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ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते संबंधों को एक नई दिशा मिल रही है. इस महीने ऑस्ट्रेलिया भारत में अपना पहला 'फर्स्ट नेशंस' बिजनेस मिशन लीड कर रहा है, जिसका मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच खनन साझेदारी को मजबूत करना है. ये मिशन ऑस्ट्रेलियाई माइनिंग इक्विपमेंट, टेक्नोलॉजी और सर्विसेज (METS) कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में नए रास्ते खोलेगा.
इस खास मौके पर, ऑस्ट्रेलिया की आठ प्रमुख METS कंपनियां भारत के तीन बड़े शहरों – मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता का दौरा करेंगी. ये दौरा 26 अक्टूबर से 3 नवंबर तक चलेगा. इस दौरान, कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर तलाशेंगी और अपनी विशेषज्ञता व नए इनोवेशन का प्रदर्शन करेंगी. ये प्रतिनिधिमंडल पहले 26 से 28 अक्टूबर तक मुंबई में, फिर 28 से 30 अक्टूबर तक दिल्ली में और उसके बाद 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक कोलकाता में रहेगा. कोलकाता में, ये कंपनियां भारत के सबसे बड़े माइनिंग कॉन्फ्रेंस, 'इंटरनेशनल माइनिंग, इक्विपमेंट एंड मिनरल्स एग्जीबिशन' में शिरकत करेंगी.
इस दौरे को लेकर ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर, फिलिप ग्रीन ने कहा, "दुनिया भर में स्वदेशी अधिकारों को आगे बढ़ाने और फर्स्ट नेशंस ट्रेड व इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने में मदद करने की हमारी कोशिशों के तहत, ऑस्ट्रेलिया भारतीय इकोनॉमी से ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है."
उन्होंने ये भी बताया कि भारत ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस इंडस्ट्रीज के लिए बहुत बड़े अवसर पेश करता है. चाहे ये अवसर एग्रीफूड और नेटिव बोटैनिकल, कला, डिजाइन का निर्यात हो या साइबर, क्लीन एनर्जी या माइनिंग सॉल्यूशन डेवलप करना हो. ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस ऐतिहासिक बिजनेस मिशन को सपोर्ट करने पर गर्व महसूस करती है.
ऑस्ट्रेलियाई फर्स्ट नेशंस, एबोरिजिनल और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोग, धरती की सबसे पुरानी लगातार चलने वाली सभ्यताओं में से एक हैं, जो 65,000 साल से भी ज्यादा पुरानी है. इनकी पहचान ऑस्ट्रेलिया के पहले डिप्लोमैट, ट्रेडर, इनोवेटर और ज्ञान रखने वालों के रूप में होती है. ये मिशन उनकी समृद्ध विरासत और आधुनिक व्यापार क्षमताओं को भारत के सामने प्रस्तुत करेगा.
इस प्रतिनिधिमंडल को पर्थ यूएसएशिया सेंटर और चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया द्वारा ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से लीड किया जा रहा है. ये मिशन डीजल माइनिंग गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलने से लेकर फ्यूल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने के लिए केमिकल बनाने, सेफ्टी, इंडस्ट्रियल गैस, इंजीनियरिंग और टेक्निकल सर्विसेज जैसे कई सेक्टरों में ऑस्ट्रेलियाई क्षमताओं का बेहतरीन उदाहरण पेश करता है.