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चीन लगातार कर रहा चांदी की खरीदारी. (Image Source- AI)
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में इन दिनों एक अजीब सी हलचल मची है. कुछ समय पहले तक चीन की तिजोरियां सोने से भर रही थीं, लेकिन अब उसकी नजरें 'सफेद धातु' यानी चांदी पर टिक गई हैं.
आलम यह है कि चीन पूरी दुनिया के बाजारों से चांदी को अपनी तरफ खींच रहा है. साल 2026 की शुरुआत ने ही यह साफ कर दिया है कि चीन की चांदी की भूख शांत होने वाली नहीं है. वहां के औद्योगिक क्षेत्र और आम निवेशकों ने मिलकर चांदी की मांग को एक ऐसी ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जो पिछले आठ सालों में नहीं देखी गई.
चीनी सीमा शुल्क (Customs) के ताजा आंकड़ों ने बाजार के जानकारों को हैरान कर दिया है. 2026 के पहले दो महीनों में ही चीन ने 790 टन से ज्यादा चांदी का आयात किया है. अगर सिर्फ फरवरी महीने की बात करें, तो चीन ने अकेले इस महीने में करीब 470 टन चांदी खरीदी, जो फरवरी के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी है.
इस भारी डिमांड का नतीजा यह हुआ है कि चीन के घरेलू बाजार में चांदी की कीमतें ग्लोबल मार्केट के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं. चीन के स्टॉक एक्सचेंजों में रखी चांदी का भंडार लगातार कम हो रहा है, जिसकी वजह से वहां के कारोबारी विदेशों से चांदी 'होवर' (खींचना) कर रहे हैं.
इस साल की शुरुआत चांदी के लिए अब तक की सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली रही है. चीन और दुनिया के अन्य हिस्सों में सट्टेबाजी और भारी खरीदारी की वजह से चांदी की कीमतों में करीब 70% की तेजी देखी गई. हालांकि, जनवरी के अंत में कीमतों में कुछ गिरावट जरूर आई, लेकिन आयात के आंकड़े बताते हैं कि चीन की फिजिकल खपत यानी असल मांग अभी भी बहुत मजबूत बनी हुई है.
चीन में चांदी की इस डिमांड के पीछे दो बड़े कारण हैं. पहला कारण है वहां की सोलर इंडस्ट्री. पूरी दुनिया में सोलर पैनल बनाने का सबसे बड़ा हब चीन ही है. सोलर इंडस्ट्री दुनिया की कुल चांदी सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) इस्तेमाल करती है.
1 अप्रैल से चीन में एक्सपोर्ट टैक्स रिबेट (निर्यात कर छूट) हटने वाली है. इस डेडलाइन से पहले सोलर सेल बनाने वाली कंपनियां भारी मात्रा में चांदी का स्टॉक जमा कर रही हैं ताकि वे उत्पादन तेज कर सकें. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोलर कंपनियां इस समय 'गैंगबस्टर्स' की तरह काम कर रही हैं, यानी वे बहुत आक्रामक तरीके से चांदी खरीद रही हैं.
दूसरा बड़ा कारण है चीन का आम निवेशक. चीन में सोने की कीमतें इस साल 5,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास झूल रही हैं, जो आम जनता की पहुंच से बाहर होता जा रहा है. ऐसे में रिटेल इनवेस्टर्स ने चांदी को एक बेहतरीन विकल्प मान लिया है.
आज के समय में चांदी करीब 70 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है. लोगों की मानसिकता बदल गई है, वे अब सोने को बहुत महंगा और चांदी को किफायती निवेश मान रहे हैं. शेनझेन के शुइबेई मार्केट में, जो चीन का सबसे बड़ा बुलियन हब है, वहां 20 ग्राम से लेकर एक किलोग्राम तक के चांदी के बार (Slabs) धड़ल्ले से बिक रहे हैं.
चीन तक चांदी पहुंचाने में हॉन्गकॉन्ग एक बड़े रास्ते (Gateway) के तौर पर काम कर रहा है. ट्रेडर्स 'आर्बिट्रेज' के मौके का फायदा उठा रहे हैं, यानी जहां चांदी सस्ती मिल रही है वहां से खरीदकर चीन में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं. हॉन्गकॉन्ग में चांदी के बड़े बार्स पर बैंक 8 डॉलर प्रति औंस तक का प्रीमियम ले रहे हैं, जबकि आमतौर पर यह लंदन के बेंचमार्क से कम दाम पर मिलते थे.
इतनी भारी डिमांड के बाद भी फिलहाल लंदन का मार्केट स्थिर बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि पिछले साल की कमी के बाद लंदन में चांदी की आवक रिकॉर्ड स्तर पर रही है. साथ ही, दुनियाभर के ईटीएफ (ETF) से करीब 1,900 टन चांदी बाहर आई है, जिससे बाजार में सप्लाई बनी हुई है. लेकिन चिंता की बात यह है कि न्यूयॉर्क से लेकर शंघाई तक के प्रमुख एक्सचेंजों में चांदी का स्टॉक अब अपने लॉन्ग टर्म एवरेज से काफी नीचे चला गया है, जो इस धातु की कमी की ओर इशारा करता है.
Q: चीन ने 2026 की शुरुआत में कितनी चांदी खरीदी है?
A: चीन ने साल 2026 के पहले दो महीनों में कुल 790 टन चांदी का आयात किया है, जिसमें फरवरी में 470 टन की रिकॉर्ड खरीदारी शामिल है.
Q: चीन में चांदी की इतनी मांग अचानक क्यों बढ़ गई?
A: इसके दो मुख्य कारण हैं: पहला, सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियों द्वारा स्टॉक जमा करना और दूसरा, आम निवेशकों का सोने के महंगे होने पर चांदी की तरफ मुड़ना.
Q: सोलर इंडस्ट्री चांदी का कितना उपयोग करती है?
A: सोलर इंडस्ट्री पूरी दुनिया की वार्षिक चांदी सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा यानी 20% इस्तेमाल करती है और इसका बड़ा केंद्र चीन में है.
Q: सोने और चांदी की कीमतों में क्या अंतर चल रहा है?
A: इस साल सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के करीब रहा है, जबकि चांदी 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है, जिससे यह निवेशकों के लिए सस्ता विकल्प बन गई है.
Q: क्या चीन की खरीदारी से वैश्विक स्तर पर चांदी की कमी हो सकती है?
A: वर्तमान में एक्सचेंजों पर चांदी का स्टॉक काफी कम हो रहा है और लॉन्ग टर्म एवरेज से नीचे है, जिससे आने वाले समय में धातु की कमी का खतरा बना हुआ है.