाणु हथियार: "कभी नहीं मतलब कभी नहीं"
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि इजराइल ने उन्हें ईरान के साथ युद्ध के लिए राजी नहीं किया है, बल्कि 7 अक्टूबर की घटना ने उनके मन में यह बात बैठा दी है कि ईरान को परमाणु ताकत बनने से हर हाल में रोकना होगा. ट्रंप इसे अपनी जिंदगी भर की राय बताते हैं. वे इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानते हैं.
2. मीडिया और चुनावों पर कड़ा प्रहार
ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा, "मैं फेक न्यूज पंडितों और पोल को पूरी तरह से अविश्वास के साथ देखता हूं. वे जो कहते हैं उसका 90% झूठ और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं." उन्होंने आगे वेनेजुएला के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जिस तरह 2020 का अमेरिकी चुनाव धांधली भरा था, वैसे ही परिणाम वेनेजुएला में भी रहे, लेकिन मीडिया इस पर बात करना पसंद नहीं करता.
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3. ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' का संकेत
ट्रंप ने ईरान के भविष्य को लेकर एक बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि ईरान के परिणाम "अद्भुत" होंगे. ट्रंप ने ईरान में 'रिजीम चेंज' (Regime Change) यानी सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करते हुए कहा कि अगर ईरान के नए नेता 'स्मार्ट' हुए, तो ईरान का भविष्य बहुत महान और समृद्ध हो सकता है. यह बयान स्पष्ट करता है कि ट्रंप ईरान के वर्तमान नेतृत्व को हटाने के पक्ष में हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की यह पोस्ट उनके आक्रामक रुख को फिर से उजागर करती है. उन्होंने एक तरफ परमाणु हथियारों के मुद्दे पर ईरान को घेरा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया की साख पर सवाल उठाए हैं. ट्रंप का यह संदेश न केवल उनके समर्थकों के लिए है, बल्कि ईरान के नेतृत्व और वैश्विक समुदाय के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है कि यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो ईरान के प्रति उनकी नीतियां पहले से भी ज्यादा सख्त हो सकती हैं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 ट्रंप ने 7 अक्टूबर की घटना का जिक्र क्यों किया?
ट्रंप का मानना है कि इस हमले के बाद यह साफ हो गया है कि ईरान समर्थित ताकतों का खतरा बढ़ रहा है, इसलिए ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है.
Q2 ट्रंप ने 'फेक न्यूज' किसे कहा है?
ट्रंप अक्सर मुख्यधारा की अमेरिकी मीडिया और उन सर्वे एजेंसियों को 'फेक न्यूज' कहते हैं जो उनके खिलाफ खबरें या पोल दिखाती हैं.
Q3 क्या ट्रंप ईरान के साथ युद्ध चाहते हैं?
अपनी पोस्ट में ट्रंप ने युद्ध की बात नहीं की है, लेकिन उन्होंने परमाणु हथियारों को रोकने और सत्ता परिवर्तन की बात जरूर कही है.
Q4 वेनेजुएला और 2020 चुनाव का आपस में क्या संबंध है?
ट्रंप का आरोप है कि इन दोनों ही जगहों पर चुनाव निष्पक्ष नहीं हुए और मीडिया ने इन गड़बड़ियों को दबाने की कोशिश की.
Q5 'रिजीम चेंज' से ट्रंप का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है वर्तमान सरकार को हटाकर नए नेतृत्व को सत्ता में लाना, जिसे ट्रंप ईरान की समृद्धि के लिए जरूरी मानते हैं.