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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है.प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर के अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गया है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाज़ियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर घने प्रदूषण की चादर में ढके हुए हैं. हाल ही में खबर आई थी कि GRAP स्टेज-4 को दिल्ली एनसीआर में लागू कर दिया गया है.
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मंगलवार को ग्रैप को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया है. आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रैप के चौथे चरण लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.आयोग ने बताया कि फिलहाल पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रैप का तीसरा चरण लागू है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. इसके बावजूद, कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म और टीवी चैनल ग्रैप के चौथे चरण के लागू होने का दावा कर रहे हैं, जिससे आम जनता में भ्रम की स्थिति बन गई है.
सीएक्यूएम ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए नागरिकों और संबंधित विभागों को केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट, नोटिफिकेशन और प्रेस रिलीज पर भरोसा करना चाहिए. गलत और अपुष्ट जानकारी साझा करना न केवल जनता को भ्रमित करता है, बल्कि प्रदूषण प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों और निर्देशों को लेकर असमंजस भी पैदा करता है.आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रैप के किसी अगले चरण के लागू होने या मौजूदा चरण में बदलाव संबंधी निर्णय की आधिकारिक घोषणा केवल सीएक्यूएम द्वारा ही की जाएगी। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे असत्यापित खबरों पर ध्यान न दें.
बता दें कि 11 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर ग्रैप के तीसरे चरण के प्रतिबंध लागू किए गए थे, इस स्तर को तब लागू किया जाता है जब वायु गुणवत्ता 'सीवियर' श्रेणी में पहुंच जाती है, यानी हवा में प्रदूषक तत्वों का स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है. ग्रैप का तीसरा चरण लागू होने के साथ ही नोएडा प्राधिकरण ने शहर में कई कड़ी पाबंदियों की घोषणा की है.
आदेश आने पर नोएडा क्षेत्र में मेट्रो, अस्पताल और फ्लाईओवर से जुड़ी परियोजनाओं को छोड़कर बाकी सभी निर्माण कार्य तुरंत बंद कर दिए जाता है, धूल और प्रदूषक कणों की बड़ी मात्रा निर्माण गतिविधियों से फैलती है, इसलिए यह प्रतिबंध वायु गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. साथ ही, नोएडा में चलने वाले बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल के चार पहिया वाहन प्रतिबंधित कर दिए गए हैं. इसके अलावा, शहर में कंक्रीट मिश्रण (आरएमसी) प्लांट और स्टोन क्रशर भी अगले आदेश तक बंद रहेंगे, क्योंकि ये धूल और कणीय पदार्थ (पीएम) को हवा में बड़े पैमाने पर फैलाते हैं.
ट्रकों की एंट्री पर रोक, कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम बंद,नॉन-एसेंशियल कमर्शियल व्हीकल बैन,50% वर्क-फ्रॉम-होम नियम पर रोक रहेगी.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचने, मास्क का उपयोग करने, बच्चों व बुजुर्गों का खास रूप से ध्यान रखने और सुबह–शाम खुली हवा में टहलने से बचने की सलाह दी है. सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन पर भी प्रदूषण रोकथाम के लिए और कठोर कदम उठाने का दबाव बढ़ रहा है.
5 FAQs
1. GRAP-4 कब लागू किया जाता है?
जब दिल्ली-NCR में AQI ‘सीवियर प्लस’ या इमरजेंसी स्तर (450+) पार कर जाए, तब GRAP-4 लागू होता है.
2. GRAP-4 लागू होने पर क्या-क्या बंद होता है?
कंस्ट्रक्शन कार्य बंद, ट्रकों की एंट्री रोक, गैर-स्वच्छ ईंधन से चलने वाले उद्योग बंद, डीज़ल जेनरेटर पर रोक और 50% वर्क-फ्रॉम-होम लागू किया जाता है.
3. GRAP के दूसरे स्टेजेस में क्या पाबंदियां होती हैं?
स्टेज 1 में कोयला बंद, स्टेज 2 में DG सेट बैन, स्टेज 3 में निर्माण व BS-III/IV वाहनों पर रोक.
4. खराब AQI का स्वास्थ्य पर क्या असर होता है?
सीवियर श्रेणी की हवा अस्थमा, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों को बढ़ाती है, साथ ही स्वस्थ लोगों पर भी गंभीर असर डालती है.
5. लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
अनावश्यक रूप से बाहर ना निकलें, N95 मास्क पहनें, बच्चों और बुजुर्गों का ध्यान रखें और सुबह-शाम बाहर टहलने से बचें.
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