कहीं आपकी मेमोरी तो नहीं खा रहा जंक फूड! अगर आप भी हैं शौकीन तो जरूर पढ़ लें ये रिपोर्ट

हाल ही में एक स्‍टडी में ये बात सामने आई है. स्टडी बताती है कि इससे कॉग्निटिव डिसफंक्शन का रिस्क बढ़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है. स्टडी से पता चला है कि फैटी जंक फूड आपका वजन बढ़ाने या डायबिटीज जैसी बीमारियों का मरीज बनाने से पहले आपके मस्तिष्क को अटैक करता है.
कहीं आपकी मेमोरी तो नहीं खा रहा जंक फूड! अगर आप भी हैं शौकीन तो जरूर पढ़ लें ये रिपोर्ट

अगर आप फास्‍टफूड के शौकीन हैं और उन लोगों में से हैं जो कभी प्री वीकेंड तो कभी पोस्‍ट वीकेंड सेलिब्रेशन के बहाने आए दिन जंक फूड खाते हैं तो जरा संभल जाइए. आपको जानकर हैरानी होगी कि इन फैटी फूड्स का अगर आप 4 दिन भी लगातार खा लें तो इससे आपके ब्रेन को काफी नुकसान पहुंच सकता है. हाल ही में एक स्‍टडी में ये बात सामने आई है. स्टडी बताती है कि इससे कॉग्निटिव डिसफंक्शन (सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर) का रिस्क बढ़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है.

शरीर से पहले मस्तिष्‍क पर करता है अटैक

अमेरिका स्थित उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय (यूएनसी) के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की, जिसके नतीजे 'न्यूरॉन' पत्रिका में पब्लिश हुए हैं. इस स्टडी से पता चला है कि फैटी जंक फूड आपका वजन बढ़ाने या डायबिटीज जैसी बीमारियों का मरीज बनाने से पहले आपके मस्तिष्क को अटैक करता है. अगर आप इसे खाने के आ‍दी हैं तो ये आपके लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. इससे आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर होने लगती है.

यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मुख्य अन्वेषक और फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर जुआन सोंग बताते हैं कि ये परिणाम हमें मोटापे और याददाश्त को कमजोर करने वाले कारकों पर ध्यान देने की चेतावनी देते हैं, जिनमें 'वेस्टर्न-स्टाइल जंक फूड' सबसे ऊपर है.

मस्तिष्क में क्या होता है जब आप जंक फूड खाते हैं?

शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में पाया कि जब चूहों को उच्च वसा वाले आहार (High-Fat Diet – HFD) पर रखा गया, तो उनके दिमाग में कुछ खास बदलाव हुए.

दिमाग के हिप्पोकैम्पस (जो याददाश्त के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्सा है) में मस्तिष्क कोशिकाओं का एक खास समूह होता है, जिसे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स कहते हैं. जंक फूड खाने के बाद ये सीसीके इंटरन्यूरॉन्स अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं.

सीसीके इंटरन्यूरॉन्स की इस अतिसक्रियता का मुख्य कारण दिमाग की ग्लूकोज ग्रहण करने की क्षमता का कमजोर होना है. दिमाग को सही ढंग से काम करने के लिए ग्लूकोज की जरूरत होती है.

प्रोफेसर जुआन सोंग बताते हैं कि ये अतिसक्रियता हिप्पोकैम्पस द्वारा स्मृति प्रसंस्करण करने के तरीके को बाधित करती है. यानि, यादें बनाने और उन्हें स्टोर करने की प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ता है. ये हाइपरएक्टिविटी हाई फैट डाइट लेने के कुछ दिनों बाद तक भी जारी रहती है.

पीकेएम2 प्रोटीन और याददाश्त का कनेक्शन

इस खोज में ये भी सामने आया है कि पीकेएम2 (PKM2) नामक एक प्रोटीन इस समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. ये प्रोटीन मस्तिष्क कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा के उपयोग को कंट्रोल करता है. जब ये प्रोटीन सही ढंग से काम नहीं करता, तो कोशिकाओं को ऊर्जा मिलने में दिक्कत होती है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है.

प्रोफेसर सोंग ने कहा, "हम जानते थे कि आहार और मेटाबॉलिज्म ब्रेन हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि हिप्पोकैम्पस में मौजूद सीसीके इंटरन्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं के विशिष्ट और कमजोर समूह) मिलेंगे." उन्होंने आगे कहा, "हमें सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात का हुआ कि ग्लूकोज की कमी होने के बाद इन कोशिकाओं ने तेजी से अपनी गतिविधि बदल दी, और ये बदलाव ही याददाश्त कमजोर करने के लिए काफी था."

चूहों पर परीक्षण और समाधान

टीम ने ये परीक्षण चूहों पर किया. उन्हें उच्च वसा वाले आहार पर रखा गया, जो फैटी जंक फूड जैसा था. सिर्फ चार दिनों के भीतर, परिणामों से पता चला कि दिमाग के स्मृति केंद्र में सीसीके इंटरन्यूरॉन्स असामान्य रूप से सक्रिय हो गए और चूहों की याददाश्त कमजोर होने लगी.

अच्छी खबर ये है कि शोधकर्ताओं ने ये भी पाया कि दिमाग में ग्लूकोज के स्तर को फिर से ठीक करने से अतिसक्रिय न्यूरॉन्स शांत हो गए और चूहों की याददाश्त संबंधी समस्याएं भी ठीक हो गईं.

मोटापे और याददाश्त के लिए उपाय

ये अध्ययन बताता है कि मोटापा संबंधी न्यूरोडीजेनेरेशन को रोकने और ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने के लिए खान-पान में बदलाव और कुछ दवाएं सहायक सिद्ध हो सकती हैं.

खास बात ये है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई-फैट-डाइट के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग (बीच-बीच में उपवास करना) से भी फायदा हो सकता है. इससे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स सामान्य होते हैं और याददाश्त सुधरती है. ये एक ऐसा उपाय है जिसे लोग अपनी लाइफस्टाइल में आसानी से शामिल कर सकते हैं.

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