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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की खूबसूरती से कौन वाकिफ नहीं हैं. बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस शहर को अंग्रेजों ने बसाया था. शिमला को बसाने का श्रेय चॉरीस प्रैट कैनेडी को दिया जाता है. कैनेडी को अंग्रेजों ने पहाड़ी रियासतों का राजनीतिक अधिकारी नियुक्त किया था. 1822 में कैनेडी ने शिमला में पहला स्थाई घर बनवाया था. इसे कैनेडी हाउस के नाम से जाना जाता था. 1830 के बाद शिमला को शहर की तरह बसाने की शुरुआत की गई और 1864 में इसे आधिकारिक रूप से 'Summer Capital' घोषित कर दिया गया.
आज के समय में भी शिमला टूरिस्ट के फेवरेट डेस्टिनेशंस में से एक है. आप भी हो सकता है कि शिमला घूम चुके हों, लेकिन क्या आपको ये पता है कि ये शहर कभी पंजाब की राजधानी भी रह चुका है? यहां जानिए इस शहर से जुड़ी रोचक जानकारी.
आजादी के बाद शिमला को कुछ समय के लिए पंजाब की अस्थायी राजधानी बनाया गया था. हिमाचल प्रदेश के निर्माण के बाद 1966 में इसे हिमाचल प्रदेश की राजधानी के तौर पर नामित किया गया था. आज भी शिमला को उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में से एक माना जाता है और इसे 'पहाड़ों की रानी' भी कहा जाता है.
शिमला के नाम को लेकर मान्यता है कि ये शब्द श्यामला से लिया गया है. जाखू पहाड़ी पर काली माता का एक मंदिर था. इन माता को श्यामला माता के नाम से जाना जाता था. श्यामला से ही इस शहर को शिमला नाम दिया गयाऋ ब्रिटिश काल में देवी की प्रतिमा को एक नया स्थान दिया गया था. अब यहां प्रसिद्ध काली बाड़ी मंदिर है.
कहा जाता है कि अंग्रेज शिमला को सिमला कहा करते थे और अंग्रेजी में इसकी स्पेलिंग भी Simla लिखी जाती थी. 80 के दशक में हिमाचल सरकार ने हिंदी में इसके बोलने के हिसाब से अंग्रेजी में भी शिमला लिखे जाने की अधिसूचना जारी की. इसके बाद इसे Shimla लिखा जाने लगा.
साल 1903 में कालका और शिमला के बीच एक रेल लाइन का निर्माण हुआ था. इस रेललाइन को 2008 में यूनेस्को ने हेरिटेज रेलवे ट्रैक का दर्जा दिया है. 96 किलोमीटर कालका-शिमला रेललाइन में 102 सुरंगें, 800 पुल और 18 रेलवे स्टेशन हैं.