फुटबॉल का महाकुंभ फीफा विश्व कप 2026 का शुभारंभ 11 जून से हो रहा है. पहली बार तीन देश-अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा मिलकर इसकी मेजबानी कर रहे हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गोल और ग्लोबल फैनडम के इस जश्न के बीच, इस विश्व कप का पर्यावरण पर पड़ने वाला नुकसान कतर 2022 के मुकाबले दोगुने से भी अधिक होने का अनुमान है. यह फुटबॉल के बड़े होते स्वरूप की पर्यावरणीय कीमत पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.
पैदा करेगा 7.8 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड
रॉयटर्स के मुताबिक 48 टीमों और नॉर्थ अमेरिका के 16 शहरों में फैले इस टूर्नामेंट का कार्बन फुटप्रिंट बहुत बड़ा है. ग्लोबल कार्बन अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म ग्रीनली द्वारा पिछले हफ्ते पब्लिश एक अनुमान के मुताबिक, यह टूर्नामेंट 7.8 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) पैदा कर सकता है.
इतिहास का सबसे प्रदूषित वर्ल्ड कप
- अकादमिक एक्सपर्ट्स और कैंपेनर्स के मुताबिक, यह उत्सर्जन 1.7 मिलियन कारों के सालाना उत्सर्जन या सिएरा लियोन देश के सालाना उत्सर्जन के बराबर है.
- यह इसे इतिहास का सबसे प्रदूषित वर्ल्ड कप बनाता है. इस भारी प्रदूषण का मुख्य कारण तीन देशों में टीमों, फैंस और मीडिया द्वारा की जाने वाली लंबी यात्राएं हैं.
- राइटर और स्पोर्ट्स इकोलॉजिस्ट मेडेलीन ओर ने रॉयटर्स को बताया कि खेल और विजिबिलिटी के लिए वर्ल्ड कप शानदार है, लेकिन जलवायु के नजरिए से काफी बुरा है.
यात्रा से 87% उत्सर्जन
रिसर्चर्स के मुताबिक कुल उत्सर्जन का 87 फीसदी हिस्सा केवल यात्रा (खासकर उड़ानों) से आएगा क्योंकि फैंस अपनी टीमों के पीछे पूरे महाद्वीप के चक्कर लगाएंगे.
कतर इवेंट से ज्यादा कार्बन सघन
- वैंकूवर से मियामी तक 2,800 मील की भौगोलिक दूरी में फैला यह टूर्नामेंट स्वाभाविक तौर से कतर इवेंट से ज्यादा कार्बन-सघन है.
- कतर वर्ल्ड कप की आलोचना सात नए स्टेडियम बनाने के लिए हुई थी, लेकिन वहां कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लगभग 3.8 मिलियन टन आंका गया था.
- यूनिवर्सिटी ऑफ लॉजेन के भूगोलवेत्ता डेविड गोगिशविली के मुताबिक, इस बार कोई नया स्टेडियम नहीं बना है, लेकिन टीमों की संख्या बढ़ाने और दूरदराज के मेजबान शहरों में मैच कराने से पर्यावरणीय लागत केवल एक जगह से हटकर दूसरी जगह (हवाई यात्रियों में) शिफ्ट हो गई है.
तीन क्लस्टर में बंटे 16 मेजबान शहर
यात्रा की दूरी कम करने के लिए 16 मेजबान शहरों को पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्लस्टर में बांटा गया है. इसके बावजूद, टूर्नामेंट की फेवरेट मानी जाने वाली इंग्लैंड की टीम और उसके फैंस को डलास, बोस्टन और न्यू जर्सी में अपने तीन ग्रुप मैच के लिए 1721 मील की यात्रा करनी होगी.
नहीं निर्धारित किया है खास कार्बन टारगेट
- 2021 के संयुक्त राष्ट्र COP26 जलवायु शिखर सम्मेलन में 'यू.एन. स्पोर्ट्स फॉर क्लाइमेट एक्शन फ्रेमवर्क' के तहत फीफा ने 2030 तक अपना कार्बन उत्सर्जन आधा करने और 2040 तक नेट जीरो का टारगेट रखा था.
- फीफा ने हालांकि इस वर्ल्ड कप के लिए कोई खास कार्बन टारगेट निर्धारित नहीं किया है. डेविड गोगिशविली ने फीफा की तुलना इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (IOC) से की और कहा कि IOC 2050 तक अपना फुटप्रिंट आधा करने के लक्ष्य पर काम कर रही है, जो कम से कम सही रास्ता है.
- फीफा ने इस मामले में रॉयटर्स को दिए बयान में कहा कि वह इस निगरानी का स्वागत करता है. संस्था ने दावा किया कि मौजूदा स्टेडियमों का इस्तेमाल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा, डीजल जनरेटर पर निर्भरता कम करना, रीसाइक्लिंग और फूड वेस्ट से जुड़ी कई पर्यावरणीय पहलें लागू की हैं.
16 अतिरिक्त टीमों को किया शामिल
टूर्नामेंट के विस्तार का मतलब है 16 अतिरिक्त टीमें, जिनमें केप वर्डे, कुराकाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान जैसे चार डेब्यू करने वाले देश शामिल हैं.
600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खर्च
- मेडेलीन ओर के मुताबिक, यह विस्तार उन देशों के लिए अच्छा है, लेकिन इसकी एक भारी कीमत है. उन्होंने बताया कि डिजिटल फुटप्रिंट कार्बन उत्सर्जन का वह बड़ा हिस्सा है जिस पर कभी चर्चा नहीं होती.
- ब्रॉडकास्टिंग, स्ट्रीमिंग, डेटा फीड और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म डेटा से लेकर सैटेलाइट और करोड़ों डिवाइस तक भारी ऊर्जा की खपत करते हैं.
- ब्रिटेन के नेशनल एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर (NESO) के अनुमान के मुताबिक, स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के हर ग्रुप मैच के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर 600 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खर्च हो सकती है. यह ग्लासगो और लीड्स की कुल बिजली मांग के बराबर है.
- फैंस टीवी पर मैच देखने के साथ-साथ फोन पर भी इसे फॉलो करते हैं. फ्लाइट्स या स्टेडियम निर्माण के विपरीत, इस मल्टी-स्क्रीन उत्सर्जन को आधिकारिक गणनाओं में मुश्किल से ही शामिल किया जाता है.
फीफा ने दिया ये जवाब
फीफा ने कहा है कि वह सस्टेनेबिलिटी और मानवाधिकार रणनीति द्वारा निर्देशित है और उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान लगा रहा है. लेकिन मैनचेस्टर यूनाइटेड के फैंस गोगिशविली का साफ कहना है कि फीफा के अंदर गंभीरता की कमी है. उन्होंने कहा कि फीफा अपने निगेटिव पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने को प्राथमिकता नहीं देता है, इसलिए मीडिया, खिलाड़ियों, देशों, रिसर्चर्स, सरकारों और जनता की ओर से उन पर सख्त दबाव बनाने की आवश्यकता है.
Zee5 और Unite8 Sports पर होगा प्रसारण?
भारत में फुटबॉल का क्रेज लगातार बढ़ रहा है. KPMG की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में करीब 30 करोड़ फुटबॉल दर्शक हैं. भारतीय दर्शक FIFA World Cup 2026 की कवरेज Zee5 और Unite8 Sports पर देख सकेंगे.