&format=webp&quality=medium)
Byjus, BCCI: एडुटेक स्टार्टअप बायजूस को एनसीएलएटी ने बड़ी राहत दी है. नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने बीसीसीआई और बायजू के बीच 158 करोड़ रुपये के समाधान प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. साथ ही दिवाला कार्यवाही के आदेश को निरस्त किया है. हालांकि, एनसीएलएटी ने एडुटेक स्टार्टअप को चेतावनी भी दी है कि यदि वह बताई गई तारीख तक यदि पेमेंट करने में विफल रहा तो उस पर दोबारा दिवालियापन कार्यवाही की दोबारा शुरू हो जाएगी.
NCLAT की दो सदस्यीय चेन्नई पीठ ने ओपन कोर्ट में अपने आदेश में कहा, "दिए गए वचन और हलफनामे को देखते हुए, पक्षों के बीच समझौते को मंजूरी दी जाती है. इसके परिणामस्वरूप अपील सफल होती है और विवादित आदेश (NCLT द्वारा पारित) को रद्द किया जाता है." आपको बता दें कि बीसीसीआई ने थिंक एंड लर्न के 158.9 करोड़ रुपये की धन अदायगी से चूक करने को लेकर दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था.
Byjus की अंडरटेकिंग के मुताबिक, रिजु रविंद्रन ने बायजू द्वारा बीसीसीआई को बकाया बकाया राशि के एवज में 31 जुलाई को 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. शुक्रवार को एक और 25 करोड़ रुपये जमा किए जाएंगे और बाकी 83 करोड़ रुपये 9 अगस्त को आरटीजीएस के जरिए जमा किए जाएंगे.16 जुलाई को, NCLT की बेंगलुरु पीठ ने BCCI द्वारा दायर याचिका को स्वीकार किया था. साथ ही बायजू के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू करने का निर्देश दिया था.
एनसीएलटी ने आईबीसी के प्रावधानों के मुताबिक थिंक एंड लर्न के बोर्ड को निलंबित कर दिया है और कर्ज में डूबी फर्म की देखभाल के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया है. NCLAT ने बायजू के अमेरिका स्थित ऋणदाताओं के द्वारा लगाए गए राउंड ट्रिपिंग के आरोपों को भी खारिज किया है. एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा कि वह इसके लिए कोई भी सबूत देने में विफल रहे हैं. न्यायाधिकरण ने कहा कि पैसा रिजु रवींद्रन (बायजू रवींद्रन के भाई) ने अपने शेयरों की बिक्री से चुकाया था.