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ब्लेड को देखकर क्या कभी ये खयाल आया कि इसके बीच में एक डिजायन क्यों बनाया जाता है? (Source- Zee News marathi)
हर दिन हमारी आंखों के सामने से कई चीजें गुजरती हैं, लेकिन कई बार हम उन पर ध्यान नहीं देते. मगर जिज्ञासु लोग हर चीज को बारीकी से देखते हैं और ऑब्जर्व करते हैं, साथ ही उसके पीछे की वजह को समझने की कोशिश करते हैं. ऐसे ही जिज्ञासु लोगों के लिए एक सवाल है कि ब्लेड का इस्तेमाल होते हुए आपने कई बार देखा होगा, खुद भी किया होगा, लेकिन क्या कभी मन में ये सवाल आया है कि ब्लेड के बीच में खाली जगह को छोड़कर एक डिजायन जैसा क्यों बनाया जाता है? अगर आपको इसका जवाब नहीं पता, तो यहां जान लीजिए-
शेविंग के लिए ब्लेड का इस्तेमाल 19वीं सदी से हुआ था. लेकिन इन्हें बार-बार पैना करना पड़ता था, जिसके कारण लोग परेशान होते है. लोगों की इस समस्या को किंग कैंप जिलेट (King Camp Gillette) ने भांप लिया. उस समय वो लोहे का व्यापार करते थे. तब उनके एक कर्मचारी ने कहा कि उनकी कंपनी को ऐसी चीज़ बनानी चाहिए जो एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंकनी पड़े. इससे लोग उनके प्रोडक्ट को बार-बार खरीदेंगे और उनका बिजनेस मुनाफे में जाएगा.
तब जिलेट को रेजर और ब्लेड बनाने का खयाल आया. जिलेट ही वो इकलौती कंपनी थी जिसने सबसे पहले रेजर और ब्लेड बनाने की शुरुआत की. उस वक्त रेजर में ब्लेड बोल्ट के जरिए फिट करना पड़ता था इसलिए ब्लेड के बीच में खास तरह की डिजायन को बनाया गया. रेजर और ब्लेड के कारोबार ने कंपनी को काफी मुनाफा दिया और 1904 के अंत तक कंपनी ने करीब 90 हजार रेजर और 1 करोड़ 24 लाख ब्लेड का बनाए और बेच डाले.
ब्लेड के धंधे में मुनाफा देखकर तमाम कंपनियों ने ब्लेड को बनाकर बेचना शुरू कर दिया, लेकिन उस समय रेजर बनाने का काम सिर्फ जिलेट ही करता था, इसलिए कंपनियों को ब्लेड का आकार ठीक वैसा ही रखना पड़ा, जैसा जिलेट ने रखा था. ताकि उनकी कंपनी का ब्लेड जिलेट के रेजर में फिट हो सके. समय के साथ ब्लेड का वो आकार इतना पॉपुलर हो गया कि रेजर के भी कई डिजायन बदलने के बाद भी ब्लेड का शेप और डिजायन नहीं बदला.
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