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कसाई के जॉब के लिए मिल रही 73 लाख की सैलरी
अगर किसी नौकरी में सालाना 73 लाख रुपये की सैलरी मिल रही हो, तो कौन उसे हासिल नहीं करना चाहेगा. ऐसा ही कुछ हुआ ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में, जब एक कसाई ने सालाना 1,30,000 डॉलर यानी करीब 73 लाख रुपए की सैलरी पर कसाई की नौकरी का ऐड निकाला.
सबसे बड़ी बात कि इस नौकरी के लिए उसे 140 से ज़्यादा आवेदन मिले. लेकिन हैरानी की बात ये रही कि इन सभी आवेदनों में से एक भी ऑस्ट्रेलिया से नहीं था. सभी अप्लिकेशन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नाइजीरिया और साउथ अमेरिका जैसे देशों से आए थे.
नहीं मिल रहे काबिल लोग
क्लेटन राइट नाम के 66 वर्षीय कसाई, जो कि चौथी पीढ़ी से इस पेशे से जुड़े हैं, ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से बताया कि उन्हें जो आवेदन मिले हैं, उनमें से ज़्यादातर लोग ना तो अंग्रेजी ठीक से जानते हैं और ना ही उन्हें पेशेवर कसाई का कोई अनुभव है. वे बस ऑस्ट्रेलिया में नौकरी की स्पॉन्सरशिप चाहते हैं. क्लेटन कहते हैं कि "मैं किसी ऐसे इंसान को कैसे ट्रेन करूं, जिसने कभी चाकू तक न पकड़ा हो?"
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ऑस्ट्रेलिया में स्किल क्राइसिस
ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते वेतन, सुपरएनुएशन खर्च और महंगाई ने पहले ही व्यवसाय को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वहां के युवा अब ट्रेड स्किल्स जैसे कसाई, प्लंबर या इलेक्ट्रिशियन के काम में रुचि नहीं ले रहे हैं. यही कारण है कि क्लेटन जैसे व्यापारियों को प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है.
2024 की “स्टेट ऑफ स्किल्स रिपोर्ट” के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में 77 फीसदी कंपनियों को उपयुक्त स्टाफ नहीं मिल पा रहा है. 80 फीसदी कंपनियों को कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए वेतन और शर्तें बढ़ानी पड़ी हैं. जबकि, 36 फीसदी ने हायरिंग की समस्याओं के कारण अपने ग्रोथ प्लान टाल दिए और 27 फीसदी कारोबार को प्रतियोगियों के हाथों गंवाना पड़ा है.
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शिक्षा पर भी उठा सवाल
ऑस्ट्रेलिया टुडे से बात करते हुए, क्लेटन राइट ने एजुकेशन सिस्टम पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि पहले स्कूल छोड़ने वाले छात्र सीधे प्लंबर या इलैक्ट्रिशियन जैसे ट्रेड में चले जाते थे. लेकिन अब उन्हें यूनिवर्सिटी भेजा जाता है, जहां वे ऐसे डिग्री कोर्स करते हैं जिनका जीवन में कोई ठोस इस्तेमाल नहीं होता.
वो कहते हैं कि आज एक प्रशिक्षित कसाई अगर हफ्ते में 55 से 60 घंटे काम करे, तो वो 2,000 डॉलर (करीब 1.1 लाख रुपए) भी कमा सकता है. इसलिए अब ज़रूरत है कि स्कूलों में ट्रेड को दोबारा पहचान दी जाए और उसे एक करियर विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाए.
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क्लेटन के अनुसार, कसाई का काम सिर्फ मांस काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सम्मान, कमाई और स्थिरता है. वो कहते हैं, "हम सिर्फ मीट नहीं काट रहे, हम ऑस्ट्रेलिया को खिला रहे हैं." उनकी अपील है कि युवा ट्रेड को अपनाएं और इस फील्ड को फिर से मजबूत बनाएं.