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महिलाओं को गोल्ड हमेशा से काफी पसंद रहा है. अधिकतर महिलाएं आज भी अपनी सेविंग्स को गोल्ड में निवेश करना पसंद करती हैं. अब चूंकि महिलाओं का त्योहार करवाचौथ (Karwachauth 2025) आ रहा है. 10 अक्टूबर को ये फेस्टिवल मनाया जाएगा. इस मौके पर अगर आप अपनी पत्नी के लिए गिफ्ट खरीदना चाहते हैं और आपका बजट अच्छा-खासा है तो पत्नी को उनकी पसंद का गिफ्ट यानी सोने की ज्वेलरी तोहफे के तौर पर दीजिए.
सोना सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि एक इन्वेस्टमेंट भी है. इन दिनों तो आसमान छूती कीमतों के बीच सोने की ज्वेलरी और भी मूल्यवान गिफ्ट बन गई है. ये गिफ्ट आपकी पत्नी को बहुत पसंद आएगा. लेकिन सोने की ज्वेलरी को खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, वरना आपको बाद में इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है. यहां जानिए इस बारे में.
ये सबसे बड़ी और अक्सर की जाने वाली गलती है. कई लोग चमक-दमक देखकर गहने ले लेते हैं, लेकिन हॉलमार्क की जांच नहीं करते. एक्सपर्ट्स लगातार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि "शुद्धता की पहचान हॉलमार्क से ही होती है. बिना हॉलमार्क के सोना खरीदना मतलब आंख मूंदकर निवेश करना."
हॉलमार्क भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा सोने की शुद्धता की गारंटी होती है. हॉलमार्क में BIS लोगो, कैरेट में शुद्धता (जैसे 916 का मतलब 22 कैरेट), ज्वेलर का पहचान चिह्न और हॉलमार्किंग सेंटर का चिह्न होता है. हमेशा 22 कैरेट (916) या 18 कैरेट (750) हॉलमार्क वाले गहने ही खरीदें. 24 कैरेट सोना पूरी तरह शुद्ध होता है, लेकिन वो इतना मुलायम होता है कि उससे गहने नहीं बन सकते.
जैसा कि ऊपर बताया गया है, 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध होता है, लेकिन गहनों के लिए आमतौर पर 22 या 18 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा 14 कैरेट सोने के भी जेवरात बनते हैं. 22 कैरेट सोने में 91.6% शुद्ध सोना होता है, जबकि 18 कैरेट में 75% शुद्ध सोना होता है. जाहिर है, दोनों की कीमतें अलग-अलग होंगी. खरीदारी करते समय, आपको प्रति ग्राम सोने की कीमत के साथ ये भी देखना चाहिए कि आप किस कैरेट का सोना ले रहे हैं. ज्वेलर से कैरेट के हिसाब से प्रति ग्राम की कीमत स्पष्ट पूछें और उसे आज के सोने के भाव से मिलाकर देखें. कुछ ज्वेलर कम कैरेट के गहने को ज़्यादा कैरेट बताकर बेच सकते हैं, जिससे आपको सीधे तौर पर नुकसान होगा.
कुछ पैसे बचाने या जीएसटी से बचने के चक्कर में लोग कच्चा बिल ले लेते हैं, जो कि बहुत बड़ी बेवकूफी है. पक्का बिल आपकी खरीद का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रमाण होता है. इसमें गहने की शुद्धता (कैरट), वजन, मेकिंग चार्जेस, जीएसटी और अगर नग हैं तो उनकी डीटेल्स (रत्ती, प्रकार, शुद्धता) साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. कल को अगर आपको गहना बेचना पड़े, एक्सचेंज करना पड़े, या उसकी शुद्धता पर कोई विवाद हो जाए, तो ये पक्का बिल ही आपके काम आएगा. इसके बिना आप धोखाधड़ी का शिकार भी हो सकते हैं.
अगर आप नग वाला आभूषण खरीद रहे हैं, जैसे हीरे या कोई अन्य रत्न जड़ा गहना, तो उसका सर्टिफिकेट लेना न भूलें. ये सर्टिफिकेट नग की रत्ती (वजन), उसके प्रकार (जैसे डायमंड, रूबी, एमराल्ड), कट, क्लेरिटी और शुद्धता के बारे में पूरी जानकारी देगा. बिना सर्टिफिकेट के नग की पहचान करना मुश्किल होता है और भविष्य में उसे बेचने या एक्सचेंज करने पर उसकी सही वैल्यू नहीं मिल पाती. कुछ ज्वेलर नग का वजन भी सोने के वजन में जोड़ देते हैं, जिससे आपको ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं. सुनिश्चित करें कि बिल में सोने का वजन अलग और नग का वजन अलग से लिखा हो.
मेकिंग चार्जेस (Making Charges): ये गहने को बनाने की लागत होती है और ये गहने के डिज़ाइन के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. कई ज्वेलर इसमें काफी अंतर रखते हैं. खरीदारी से पहले अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्जेस की तुलना ज़रूर करें. ये आपकी कुल कीमत को काफी प्रभावित कर सकता है. आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं.
एक्सचेंज/बायबैक पॉलिसी (Exchange/Buyback Policy): भविष्य में अगर आप गहने को बदलना चाहते हैं या बेचना चाहते हैं, तो उस ज्वेलर की एक्सचेंज या बायबैक पॉलिसी ज़रूर जान लें. कुछ ज्वेलर मेकिंग चार्जेस और जीएसटी काटकर बहुत कम दाम देते हैं. पहले से पता होने पर आप भविष्य के नुकसान से बच सकते हैं. ये भी पूछें कि क्या वो गहना किसी और ज्वेलर से खरीदने पर भी एक्सचेंज/बायबैक करेंगे या सिर्फ अपने ही स्टोर से खरीदे गए गहनों पर.
A1: असली हॉलमार्क में BIS लोगो, शुद्धता का ग्रेड (जैसे 916), ज्वेलर का पहचान चिह्न और हॉलमार्किंग सेंटर का चिह्न स्पष्ट रूप से अंकित होता है. आप BIS की वेबसाइट या ऐप पर भी हॉलमार्क की सत्यता की जांच कर सकते हैं.
A2: 24 कैरेट सोना 99.9% शुद्ध होता है, जो बहुत मुलायम होता है. गहने बनाने के लिए इसे थोड़ा कठोर बनाना ज़रूरी होता है, जिसके लिए इसमें तांबा या चांदी जैसी अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं. इसलिए गहने आमतौर पर 22 या 18 कैरेट सोने के बनते हैं.
A3: हां, अक्सर ज्वेलर मेकिंग चार्जेस में मोलभाव के लिए तैयार रहते हैं, खासकर अगर खरीद बड़ी हो. इसलिए, खरीदने से पहले दूसरे ज्वेलर के मेकिंग चार्जेस की तुलना करें और मोलभाव ज़रूर करें.
A4: नग का अपना अलग मूल्य होता है जो सोने से अलग होता है. अगर ज्वेलर नग का वजन भी सोने के वजन में जोड़ देता है, तो आप नग के लिए सोने की कीमत चुका रहे होते हैं, जो कि गलत है. हमेशा सुनिश्चित करें कि बिल में सोने का शुद्ध वजन अलग से और नग का वजन अलग से लिखा हो.