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IRS Anvesh film - Storytellers Diary: पुणे में GST विभाग के जॉइंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत IRS अधिकारी अन्वेष की फिल्म ‘कथाकार की डायरी’ (The Story of the ordinary lives) ने ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है. इस फिल्म को प्रतिष्ठित इंटरनेशनल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल (INYFF) में आधिकारिक तौर पर चयनित किया गया है, जो न केवल अन्वेष और उनकी टीम के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है.
‘कथाकार की डायरी’ की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतना ही प्रेरक है इसका निर्माण. बेहद सीमित बजट में बनी इस फिल्म को अन्वेष ने दिन में अपनी सरकारी ड्यूटी निभाते हुए और रात में शूटिंग करते हुए तैयार किया. यह उनकी लगन और जुनून का परिणाम है कि उन्होंने उड़ीसा, मुंबई और पुणे के लगभग 200 थिएटर कलाकारों और टेक्नीशियनों के साथ मिलकर इस कोलैबोरेटिव वेंचर को अंजाम दिया. यह फिल्म न केवल एक सिनेमाई कृति है, बल्कि सामूहिक प्रयास और सृजनात्मकता का एक जीवंत उदाहरण भी है.
फिल्म की खासियत को और बढ़ाता है इसका संपादन, जिसे नेशनल अवॉर्ड विजेता एडिटर असीम सिन्हा ने किया है. असीम सिन्हा, जिन्होंने श्याम बेनेगल की कई प्रतिष्ठित फिल्मों को संपादित किया है, इस प्रोजेक्ट से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कोई फीस लिए बिना इस फिल्म को एडिट किया. यह उनके और अन्वेष के बीच साझा सिनेमाई दृष्टिकोण और कला के प्रति समर्पण को दर्शाता है.
हाल ही में मुंबई के जुहू में आयोजित ‘कथाकार की डायरी’ की एक निजी स्क्रीनिंग में दिग्गज अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने फिल्म की जमकर तारीफ की. उन्होंने इसकी तुलना भारतीय सिनेमा के दो दिग्गजों, सत्यजीत राय और मृणाल सेन की कालजयी कृतियों से की. शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “अन्वेष की यह फिल्म मुझे मेरे FTII के दिनों की याद दिलाती है. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की कृति है, जिसमें हर किरदार जीवंत और यथार्थवादी है. सीमित संसाधनों के बावजूद, अन्वेष का सिनेमाई जुनून और शिल्प स्क्रीन पर साफ झलकता है.”
‘कथाकार की डायरी’ का INYFF में चयन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची कहानियां और सशक्त कहानी कहने की कला किसी बजट की मोहताज नहीं होती. इस फिल्म में कपिल भागवत, योगेश जाधव, आरोही चटर्जी और डैनियल जैसे कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं, जिनके अभिनय ने दर्शकों का दिल जीता है. एक प्राईवेट स्क्रीनिंग में फिल्म निर्माता सेजल शाह, निर्माता कृषिका लुल्ला, निर्देशक सई कबीर, और सोशल ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट रेखा राव और गौरी सावंत ने भी फिल्म की काफी तारीफ की.

IRS अन्वेष की यह उपलब्धि केवल एक फिल्म का चयन नहीं, बल्कि एक ऐसी कहानी है जो कला के प्रति समर्पण, कठिन परिश्रम और सामूहिक प्रयासों का प्रतीक है. बेहद कम संसाधनों में बनी यह फिल्म अब वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने के लिए तैयार है, और यह भारतीय सिनेमा के लिए एक गर्व का क्षण है. ‘कथाकार की डायरी’ न केवल साधारण जिंदगियों की कहानी बयां करती है, बल्कि यह साबित करती है कि बड़े सपनों को हकीकत में बदलने के लिए जुनून और मेहनत ही काफी है.‘कथाकार की डायरी’ का इंटरनेशनल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में चयन भारतीय सिनेमा के उभरते सितारों और उनकी रचनात्मकता को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक शानदार उदाहरण है.
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