&format=webp&quality=medium)
Surya Grahan 2025 in India: साल के आखिरी चंद्र ग्रहण की हर तरफ चर्चा है. इस ग्रहण को नई दिल्ली, मुम्बई, अहमदाबाद, जयपुर, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, आगरा, लखनऊ समेत देश के तमाम शहरों में देखा गया. इस दौरान चंद्रमा ब्लड मून यानी सुर्ख लाल रंग का दिखाई दिया. चंद्र ग्रहण के बाद अब सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) की बारी है. सूर्य ग्रहण हर साल अमावस्या तिथि पर लगता है. इस साल ये पितृ पक्ष अमावस्या यानी 21 सितंबर को रविवार के दिन लगेगा. जानिए क्या ये चंद्र ग्रहण की तरह भारत में दिखाई देगा?
21 सितंबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा. ये सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, अफ्रीका, हिंद महासागर, दक्षिण प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, दक्षिणी महासागर, पोलिनेशिया, मेलानेशिया, एशिया के कुछ हिस्सों के साथ-साथ न्यूजीलैंड, नॉरफॉक द्वीप में किंग्स्टन, ऑकलैंड, क्राइस्टचर्च, वेलिंग्टन में दिखाई देगा.
21 सितंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक ग्रहण होगा. भारतीय समय के अनुसार ये रात में 10:59 बजे से शुरू होकर देर रात 03:23 बजे तक चलेगा. हालांकि ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा. इस कारण सूतक वगैरह के नियम भी भारत में लागू नहीं होंगे. भारत के अलावा ये पाकिस्तान, श्रीलंका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका, नेपाल, अफगानिस्तान, यूएई, अफ्रीका व यूरोप में यह सूर्य ग्रहण नजर नहीं आएगा.
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब सूर्य, चंद्रमा और धरती एक सीधी लाइन में आ जाते हैं. इस लाइन में आने के लिए दो चीजें ज़रूरी होती हैं. सबसे पहले, चांद को अमावस्या के फेज़ में होना चाहिए, यानी जब चांद अपनी कक्षा में घूमते-घूमते धरती और सूरज के बीच आ जाता है. दूसरी बात, ग्रहण सिर्फ उसी समय लग सकता है जब Eclipse Season हो. ये सीज़न करीब 34 दिन तक चलता है और लगभग हर 6 महीने में आता है. इस समय पर ही सूरज, चांद और धरती एक ही सतह पर आ सकते हैं.
आंशिक सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है और जब सूर्य का कुछ यानी आंशिक हिस्सा चंद्रमा से ढंक जाता है तो उसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं. इस बार का सूर्य ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण है.
पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी तीनों एक सीध में आ जाते हैं और इसके कारण पृथ्वी के एक भाग पर पूरी तरह से अंधेरा छा जाता है, तो इसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है.
वलयाकार सूर्यग्रहण: जब ग्रहण के समय चंद्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढंकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है. ऐसे में सूर्य एक कंगन की तरह दिखाई देता है. इसे वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है.