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दिल्ली एनसीआर की एयर क्वालिटी साल दर साल खराब हो रही है. अब इस लिस्ट में मुंबई भी शामिल हो गया है. मुंबई में हवा दिल्ली की तरह ही खराब होती जा रही है. जिस कारण से कोर्ट में चल रही सुओ-मोटो पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की बेंच ने साफ कहा कि शहर की एयर क्वालिटी लगातार खराब हो रही है और प्रशासन ग्राउंड पर अपने ही आदेशों का पालन करवाने में नाकाम रहा है. इस सुनवाई के दौरान कोर्ट के अमिकस क्यूरी और सीनियर वकील दरीअस खंबाटा ने IIT बॉम्बे और NEERI की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मुंबई में करीब 60% वायु प्रदूषण का कारण निर्माण गतिविधियों और सड़क की धूल है.
असल में ये फैक्ट MPCB ने भी अपने एफीडेविड में दिखाया गया है. उन्होंने कहा कि BMC की 27-प्वाइंट गाइडलाइन जैसे कि साइट कवरिंग, पानी का छिड़काव, सीसीटीवी, एयर क्वालिटी सेंसर का बड़े रूप में उल्लंघन हो रहा है. दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट्स, इंस्प्रेशन और शिकायतों से यह साफ होता है कि कई साइट्स पर ना तो ग्रीन शीट लगी है, न पानी डाला जा रहा है और न सेंसर लगाए गए हैं.
कोर्ट ने कहा कि 2023 और 2025 में दिए गए कई आदेशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. ऑटम महीनों में यानि पतझड़ में प्रदूषण अब ‘Recurring और Persistent Issue’ बन चुका है, और प्रशासन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता है.
कोर्ट ने एक स्वतंत्र ‘फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी’ बनाई, जिसमें अनिता पाटिल, Conservator of Forests, SGNP और 3 Advocate करण भोसलें, नम्रता विनोद और अनंत मल्ल्या शामिल हैं.
इसके अलावा कोर्ट ने BMC और MPCB को कड़ा निर्देश दिया है जिसमें Immediate + Long-Term Measures पर फुल डिटेल्ड वाला एफिडेविट जमा करने को कहा है.इसके साथ ही आगे पॉल्युशन रोकने के लिए क्या स्कीम है, गाइडलाइंस के उल्लंघन पर क्या सख्ती की जाएगी इस पर भी जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने BMC और MPCB से सभी साइट्स को आदेश की कॉपी भेजने, कमेटी के रिव्यू लेने के दौरान पूरी सुरक्षा और लॉजिस्टिकल सपोर्ट देने को भी कहा है.
अब बड़ा सवाल ये है कि मुंबई के रियल एस्टेट के लिए इसका क्या मतलब है. दरअसल ये आदेश साफ संकेत देता है कि कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर अब हार्ड निगरानी होगी. डेवलपर्स को हर हाल में गाइडलाइंस का पालन करना होगा. सेंसर, CCTV, पानी का छिड़काव, नेट-कवरिंग जरूरी करना होगा. एयर पॉल्यूशन को लेकर BMC और MPCB को अपनी इनएक्टिविटी का जवाब देना होगा माना जा रहा है कि यह संभवतः मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण पर अब तक की ये सबसे निर्णायक न्यायिक पहल है मामले पर अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2025, शाम 4:30 बजे होगी जहां कमेटी की रिपोर्ट के साथ ही BMC और MPCB के उपायों की समीक्षा होगी.
1. मुंबई के प्रदूषण पर हाई कोर्ट ने क्या कार्रवाई की है?
कोर्ट ने सुओ-मोटो केस में नई कमेटी गठित की है और BMC-MPCB से सख्त कदम उठाने को कहा है.
2. कोर्ट के अनुसार मुंबई में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण क्या है?
IIT बॉम्बे और NEERI की रिपोर्ट के अनुसार—निर्माण धूल और सड़क की मिट्टी 60% प्रदूषण का कारण हैं.
3. नई कमेटी क्या जांच करेगी?
कमेटी कंस्ट्रक्शन साइट्स का निरीक्षण करेगी, AQI वाले क्षेत्रों की पहचान करेगी और गाइडलाइंस पालन की स्थिति बताएगी.
4. BMC और MPCB को क्या निर्देश मिले?
दोनों संस्थाओं को तुरंत और लंबी अवधि के उपायों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करना होगा और सभी साइट्स को आदेश भेजना होगा.
5. क्या मुंबई में निर्माण गतिविधियां रुक सकती हैं?
सीधे रोक की बात नहीं है, लेकिन कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि नियमों का कड़ा पालन अनिवार्य होगा और निगरानी बेहद सख्त होगी.
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