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ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पाकिस्तान पर भी बड़ा हमला. (ANI)
पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान और इजरायल के युद्ध पर टिकी हैं, लेकिन इसी बीच भारत के पड़ोस में एक और खतरनाक मोर्चा खुल गया है. अफगानिस्तान और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच चल रही तनातनी अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां दोनों देश एक-दूसरे पर सीधे हवाई हमले कर रहे हैं.
शुक्रवार को अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में स्थित कोहाट मिलिट्री फोर्ट पर जबरदस्त ड्रोन स्ट्राइक की. यह हमला इतना सटीक था कि इसने पाकिस्तान के वार कमांड सेंटर को हिलाकर रख दिया है. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने खुद इस हमले की पुष्टि की है. उनका कहना है कि यह एक जवाबी कार्रवाई थी. इस ड्रोन हमले ने न केवल मिलिट्री बेस को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि पाकिस्तान की उस सुरक्षा दीवार पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं जिसे वह डूरंड लाइन के पास अभेद्य मानता था.
अफगानिस्तान की ओर से किए गए इस ड्रोन हमले का मुख्य निशाना कोहाट मिलिट्री फोर्ट था. यह किला डूरंड लाइन के पास पाकिस्तान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र है. रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन ने किले के भीतर मौजूद कमांड सेंटर, हथियारों के डिपो और सैनिकों के रहने वाले रिहायशी क्वार्टर को सीधा निशाना बनाया.
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी दी कि इस हमले में पाकिस्तान को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है. किले के कमांडर का ऑफिस भी इस हमले की चपेट में आ गया और उसे काफी क्षति पहुंची है. यह हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि कोहाट फोर्ट से ही पूरे इलाके की सैन्य गतिविधियों को कंट्रोल किया जाता था.
यह पूरी आग तब भड़की जब पाकिस्तान की सेना ने डूरंड लाइन के पास स्थित खोस्त प्रांत के अलीशेर-तेरेजई जिले में भारी गोलाबारी की थी. 'टोलो न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की इस गोलाबारी में एक ही परिवार के चार लोगों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए. इस घटना ने अफगानिस्तान के भीतर गुस्से की लहर पैदा कर दी.
जवाब में, अफगानिस्तान ने चुप बैठने के बजाय ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान के मिलिट्री बेस को निशाना बनाया. लेकिन बात यहीं नहीं रुकी. पाकिस्तान की एयरफोर्स ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट के पास मौजूद निजी एयरलाइन 'काम एयर' के ईंधन डिपो पर हमला कर दिया. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. उनका कहना है कि यह कंपनी घरेलू एयरलाइंस और यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के विमानों को भी ईंधन मुहैया कराती है. पाकिस्तान पर पहले भी एक राष्ट्रीय व्यापारी के फ्यूल स्टोरेज को तबाह करने के आरोप लग चुके हैं.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच इस कड़वाहट की जड़ें बहुत पुरानी हैं. 2021 में जब से अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी हुई है, डूरंड लाइन पर झड़पें काफी बढ़ गई हैं. डूरंड लाइन वह काल्पनिक सीमा है जिसे पाकिस्तान तो मानता है लेकिन अफगानिस्तान कभी स्वीकार नहीं करता.
पाकिस्तान का सबसे बड़ा सिरदर्द 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' यानी टीटीपी है. पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी के लड़ाकों को अपने यहां पनाह दे रहा है. टीटीपी वही ग्रुप है जिसने 2007 से पाकिस्तान के भीतर कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दिया है. हालांकि टीटीपी और अफगान तालिबान की विचारधारा मिलती-जुलती है, लेकिन दोनों संगठन अलग-अलग काम करते हैं. पाकिस्तान चाहता है कि तालिबान इन सशस्त्र समूहों पर लगाम लगाए, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा.
इस युद्ध जैसी स्थिति का सबसे बुरा असर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों पर पड़ रहा है. एक तरफ सीमा पर अफगानिस्तान से सीधा मुकाबला है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के भीतर टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले तेज हो गए हैं.
बलूचिस्तान, जो संसाधनों से भरा हुआ इलाका है, वहां भी पाकिस्तानी सेना को कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है. फरवरी के महीने में दोनों देशों के बीच हवाई हमलों का यह सिलसिला काफी बढ़ गया है, जिससे पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है.