चीन के अरबों डॉलर फंसे, BLA-TTP की दोहरी मार, पाकिस्तान के लिए कैसे सिरदर्द बना बलूचिस्तान

सालों साल से आतंक को पोषित कर रहा पाकिस्तान इन दिनों अपने ही जाल में फंस गया है. बलूचिस्तान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. जानिए क्या है इस पूरे विवाद की जड़.
चीन के अरबों डॉलर फंसे, BLA-TTP की दोहरी मार, पाकिस्तान के लिए कैसे सिरदर्द बना बलूचिस्तान

पाकिस्तान में इन दिनों अंदर के हालात सही नजर नहीं आ रहे हैं. सालों से आतंक को पोषित कर रहा पाकिस्तान अब अपनी ही जाल में फंस गया है. बलूचिस्तान और पाकिस्तान के बीच संघर्ष बढ़ रहा है. बलूचिस्तान ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. पाकिस्तान दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान में आता है. बलूचिस्तान में भारी मात्रा में गैस, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं. इस वजह से बलूचिस्तान चीन की नजरों में है। चीन इन क्षेत्रों में काफी निवेश कर रहा है.

इधर से ही गुजरता है CPEC

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमी कॉरिडोर (सीपीईसी) इधर से ही गुजरता है. इस गलियारे में चीन ने अरबों का निवेश किया है. चीन बलूचिस्तान में खनन परियोजनाओं और ग्वादर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में भी निवेश कर रहा है.

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BLA, BLF की मजबूत पकड़

  • इन सबके बीच यहां पर चरमपंथी संगठन सक्रिय हैं, जिन्हें चीन का इस इलाके में घुसना पसंद नहीं आ रहा है. बीएलए और बीएलएफ बलूचिस्तान में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं. हाल में बलूच और पाकिस्तानी सेना के बीच हिंसक झड़प भी देखने को मिली.

तहरीक-ए-तालिबान ने खोला है मोर्चा

  • एक तरफ बीएलए और दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान भी दूसरी ओर से पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठा हुआ है.सवाल ये उठता है कि आखिर बलूचिस्तान के साथ पाकिस्तान का तनाव क्यों चल रहा है.

ईरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान से जुड़ा बलूचिस्तान

आपको बता दें, आज का बलूचिस्तान ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़ा है. अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार बलूचिस्तान का हिस्सा थे.

स्वतंत्र रियासत था बलूचिस्तान

  • पाकिस्तान से जुड़ने से पहले बलूचिस्तान एक स्वतंत्र रियासत था. हालांकि, बाद में उसे पाकिस्तान में शामिल होना पड़ा. पूर्व में बलूच समेत अन्य रियासतों को पाकिस्तान में मिलाने की शर्त ये थी कि सरकार उनके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी.

धीरे-धीरे बदली तस्वीर

  • बलूच का विलय पाकिस्तान में हुआ जरूर था, लेकिन वह कभी भी इस चीज के लिए राजी नहीं था. पाकिस्तान जब अस्तित्व में आया, तब जिन्ना भी ये नहीं चाहते थे कि बलूच का विलय पाक में हो. लेकिन धीरे-धीरे तस्वीरें बदलती गईं और देखते ही देखते बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया गया.

पाकिस्तान में नहीं आना चाहता था बलूचिस्तान

इतिहासकारों का भी यही मानना है कि बलूचिस्तान कभी भी पाकिस्तान के साथ आने के लिए सहमति नहीं दे रहा था. बलूचिस्तान के नेता भारत में अपना विलय करने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें पाकिस्तान में शामिल नहीं होना था.

1956 में लागू हुआ था संविधान

  • पाकिस्तानी सरकार की दखल अंदाजी की मनाही की शर्तों के साथ देसी रियासतों को पाकिस्तान में जबरन विलय कर लिया. फिर 1956 में पाकिस्तान ने संविधान लागू किया, जिसके बाद इन क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना और नौकरशाहों का नियंत्रण बढ़ने लगा.

चरमपंथी संगठन का उदय

  • बलूच के पाकिस्तान में विलय के साथ ही चरमपंथी संगठनों का उदय भी हो गया. साल 2000 तक बीएलए की तरफ से बलूचिस्तान में सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया जाने लगा.

बलूचिस्तान ने नहीं स्वीकार किया विलय

बलूचिस्तान आज भी खुद को एक आजाद मुल्क मानता है. आज तक बलूचिस्तान पाकिस्तान में अपने विलय को स्वीकार नहीं कर रहा है. यही कारण है कि पाकिस्तान की सेना और सरकार के साथ बलूचिस्तान का संघर्ष लगातार जारी है. बलूच का विद्रोह उसी दिन से शुरू हो गया, जिस दिन उसे जबरदस्ती पाकिस्तान में मिला लिया गया.

(IANS इनपुट के साथ)

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