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World Television Day 2025: क्या आपको वो दौर याद है, जब पूरे मोहल्ले का सिर्फ़ एक टीवी हुआ करता था? क्रिकेट मैच हो या रविवार की रामायण- लोग काम-धंधा छोड़कर उसी घर में जमा हो जाते थे. सड़कों पर सन्नाटा, घरों में गूंजती आवाज़ें और सबकी नज़र बस टीवी पर. उस समय टीवी सिर्फ़ मशीन नहीं था, बल्कि हर भारतीय परिवार का हिस्सा था. एक ऐसी खिड़की, जो पहली बार दुनिया को हमारे घरों तक लेकर आई, और कहानियों को दिल तक पहुंचा गई.
आज बेशक दौर OTT का है, लेकिन टीवी के प्रति लोगों का लगाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है. हर साल 21 नवंबर को World Television Day मनाया जाता है. आज इस मौके पर आपको बताते हैं कि आखिर किसने किया था टेलिविजन का आविष्कार, भारत में TV की शुरुआत कब हुई, पहला सीरियल कौन सा था और TV से लेकर OTT तक कैसा रहा सफर.
टेलीविजन का आविष्कार सबसे पहले स्कॉटलैंड के इंजीनियर जॉन लोगी बेयर्ड ने साल 1924 में किया था. उन्होंने एक ऐसी मशीन बनाई जो तस्वीरों को ट्रांसमिट कर सकती थी. इसके कुछ ही साल बाद, 1927 में अमेरिकी आविष्कारक फिलो फार्न्सवर्थ ने पहला पूरी तरह से वर्किंग इलेक्ट्रॉनिक टेलीविजन तैयार किया, जिसने आधुनिक टीवी की नींव रखी.
वर्किंग टीवी के तैयार होने के बाद 1 सितंबर 1928 को इसे पहली बार प्रेस के सामने प्रदर्शित किया गया. शुरुआती दौर में टीवी सिर्फ ब्लैक-एंड-व्हाइट थे, लेकिन इसी साल जॉन लोगी बेयर्ड ने रंगीन (कलर) टेलीविजन का सफल प्रदर्शन भी कर दिया था. हालांकि आम लोगों के लिए पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत काफी बाद में, 1940 के दशक में हुई.
भारत में टेलीविजन का सफर आज़ादी के बाद शुरू हुआ और इसमें यूनेस्को की बड़ी भूमिका रही. यूनेस्को की मदद से 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो के तहत टीवी प्रसारण की शुरुआत हुई. आकाशवाणी भवन में टीवी का पहला ऑडिटोरियम बनाया गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था.
शुरुआत बेहद सीमित थी. हफ्ते में बस दो दिन, लगभग एक-एक घंटे के कार्यक्रम प्रसारित होते थे. इन कार्यक्रमों का मकसद नागरिकों को कर्तव्य, स्वास्थ्य, ट्रैफिक नियमों और जरूरी सामाजिक विषयों के बारे में जागरूक करना था. धीरे-धीरे टीवी की पहुंच बढ़ने लगी.
भारत के टीवी इतिहास का बड़ा मोड़ तब आया जब 15 अगस्त 1982 को देश में पहला कलर्ड टीवी लॉन्च हुआ. इसी के साथ टीवी देखने का अनुभव बदल गया और मनोरंजन का एक नया दौर शुरू हुआ.
भारत में टीवी पर प्रसारित होने वाला पहला सीरियल 'हम लोग' था, जो 7 जुलाई, 1984 को दूरदर्शन पर शुरू हुआ था. इस सीरियल ने मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार के संघर्षों और सपनों की कहानियों को बहुत साधारण तरीके से दिखाया और दर्शकों से बेहद गहरा जुड़ाव बनाया. इसे मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था. 'Hum Log' के बाद 1980s में और कई ऐतिहासिक और सामाजिक सीरियलों का दौर आया, जिनमें 'Buniyaad', 'Ramayan', 'Mahabharat' और 'Yeh Jo Hai Zindagi' शामिल हैं.
1980 का दशक दूरदर्शन के स्वर्णिम काल का था, लेकिन 1990s के बाद केबल और सैटेलाइट टीवी ने चैनल्स और कंटेंट में विविधता ला दी. 2008 में भारत में ओटीटी (ओवर-द-टॉप) की शुरुआत Reliance Entertainment के Bigflix प्लेटफॉर्म के साथ हुई. इसके बाद, 2010 में Digivive ने nexGTv लॉन्च किया, जो भारत का पहला ओटीटी मोबाइल ऐप था. आज OTT कई तरह की नई कहानियां और फॉर्मैट दे रहा है.
पहले जहां कंटेंट सीमित था और प्रसारण समय तय था, OTT ने उन सीमाओं को हटा दिया. अब दर्शक अपने समय पर, अपनी डिवाइस पर और अपनी पसंद का कंटेंट चुनते हैं. इससे कहानी कहने के तरीके, प्रोडक्शन वैल्यू और विषयों की सीमा दोनों बढ़ी हैं.