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अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच बीजिंग ने रविवार को कड़ा संदेश दिया है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Ministry) ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी जिद और आर्थिक दबाव की नीति पर कायम रहता है, तो चीन जवाबी कदम (Corresponding Measures) उठाने में हिचकेगा नहीं.
मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि चीन अपने राष्ट्रीय हितों और वैध अधिकारों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हाल ही में चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव फिर बढ़ गया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि चीन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 100% अतिरिक्त शुल्क (Tariff) लगाया जाएगा. यह फैसला 1 नवंबर 2025 से लागू होगा.
ट्रंप ने इस निर्णय का कारण चीन द्वारा रेयर-अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों को बताया था. उनका कहना था कि चीन का यह कदम “अत्यधिक आक्रामक” है और इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है. इसके जवाब में चीन ने कहा कि अमेरिका बार-बार टैरिफ की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जो “डबल स्टैंडर्ड” का स्पष्ट उदाहरण है.
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने रविवार सुबह अपने बयान में कहा, “अगर अमेरिका अपनी गलत नीतियों पर कायम रहता है, तो चीन उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा. हम अपने अधिकारों और हितों की रक्षा हर संभव तरीके से करेंगे.” इस बयान से यह साफ है कि बीजिंग कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर कड़ा रुख अपनाने की तैयारी में है.
चीन और अमेरिका की इस तनातनी से वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है. अमेरिका द्वारा रेयर-अर्थ मिनरल्स और टेक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाने से इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और ग्रीन टेक्नोलॉजी से जुड़े उत्पादों की लागत बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह टकराव आगे बढ़ता है, तो दुनिया के कई देशों को सप्लाई चेन में रुकावट और कच्चे माल की कीमतों में उछाल का सामना करना पड़ सकता है.
इकनॉमिक एनालिस्ट्स के मुताबिक, चीन का यह बयान सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक संभावित नीति संकेत है. अगर अमेरिका ने अपनी टैरिफ नीति को वापस नहीं लिया, तो चीन अपने निर्यात और निवेश नीतियों में बदलाव कर सकता है- खासकर अमेरिकी कंपनियों के लिए.
अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर 2018 में शुरू हुआ था, जब ट्रंप प्रशासन ने सैकड़ों अरब डॉलर के चीनी उत्पादों पर टैरिफ लगाए थे. हालांकि बाद में दोनों देशों के बीच कुछ समझौते हुए, लेकिन अब स्थिति फिर से उसी दिशा में बढ़ती दिख रही है. इस बार विवाद का केंद्र “रेयर-अर्थ मिनरल्स” हैं- ये वे खनिज हैं जिनकी जरूरत सेमीकंडक्टर, बैटरी और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसी हाई-टेक इंडस्ट्री में होती है.
1. चीन ने अमेरिका को क्या चेतावनी दी है?
अगर अमेरिका ने टैरिफ नीतियां नहीं बदलीं तो चीन जवाबी कार्रवाई करेगा.
2. टैरिफ कब लागू होंगे?
अमेरिका ने कहा है कि 1 नवंबर 2025 से नए टैरिफ लागू होंगे.
3. चीन क्यों नाराज है?
क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने चीन पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाकर उसके निर्यात पर दबाव बनाया है.
4. क्या दोनों देशों की बैठक अभी भी तय है?
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात रद्द कर सकते हैं.
5. क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा?
हां, वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत के बाजारों पर भी असर संभव है.