'कंगाल' पाकिस्‍तान को अपनों ही भाइयों ने ठुकराया, बेअसर रही PM इमरान की अपील

नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) की मदद करने से उसके अपनों ने ही नकार दिया है. प्रधानमंत्री (PM) इमरान खान की देश में निवेश करने की दूसरी अपील भी प्रवासी पाकिस्‍तानियों ने ठुकरा दी.
'कंगाल' पाकिस्‍तान को अपनों ही भाइयों ने ठुकराया, बेअसर रही PM इमरान की अपील

प्रधानमंत्री खान ने इसमें निवेश की अपील की थी. (Reuters)

नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) की मदद करने से उसके अपनों ने ही नकार दिया है. प्रधानमंत्री (PM) इमरान खान की देश में निवेश करने की दूसरी अपील भी प्रवासी पाकिस्‍तानियों ने ठुकरा दी. इमरान ने कहा था कि विदेश में बसे हमारे पाकिस्‍तानी साथी देश में निवेश करें. लेकिन इसका खास असर नहीं हुआ. दरअसल, पाकिस्तान सरकार ने प्रवासी बॉन्ड (Bond) जारी कर प्रवासी पाकिस्‍तानियों से इसमें निवेश की अपील की थी लेकिन विदेश में बसे पाकिस्तानियों ने इसमें अब तक महज 2.6 करोड़ डॉलर का ही निवेश किया है.

पाकिस्तान बनाओ सर्टिफिकेट
'एक्सप्रेस न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, गंभीर आर्थिक संकट से देश को कुछ राहत दिलाने के लिए पाकिस्तान सरकार 'पाकिस्तान बनाओ सर्टिफिकेट' के साथ सामने आई थी. इस साल जनवरी में खुद इमरान ने इन्हें जारी किया था. सरकार को उम्मीद थी कि इसके जरिए विदेश में बसे पाकिस्तानियों का निवेश उसे चालू खाते के घाटे से उबारने में मददगार होगा.

ब्रिटेन, कनाडा व अमेरिका में बसे हैं पाकिस्तानी
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री खान ने इसमें निवेश की अपील भी की. उन्हें उम्मीद थी कि ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका में बसे पाकिस्तानियों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी.

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लेकिन, जून तक के आंकड़े बता रहे हैं कि इसका असर नहीं हुआ है. वित्त मंत्रालय और स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान के सूत्रों ने बताया कि विदेश में बसे पाकिस्तानियों में से महज छह सौ ने इस बॉन्ड में कुल जमा 2.6 करोड़ का ही अभी तक निवेश किया है.

स्‍टेट बैंक के पास है यह योजना
प्रधानमंत्री की इस खास योजना को संभाल रहे स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान ने इस बारे में आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा. बैंक प्रवक्ता ने सिर्फ इतना कहा कि प्रवासी बॉन्ड के बारे में कोई जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा ही दी जा सकती है.

कोई खास प्रतिक्रिया नहीं
इससे पहले बीते साल सितंबर में इमरान खान ने विदेश में बसे पाकिस्तानियों से डायमर-भाषा और मोहमंड बांधों में निवेश का आग्रह किया था लेकिन तब भी कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी.