Monsoon 2025 Update: मॉनसून को लेकर IMD ने साफ किया है कि इस बार अच्छी बारिश होने वाली है. मॉनसून 2025 को लेकर IMD ने मंगलवार को अपना पहला पूर्वानुमान जारी किया. IMD के हिसाब से इस साल बारिश अच्छी होने वाली है.अच्छी बारिश की खबर कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अच्छी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है. बारिश हर किसी को अच्छी लगती है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि बारिश की बूंदें गोल क्यों होती है? इसके पीछे का लॉजिक क्या है? सवाल का जवाब अगर आप नहीं जानते हैं तो जानकर दिमाग चकरा सकता है.
1/6आखिर ये बारिश की बूंदें गोल-गोल क्यों होती हैं? जी हां बारिश की बूंदें गोल (rain drops) ही क्यों होती हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण माना जाता है.असल में पानी की बूंदों के गोल होने का कारण पृष्ठ तनाव माना जाता है.
2/6दुनिया में ना जानें ऐसी कितनी ही चीजें होती हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं, लेकिन कई बार उनको देखकर मन में सवाल जरूर उठता है कि आखिर ये चीजे ऐसी क्यों है और क्यों नहीं है? इसी तरह से बारिश को देखकर बचपन से हम सभी के मन में कई तरह सवाल उठते हैं. जी हां हम सभी बचपन से ही बारिश और ओस की बूंदों को देखते आ रहे हैं. लेकिन कभी सोचा है कि आखिर ये बारिश की बूंदे गोल ही क्यों होती हैं?इन गोल बूंदो को देखकर ऐसा लगता है किइनको किसी सांचे में ढाल दिया गया होगा.तो चलिए जानते हैं कि आखिर बारिश की बूंदें गोल ही क्यों होती हैं?
3/6अगर हम पानी को किसी चीज में डालते हैं, तो वो पानी उसी आकार में खुद को ढाल लेता है. लेकिन फिर भी सवाल वही है कि ये बारिश की बूंदे गोल की क्यों होती हैं. हम सभी ने बचपन में फिजिक्स तो पढ़ी ही होती है, तो पृष्ठ तनाव (Surface tension) के बारे में भी जरूर पढ़ा ही होगा. यानी कि बूंदें गोल पीछे का एक अहम वैज्ञानिक कारण माना जाता है.विज्ञान में साफ किया गया है कि आखिर बारिश की बूंदें गोल आकार की ही क्यों होती हैं.
4/6पृष्ठ तनाव (Surface tension) के कारण से ही बारिश की बूंदें गोल आकार की होती हैं. बूंदें गोल होने कारण है कि उनके पास एक सतह तनाव (Surface tension) होता है और ये एक ऐसा तनाव है जो तरल पदार्थों को अपने पृष्ठ तनाव को कम करता है.यही कारण है कि हम पानी को जिस बर्तन में रखते हैं, वह उसी आकार का हो जाता है.इसी तरह से साबुन के बुलबुले भी हम सभी ने हमेशा गोल आकार के ही देखे हैं,इनका रूप भी सेम ही माना जाता है, सतह तनाव इन्हें भी न्यूनतम सतह क्षेत्र प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है.
5/6विज्ञान के मानें तो गुरुत्वाकर्षण होने के कारण से सबसे न्यूनतम आकार गोलाकार होने से पानी की बूंदें जैसे जैसे छोटी होती जाती हैं वो गोलकार के रूप को ले लेती हैं.जबकि दूसरी चीजों से गोल आकार का क्षेत्रफल कम होने के कारण से भी बारिश की बूंदें गोल हो जाती हैं.बारिश को छोड़कर भी कोई द्रव पृथ्वी के पास जैसे जैसे आता है वह गोल बूंदो में खुद को बदलता है.यानी पृष्ठ तनाव के चलते ये बारिश की बूंदें गोल हो जाती हैं.यही कारण है कि केवल बारिश का बूंद ही नहीं, ऊंचाई से गिरने वाला कोई भी द्रव जैसे ही पृथ्वी के करीब आता है बूंद में बदल जाता है.
6/6मान लीजिए कि अगर आप 7 फुट तक की ऊंचाई से पानी को जमीन पर तेजी से गिराते हैं तो ये गोल बूंद नहीं बल्कि एक लंबी आकार की धार के रूप में बदलेगा.फिर इसी पानी को 15 फीट तक की ऊंचाई से अगर गिराते हैं तो फिर पानी की लंबी धार जमीन पर बिखरती दिखाई देगी.जबकि अगर हम पानी को 27 से 30 फीट तक की ऊंचाई से गिराएंगे तो फिर पानी तेजी से पूरे में बिखरेगा और छोटी-छोटी बूंदों में जगह-जगब बदलता दिखाई देगा.यानी कि अब आप समझ गए होंगे कि पानी की बूंदे गोल क्यों होती हैं, असल में ये सारा खेल केवल गुरुत्वाकर्षण का है.(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)