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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बेबाक और चौंकाने वाले बयानों के चलते अक्सर ही चर्चा में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा पोस्ट किया, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा विशेषज्ञों और तेल निर्यात करने वाले देशों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
ट्रंप ने इस पोस्ट में दावा किया है कि अमेरिका अब तेल के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन चुका है और दुनिया भर से खाली जहाज अमेरिकी तटों की ओर बढ़ रहे हैं.
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डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा कि दुनिया भर से भारी संख्या में खाली तेल टैंकर, जिनमें से कुछ दुनिया के सबसे बड़े टैंकर हैं, इस समय संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर आ रहे हैं. उन्होंने इन जहाजों के आने का कारण बताते हुए कहा कि ये टैंकर अमेरिका के "सबसे अच्छे और सबसे मीठे" (Sweetest) तेल और गैस को लोड करने के लिए आ रहे हैं.
ट्रंप ने आगे एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की अगली दो सबसे बड़ी तेल अर्थव्यवस्थाओं के कुल भंडार से भी ज्यादा तेल है और इसकी गुणवत्ता भी उनसे कहीं बेहतर है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को आमंत्रित करते हुए लिखा, "हम आपका इंतजार कर रहे हैं. काम बहुत जल्दी होगा!".

ट्रंप के इस बयान में "Sweetest Oil" शब्द का प्रयोग तकनीकी रूप से काफी महत्वपूर्ण है. पेट्रोलियम की भाषा में 'स्वीट क्रूड' उस कच्चे तेल को कहा जाता है, जिसमें सल्फर की मात्रा बहुत कम होती है. इस तेल को रिफाइन करना आसान होता है और इससे पेट्रोल व डीजल बनाना सस्ता पड़ता है. ट्रंप का यह दावा कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे अच्छा तेल है, सीधे तौर पर ओपेक (OPEC) देशों और रूस जैसे बड़े तेल उत्पादकों को एक खुली चुनौती की तरह देखा जा रहा है.
इस पोस्ट के समय और लहजे से स्पष्ट है कि ट्रंप अपनी "अमेरिका फर्स्ट" (America First) ऊर्जा नीति को फिर से चर्चा में लाना चाहते हैं. 11 अप्रैल, 2026 की इस तारीख पर ट्रंप का सक्रिय होना और अमेरिकी तेल की प्रचुरता का विज्ञापन करना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी प्रभुत्व को स्थापित करने की एक कोशिश है.
इस तरह के बयानों का असर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी पड़ सकता है. यदि वाकई दुनिया भर के टैंकर अमेरिका का रुख कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वैश्विक मांग का एक बड़ा हिस्सा अब मध्य पूर्व से हटकर अमेरिका की ओर शिफ्ट हो सकता है.
डोनाल्ड ट्रंप का यह पोस्ट अमेरिका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को लेकर उनके पुराने दावों की अगली कड़ी है. जहां वे अमेरिका को "ऊर्जा का पावरहाउस" बता रहे हैं, वहीं दुनिया भर के बाजार अब इन "खाली तेल टैंकरों" की वास्तविक संख्या और अमेरिकी तेल उत्पादन के आंकड़ों पर नजर गड़ाए हुए हैं. यदि ट्रंप का यह "आंदोलन" सफल रहता है, तो आने वाले समय में वैश्विक तेल व्यापार का केंद्र पूरी तरह से बदल सकता है.
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