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ट्रंप की चेतावनी... कहा- 'फर्जी समझौता पत्रों' से सावधान.
पूरी दुनिया इस वक्त टकटकी लगाए पश्चिम एशिया की ओर देख रही है, जहां युद्ध के बादलों के बीच शांति की एक उम्मीद जगी है. लेकिन इस नाजुक मोड़ पर भी 'फर्जीवाड़े' का साया मंडराने लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उन तमाम चिट्ठियों और तथाकथित समझौतों को लेकर एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की है, जो अमेरिका-ईरान बातचीत के नाम पर बाजार में तैर रहे हैं. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया या खबरों में जो दिख रहा है, वो हमेशा सच नहीं होता.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए उन लोगों पर निशाना साधा जो खुद को इस बातचीत का हिस्सा बता रहे हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में केवल वही बिंदु मायने रखते हैं, जिन्हें अमेरिका ने स्वीकार किया है और इन पर चर्चा केवल बंद कमरों में ही की जाएगी.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कई तरह के समझौते, लिस्ट और लेटर ऐसे लोगों द्वारा भेजे जा रहे हैं जिनका अमेरिका और ईरान की बातचीत से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने इन लोगों को 'पूरी तरह से धोखेबाज' और 'पाखंडी' करार दिया. ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग हैं, इसकी जांच फेडरल इन्वेस्टिगेशन द्वारा की जा रही है और बहुत जल्द इन चेहरों को बेनकाब कर दिया जाएगा.

ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने न्यूज़ चैनल CNN को भी आड़े हाथों लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि 'फेक न्यूज़' फैलाने वाला यह चैनल ऐसे सूत्रों के हवाले से खबरें चला रहा है जिनके पास कोई अधिकार या ताकत नहीं है. ट्रंप के इस रुख से यह साफ हो गया है कि वे इस पूरी डील की कमान पूरी तरह अपने हाथों में रखना चाहते हैं और किसी भी तरह के बाहरी दखल या गलत सूचना को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
मंगलवार देर रात जिस सीजफायर का ऐलान हुआ, उसकी नींव पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता में रखे गए 10 बिंदुओं पर टिकी है. इस ऐतिहासिक समझौते ने दुनिया को एक बड़ी तबाही से बचा लिया है.
हमलों पर रोक: अमेरिका और इजरायल अगले दो हफ्तों तक ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला नहीं करेंगे.
ट्रेड रूट की बहाली: इसके बदले में ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने पर राजी हो गया है.
डेडलाइन का दबाव: यह समझौता ट्रंप की उस धमकी के ठीक पहले हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर रात 8 बजे तक कोई डील नहीं हुई तो एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है.
भले ही सीजफायर का ऐलान हो चुका है, लेकिन इसे लेकर विरोधाभास भी कम नहीं हैं. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि इस संघर्ष विराम में 'लेबनान और अन्य क्षेत्र' भी शामिल हैं. लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने तुरंत इस दावे को खारिज कर दिया. इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर लेबनान तक विस्तारित नहीं है.
दावों के इस टकराव ने इस डील की मजबूती पर सवाल तो खड़े किए हैं, लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि असली बातचीत उन खास 'प्वॉइंट्स' पर टिकी है जो पर्दे के पीछे तय हुए हैं. ट्रंप के मुताबिक यही वो बिंदु हैं जो इस सीजफायर का असली आधार हैं.
अब सबकी नजरें 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली औपचारिक बातचीत पर टिकी हैं. यहां अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की मध्यस्थता में आमने-सामने बैठेंगे. शहबाज शरीफ के अनुसार, इस बैठक का मकसद सभी विवादों को सुलझाकर एक निर्णायक और अंतिम समझौते तक पहुंचना है.
ट्रंप की चेतावनी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस्लामाबाद में होने वाली यह बैठक काफी गोपनीय और सख्त होगी. दुनिया को तबाही के मुहाने से वापस लाने वाली यह कोशिश सफल होगी या नहीं, यह इन बंद कमरों की चर्चाओं से ही तय होगा. फिलहाल, ट्रंप ने यह संदेश दे दिया है कि फर्जी दावों पर यकीन न करें, क्योंकि असली खिलाड़ी और असली शर्तें अभी सामने आना बाकी हैं.