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हर साल 31 अक्टूबर को दुनियाभर में विश्व बचत दिवस (World Savings Day) मनाया जाता है. लेकिन भारत में, 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद, विश्व बचत दिवस 30 अक्टूबर को मनाया जाता है. इसका मकसद लोगों को बचत (Savings) की अहमियत समझाना और उन्हें अपने भविष्य के लिए फाइनेंशियली तैयार करना है. हालांकि अब वक्त के साथ सेविंग्स की परिभाषा बदल चुकी है.
पहले जहां सेविंग्स का मतलब सिर्फ पैसे को बैंक में जमा करना होता था, वहीं अब लोग समझदारी से इन्वेस्टमेंट बेस्ड सेविंग्स को तरजीह दे रहे हैं. आज के समय में लोग अपनी सेविंग्स को बढ़ाने के लिए SIP, Mutual Funds और ETF जैसे आधुनिक निवेश साधनों का सहारा ले रहे हैं.
पहले सेविंग्स का मतलब होता था पैसा बैंक में या घर में जमा रखना. लेकिन बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं ने लोगों को सिखाया कि सिर्फ बचत नहीं, निवेश भी जरूरी है. आज के समय में लोग अपनी सेविंग्स को ऐसी जगह लगाना चाहते हैं जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिले और रिस्क भी कम रहे.
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) ने भारत में निवेश को आसान बना दिया है. इसमें हर महीने एक तय रकम किसी म्यूचुअल फंड में निवेश की जाती है. SIP का सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग इफेक्ट है, जो लंबे समय में बड़ा फंड तैयार करता है.
सितंबर 2025 में SIP इनफ्लो 4% बढ़कर ₹29,361 करोड़ पहुंच गया, जबकि अगस्त में ये ₹28,265 करोड़ था. AMFI के मुताबिक, सितंबर में कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) बढ़कर ₹75.6 लाख करोड़ हो गया.
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) ने भी युवाओं में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है. ये एक तरह का फंड होता है जिसमें निफ्टी50 इंडेक्स, गोल्ड, बॉन्ड्स या सिल्वर जैसी सिक्योरिटीज शामिल होती हैं.
World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में भारत के गोल्ड ETF में $233 मिलियन का शुद्ध निवेश आया, जो जुलाई के मुकाबले 67% ज्यादा है. ETF का फायदा ये है कि इसमें ट्रांसपेरेंसी और लिक्विडिटी दोनों मिलती हैं, यानी कभी भी खरीद-फरोख्त संभव है.
भले ही SIP और ETF जैसे विकल्प बढ़ रहे हैं, लेकिन पारंपरिक Fixed Deposit (FD), Recurring Deposit (RD) और Savings Account आज भी आम लोगों के भरोसे का जरिया हैं. FD और RD में सुरक्षा और गारंटीड रिटर्न का भरोसा अब भी सबसे बड़ा आकर्षण है.